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नवरात्रि विशेष: देखे राजनांदगांव के बर्फानी धाम और पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

नवरात्रि विशेष: देखे राजनांदगांव के बर्फानी धाम और पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

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बर्फानी धाम छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव शहर में एक विशाल हिन्दू मंदिर है। यह दुर्ग से 40 किलोमीटर (25 मिनट) दूर है। एक बड़ा शिव लिंग मंदिर के शीर्ष पर देखा जा सकता है, जबकि एक बड़ी नंदी की प्रतिमा सामने खड़ी है। मंदिर का निर्माण तीन स्तरों में किया गया है। सबसे नीचे माँ पाताल भैरवी का मंदिर है। दूसरा मंजिल में नवदुर्गा या त्रिपुरा सुंदरी माता का मंदिर है और सबसे ऊपर शिव जी का मंदिर है। वीडियो देखे https://youtu.be/jYFF0srjrvo बर्फानी धाम राजनांदगाव कैसे पहुंचे सड़क मार्ग से: पाताल भैरवी देवी मंदिर राजनंदगांव में आशा नगर के पास स्थित है। यह राजनांदगांव बस स्टेशन से सिर्फ 5 किमी दूर स्थित है। यह लोकप्रिय रूप से बरफ़ानी धाम या पाताल भैरवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। ट्रेन से: सीधे लोकल या पैसेंजर ट्रेने रायपुर से उपलब्ध हैं। राजनांदगांव रायपुर से 89 किमी (1:30 घंटे) दू
नवरात्रि विशेष : आज पढ़िए श्री महामाया मंदिर, रतनपुर के बारे में

नवरात्रि विशेष : आज पढ़िए श्री महामाया मंदिर, रतनपुर के बारे में

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भारत के दक्षिण पूर्व में स्थित करोड़ों लोगों की श्रद्धा एवं आस्था के प्रतीक, वास्तुकला की मिसाल तथा हमारी संस्कृति की पहचान "श्री महामाया मंदिर, रतनपुर" आपका स्वागत करता है। कई दशकों से इस मंदिर ने अनेक इतिहासकारों तथा पुरातत्त्वविदों को अपनी ओर आकर्षित किया है। चारों ओर से हरी हरी पहाड़ियों से घिरी, लगभग 150 तालों को अपनी गोद में समेटे रतनपुर नगरी में वर्ष में 2 बार भक्तों का तांता लगता है। भक्तगण लाखों की संख्या में नवरात्र के पर्व पर अपनी आराध्य देवी महामाया की प्रतिमा-द्वय के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ते हैं। बिलासपुर-अंबिकापुर राजमार्ग (छत्तीसगढ़) में बिलासपुर से 25 किलोमीटर पर ऐतिहासिक रत्नपुर (अब रतनपुर) की नगरी में स्थित दर्जनों छोटे मंदिर, स्तूप, किले तथा अन्य निर्माणों के पुरावशेष मानों अपनी कहानी बताने के लिये तत्पर हैं। महामाया मंदिर का इतिहास रतनपुर का इतिहास लगभग एक सहस्
डोंगरगढ़ : बीमार बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर 100 सीढ़ियां चढ़ कर मंदिर तक ले गयी महिला सिपाही पूजा देवांगन

डोंगरगढ़ : बीमार बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर 100 सीढ़ियां चढ़ कर मंदिर तक ले गयी महिला सिपाही पूजा देवांगन

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राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ मंदिर में हुई एक घटना ने पुलिस का सकारात्मक चेहरा पेश किया है। राजनांदगांव जिले के इस मंदिर में बेसुध पड़ी एक महिला को उसका पति ऊपर चढ़ाने की कोशिश कर रहा था। बीमार महिला बेहद कमजोर होने की वजह से सीढ़ियां नहीं चढ़ पा रही थी। पास के ही सहायता केंद्र में तैनात महिला पुलिसकर्मी पूजा देवांगन ने कंधों से सहारा देकर महिला को ऊपर मंदिर तक ले जाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद पूजा ने उसे गोद में उठाया और तकरीबन 100 सीढ़ियां चढ़कर महिला को मां बम्लेश्वरी के दर्शन करवाए। बिलासपुर के रहने वाले लेखक द्वारिका प्रसाद अग्रवाल इस दौरान खुद वहां मौजूद थे। सिपाही पूजा के जज्बे को उन्होंने अपने कैमरे में कैद कर लिया। द्वारिका ने बताया कि पूजा से उनका परिचय सोशल मीडिया के जरिए हुआ था। वह यहां पहुंचकर पूजा से मुलाकात कर ही रहे थे कि, तब ही उनके साथ मंदिर आई पत्नी
नवरात्रि विशेष: कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, सात तालाबों से घिरा है भगवान श्री राम का नौनिहाल

नवरात्रि विशेष: कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, सात तालाबों से घिरा है भगवान श्री राम का नौनिहाल

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंदखुरी ग्राम में माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर विराजमान है। यह मंदिर दुर्लभतम है, जैसे पुष्कर में ब्रह्मा जी का एकमात्र प्राचीन मंदिर है, वैसे ही रायपुर के पास कौशल्या जी का एकमात्र मंदिर स्थित है। प्राकृतिक सुषमा के अनेक अनुपम दृश्य इस स्थल पर दृष्टिगोचर होते हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में मां कौशल्या की गोद में बालरुप में भगवान श्रीरामजी की वात्सल्यम प्रतिमा श्रद्धालुओं एवं भक्तों का मन मोह लेती है। दक्षिण कौशल यानी छत्तीसगढ़ राज्य मां कौशल्या के नाम से जाना जाता है। इसे भगवान राम का ननिहाल कहा जाता है। सोमवंशी नरेश ने माता कौशल्या और भगवान राम को 7 तालाबों के बीच स्थापित कर आस्था का दीप जलाया था। इस भक्ति भाव की किरणें आज पूरे देश में फैल रही हैं। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जननी माता कौ
नवरात्रि विशेष : चंडी माता के बागबाहरा के दरबार में भालू भी आते है प्रसाद लेने

नवरात्रि विशेष : चंडी माता के बागबाहरा के दरबार में भालू भी आते है प्रसाद लेने

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यहाँ पर माता की जैसे आरती की घंटी बजती है माता के दरबार में भालू प्रसाद के लिए आते है, इन भालुओ ने आज तक किसी को कोई नुकसान नही पहुचाया है इसे माता का चमत्कार भी कहा जाता है। बागबाहरा | चंडी माता मन्दिर महासमुंद जिला अंतर्गत ग्राम बागबाहरा के समीप घुंचापाली में स्थित है। ग्राम बागबाहरा चारो ओर प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। चारो ओर से जंगलो और पहाड़िओ से घिरे ग्राम में विराजमान है स्वयंभू माँ चंडी। माता चंडी रूप देखते ही बनता है लगभग 9 फ़ीट ऊंची माँ की विशालकाय भूगर्भित प्रतिमा जो निरंतर बढ़ रही है, स्वयं में अद्वितीय है। मंदिर पहाड़ी के ऊपर स्थित है माँ चंडी का मंदिर जिला महासमुंद से 38 km की दुरी पर स्थित है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); पहाड़ी पर चढ़ने हेतु सीढ़ियों की कोई आवश्यकता नहीं है लंबे ढलान के होने से चढ़ाई अत्यंत सुगम हो जाती है अतः बुजुर्गो
नवरात्रि विशेष: जानिए चंद्रपुर की चंद्रहासिनी माता के बारे में

नवरात्रि विशेष: जानिए चंद्रपुर की चंद्रहासिनी माता के बारे में

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माता सती के अंग जहां-जहां धरती पर गिरे थे, वहां आज वर्तमान में शक्ति माता श्री दुर्गा के शक्तिपीठ स्थापित हैं।छत्तीसगढ़ में भी अनेक स्थानों माता के शक्तिपीठ स्थापित है। जिनमे से एक माता चंद्रहासिनी का मंदिर है। जांजगीर-चाम्पा जिले के डभरा तहसील में मांड नदी,लात नदी और महानदी के संगम पर स्थित है एक गांव चन्द्रपुर, जहाँ शक्ति माँ चंद्रहासिनी देवी का मंदिर है। यहाँ सिद्ध मां दुर्गा के 52 शक्तिपीठों में से एक स्वरूप मां चंद्रहासिनी के रूप में विराजित है। चंद्रमा की आकृति जैसा मुख होने के कारण इसकी प्रसिद्धि चंद्रहासिनी और चंद्रसेनी या चंद्रासैनी मां के नाम से जानी जाती है। चंद्रपुर जिला मुख्यालय जांजगीर-चाम्पा से 120 किलोमीटर तथा रायगढ़ से 32 किलोमीटर और सारंगढ़ से 22 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यहां माता चंद्रसेनी का वास है। वहाँ कुछ ही दुर (लगभग 1.5कि.मी.) पर माता नाथलदाई का मंदिर है जो की
नवरात्रि विशेष: जानिए बस्तर की कुलदेवी माँ दंतेश्वरी के बारे में

नवरात्रि विशेष: जानिए बस्तर की कुलदेवी माँ दंतेश्वरी के बारे में

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दन्तेश्वरी मंदिर जगदलपुर शहर से लगभग 84 किमी (52 मील) स्थित है। माता दंतेश्वरी का यह मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध एवं पवित्र मंदिर है, यह माँ शक्ति का अवतार है। माना जाता है कि इस मंदिर में कई दिव्य शक्तियां हैं। दशहरा के दौरान हर साल देवी की आराधना करने के लिए आसपास के गांवों और जंगलों से हजारों आदिवासी आते हैं। यह मंदिर जगदलपुर के दक्षिण-पश्चिम में दंतेवाड़ा में स्थित है और यह पवित्र नदियां शंकिणी और डंकिनी के संगम पर स्थित है, यह छह सौ वर्ष पुराना मंदिर भारत की प्राचीन विरासत स्थलों में से एक है और यह मंदिर बस्तर क्षेत्र का सांस्कृतिक-धार्मिक-सामाजिक का प्रतिनिधित्व है। आज का विशाल मंदिर परिसर इतिहास और परंपरा की सदियों से वास्तव में खड़ा स्मारक है। इसके समृद्ध वास्तुशिल्प और मूर्तिकला और इसके जीवंत उत्सव परंपराओं का प्रमाण है। दंतेश्वरी माई मंदिर इस क्षेत्र के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण
नवरात्रि विशेष : मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़, राजनांदगाव के बारे में जानिए

नवरात्रि विशेष : मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़, राजनांदगाव के बारे में जानिए

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छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित है मां बम्लेश्वरी का भव्य मंदिर। पहाड़ों से घिरे होने के कारण इसे पहले डोंगरी और अब डोंगरगढ़ के नाम से जाना जाता है। यहां ऊंची चोटी पर विराजित बगलामुखी मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर। छत्तीसगढ़ ही नहीं देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केन्द्र बना हुआ है। हजार से ज्यादा सीढिय़ां चढ़कर हर दिन मां के दर्शन के लिए वैसे तो देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां आते हैं लेकिन नवरात्रि के दौरान अलग ही दृश्य होता है। जो ऊपर नहीं चढ़ पाते उनके लिए मां का एक मंदिर पहाड़ी के नीचे भी है जिसे छोटी बम्लेश्वरी मां के रूप में पूजा जाता है। अब मां के मंदिर में जाने के लिए रोप वे भी लगाया गया है। मंदिर का इतिहास  लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व इसे कामाख्या नगरी के नाम से जाना जाता था। यहाँ राजा वीरसेन का शासन था। वे नि:संतान थे। संतान की कामना के ल
जनगणना 2021 के आधार पर अनुसूचित जाति का आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा

जनगणना 2021 के आधार पर अनुसूचित जाति का आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा

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छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण प्रतिशत बढ़ाये जाने पर समाज द्वारा अनुसूचित जाति सम्मेलन एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल समारोह के मुख्य अतिथि थे। आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री श्री बघेल का शानदान अभिनंदन किया गया। समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के साथ ही समाज के सभी वर्गों को न्याय दिलाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्हांेने अपना सम्बोधन संत शिरोमणि बाबा गुरू घासीदास, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जयकारे के साथ किया। स्थानीय बलबीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में आयोजित समारोेह में श्री बघेल ने कहा कि संविधान में प्रदत्त अधिकार के तहत प्रदेश में आरक्षण का प्रतिशत जनगणना 2011 के आधार पर बढ़ाया गया है। आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाया जाना इन वर्गो का अधिकार है। इसके तहत राज्य स
मनमोहक है जशपुर का राजपुरी वॉटरफॉल

मनमोहक है जशपुर का राजपुरी वॉटरफॉल

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जशपुर जिले में घने जंगलो के बीच में राजपुरी जलप्रपात जिले के उन स्थानों में से एक है जहां लोग सबसे ज्यादा घूमने जाते है। साथ ही यह एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है। यहाँ आसपास के आदिवासी गांव एक अलग ही आकर्षण का केंद्र हैं पहाड़ी के दोनों किनारों पर चट्टानी दीवार और हरे जंगलो को देख बहुत शांति और सुखद अनुभव लगता है। जशपुर में कई अन्य स्थानों की तरह, यहां भी कहने के लिए बहुत दिलचस्प कहानियां हैं और कई लोकप्रिय लोककथाएं भी है सुनने के लिए। यह जगह जशपुर मुख्य शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वीडियो देखे https://youtu.be/ybA4SByhS-4 राजपुरी झरना तक कैसे पहुंचे सड़क मार्ग से: जशपुर अच्छी तरह से सड़कों और राजमार्गों के एक अच्छे नेटवर्क द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रमुख और छोटे शहरों से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग 78 (NH-78) जशपुर से गुजरता है। ट्रेन से: निकटतम रेलवे स्टेशन अंबिकापुर र