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पोला तिहार: बैलो के श्रृँगार व गर्भ पूजन का पर्व है पोला, जानिए पूजन विधि, महत्व और पौराणिक कथा

पोला तिहार: बैलो के श्रृँगार व गर्भ पूजन का पर्व है पोला, जानिए पूजन विधि, महत्व और पौराणिक कथा

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किसी भी राज्य की सार्थक पहचान उनकी संस्कृति से होती है। जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य भारत देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जो पूर्णतः कृषि कार्य प्रधान राज्य है। यहाँ के निवासी पूरे वर्ष भर खेती कार्य मे लगे रहते है। धान की खेती यहाँ की प्रमुख फसल है। यहाँ के निवासियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को कुछ इस तरह संजोकर रखा है, कि कृषि कार्यो के दौरान साल के विभिन्न अवसरो पर- खेती कार्य आरंभ होने के पहले अक्ती, फसल बोने के समय सवनाही, उगने के समय एतवारी-भोजली, फसल लहलहाने के समय हरियाली, आदि आदि अवसरो व ऋतु परिवर्तन के समय को धार्मिक आस्था प्रकट कर पर्व-उत्सव व त्योहार के रूप मे मनाते हुए जनमानस मे एकता का संदेश देते है। यहाँ के निवासी, पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं तथा प्रकृति को भी भगवान की ही तरह पूजा करते है। बैलो के श्रृँगार व गर्भ पूजन का पर्व-पोला पोला पर्व के अवसर पर तरह तरह के व्यंजन बनाए जात
Raipur Train Time Table Arrivals and Departures

Raipur Train Time Table Arrivals and Departures

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Arrival / Departure at Station - RAIPUR JN (R) Train Number Train Name Source Station Dest. Station Train Timings at R Running Days Available Classes Arrival Depart. Halt Su Mo Tu We Th Fr Sa 1A FC 2A 3A 3E CC SL 2S 58217 TIG RAIPUR PASS TIG R 00:30 -- -- Y Y Y Y Y Y Y UNRESERVED TRAIN 58218 R TIG PASS R TIG -- 02:00 -- Y Y Y Y Y Y Y UNRESERVED TRAIN 68701 R DURG MEMU R DURG -- 04:50 -- Y Y Y Y Y Y Y UNRESERVED TRAIN 58527 R VSKP PASS R VSKP -- 05:30 -- Y Y Y Y Y Y Y UNRESERVED TRAIN 68730 DGG R MEMU DGG R 06:30 -- -- Y Y Y Y Y Y Y UNRESERVED TRAIN 68728 R BSP MEMU R BSP -- 07:05 -- Y Y Y Y Y Y Y UNRESERVED TRA...
Raipur Airport Flight Schedule Arrivals Departures Status

Raipur Airport Flight Schedule Arrivals Departures Status

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Raipur is the capital city of Chhattisgarh and has flight connectivity with various cities of India through Swami Vivekananda Airport.  Daily flights from Raipur to Delhi, Mumbai, Kolkata, Hyderabad operated by various airlines Indigo, Air India, Vistara etc. You can use our list to track specific flight and airlines status at Swami Vivekanda Airport Raipur Chhattisgarh. Raipur Swami Vivekananda Airport Arrivals powered by Airportia
हरेली तिहार: छत्तीसगढ़ का पहला तिहार, अच्छे फसल और स्वास्थ्य की कामना

हरेली तिहार: छत्तीसगढ़ का पहला तिहार, अच्छे फसल और स्वास्थ्य की कामना

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धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ अपनी संस्कृति और तीज त्योहारों के लिए भी प्रसिद्ध है. हरेली तिहार पहला त्यौहार है जिसका किसानों के लिए बहुत महत्व है. हरेली छत्तीसगढ़ी शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ होता है ‘हरियाली’. तब प्रकृति भी प्रचंड गर्मी के बाद हरियाली से आच्छादित हो जाती है. छत्तीसगढ़ के ‘गोंड‘ जनजातीय का मुख्य रूप से महत्वपूर्ण त्योहार है. यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के सावन (श्रावण) महीने के श्रावणी अमावस्या के दिन मनाया जाता है. जो जुलाई और अगस्त के बीच वर्षा ऋतु में होता है. यह त्यौहार ‘श्रावण’ के महीने के प्रारंभ को दर्शाता है जो कि हिंदुओं का पवित्र महीना है. रिवाज: पशुधन और किसानी में काम आने वाले औजारों की पूजा की जाती है  यह त्योहार पूरे दिन मनाया जाता है और किसी को भी कोई काम करने की अनुमति नहीं है। खेतों से संबंधित उपकरण और गायों की इस शुभ दिन पर किसान पूजा करत
#Temple लक्ष्मण मंदिर सिरपुर, महासमुंद

#Temple लक्ष्मण मंदिर सिरपुर, महासमुंद

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सिरपुर में लक्ष्मण मंदिर भारत में पहली ईंट से निर्मित मंदिर है। सिरपुर को श्रीपुर के नाम से भी जाना जाता है इसका अर्थ है "शुभता का शहर", "बहुतायत", "लक्ष्मी"। यह छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक गांव है और यह महानदी नदी के तट पर राजधानी रायपुर से 78 किमी दूर और महासामंद शहर से 35 किमी दूर है। सन 1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा ( जो कि एक औपनिवेशिक ब्रिटिश भारत में अधिकारी थे) सिरपुर में लक्ष्मण मंदिर पर उनकी रिपोर्ट द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ध्यान में लाई गई। भारत में यह एकमात्र लक्षमण मंदिर है। 6 वीं शताब्दी के दौरान  सरभपुरियस और पाण्डुवंसिस के शासन काल में सिरपुर दक्षिण कोशल राज्य का केंद्र था। सिरपुर में और आसपास के पुरातात्विक अवशेष मंदिरों और मठों के रूप में हिन्दू और बौद्ध स्मारकों दोनों के हैं। उनमें से, सबसे अच्छी तरह से संरक्षित शानदार मंदिर, वसाता द्वारा निर्मित पूर्व मुखी ल
#Temple कुकुरदेव मंदिर, इस प्राचीन मंदिर में होती है कुत्ते की पूजा

#Temple कुकुरदेव मंदिर, इस प्राचीन मंदिर में होती है कुत्ते की पूजा

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छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से छह किलोमीटर दूर मालीघोरी खपरी गांव में “कुकुरदेव” नाम का एक प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर किसी देवी-देवता को नहीं बल्कि कुत्ते को समर्पित है, हालांकि साथ में शिवलिंग आदि प्रतिमाएं स्तिथ है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से कुकुर खांसी व कुत्ते के काटने का कोई भय नहीं रहता है। मंदिर का इतिहास इस मंदिर का निर्माण फणी नागवंशी शासकों द्वारा 14वीं-15 वीं शताब्दी में कराया गया था। मंदिर के गर्भगृह में कुत्ते की प्रतिमा स्थापित है और उसके बगल में एक शिवलिंग भी है। कुकुर देव मंदिर 200 मीटर के दायरे में फैला है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर भी दोनों ओर कुत्तों की प्रतिमा लगाई गई है। लोग शिव जी के साथ-साथ कुत्ते (कुकुरदेव) की वैसे ही पूजा करते हैं जैसे शिवमंदिरों में नंदी की पूजा होती है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); यह मंदिर दरअसल भैरव स्मारक
#temple 6 महीने में बना था देवबलोदा चरोदा का 6-मासी शिव मंदिर

#temple 6 महीने में बना था देवबलोदा चरोदा का 6-मासी शिव मंदिर

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सघन वन वल्लारियों से आच्छादित मेकल, रामगढ़ तथा सिहावा की पर्वत श्रेणियों से सुरक्षित एवं महानदी, शिवनाथ, खारून, जोंक, हसदो आदि कई छोटी बड़ी नदियों से सिंचित छत्तीसगढ़ प्राचीनकाल में दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था। इन नदियों के तट और घाटियों में न जाने कितनी सभ्यताओं का उदय, विकास और अस्त कालगति के अनुसार होता रहा, जिनके अवशेष अभी भी अनेक स्थानों पर बिखरे हुए हैं और उनके प्राचीन महत्व और गौरव की महिमा का गुणगान करते नहीं अघाते हैं। ऐसा ही एक प्राचीन स्थल दुर्ग के पास है- देव बलोदा। प्राचीनकाल में देव मंदिरों के लिए प्रसाद शब्द का प्रयोग किया जाता था। प्रसाद का अर्थ होता है वह स्थल जहां मन प्रसन्न हो। जिनकी रमणीयता से देवताओं और मनुष्यों के मन प्रसन्न होते हैं- वे प्रसाद है। इसीलिए प्रसाद या देवमंदिरों के निर्माण के लिए सुरम्य स्थलों का चुनाव किया जाता था। वराहमिहिर लिखते हैं कि वन, नद
#temple ढोलकल के गणेश, जहाँ गिरा था भगवान गणेश का दाँत

#temple ढोलकल के गणेश, जहाँ गिरा था भगवान गणेश का दाँत

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हमारा छत्तीसगढ़ अनेक विविधताओं और रहस्यों से भरा है। जहां धर्म, आस्था और रोमांच का संगम कई स्थानों में एक साथ देखने को मिलता है। ऐसी ही एक जगह है ढोलकल जहां धरती के प्रथम पूज्य देव भगवान गणेश की अद्भुत प्रतिमा स्थित है। प्रदेश की राजधानी रायपुर से लगभग 395 किमी दूर प्राकृतिक छटा के बीच दक्षिण बस्तर के जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से 30 किलोमीटर दूर बैलाडीला की 3000 फीट ऊंची बहुत ही दुर्गम फरसपाल पहाड़ी पर सैकड़ों साल पुरानी, नागवंशीय राजाओं द्वारा स्थापित है भगवान ढोलकल गणेश जी की प्रतिमा। भगवान गणेश जी की यह भव्य प्रतिमा वास्तुकला की दृष्टि से भी अत्यन्त कलात्मक है जो 6 फीट ऊंची ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है। ऊपरी दाएं हाथ में फरसा, ऊपरी बाएं हाथ में टूटा हुआ एक दंत, नीचे दाएं हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला धारण किए हुए तथा नीचे बाएं हाथ में मोदक धारण किए हुए आयुध के रूप में विराजित है यह अद्भु
#culture तीजा तिहार: कल करू भात खाकर आज सुहागिनों ने रखा तीजा व्रत, जानिए पूजा विधि और महत्व

#culture तीजा तिहार: कल करू भात खाकर आज सुहागिनों ने रखा तीजा व्रत, जानिए पूजा विधि और महत्व

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भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीजा का पर्व इस बार 12 सितंबर को मनाया जा रहा है। मनभावन पति के लिए कुंवारी कन्याएं और अखंड सौभाग्य के लिए सुहागन महिलाएं बड़े उत्साह से यह व्रत रखती हैं। छत्तीसगढ़ में तीजा का पर्व काफी माना जाता है। तीजा के लिए मायके से भाई या पिता अपनी बेटी के ससुराल जाकर तीजा मनाने का न्योता देकर उसे मायके ले आता है। सुहागन महिलाएं तीजा का व्रत अपने मायके में रहकर करती हैं। बेटी को मायके आने का न्यौता देने के अलावा तीजा के लुगरा, कडु भात खाना, हाथों में मेहंदी लगाना, तीजा के दिन निर्जल व्रत रखना, शाम को फुलेरा सजाना, प्रदोष काल में पूजा करना, रात्रि जागराण करना और ठीक अगले दिन चतर्थी को सुबह विसर्जन करने के बाद तिखूर खाकर व्रत तोड़ने की परंपरा बहुत ही अनोखी है। अन्य राज्यों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ में तीजा का महत्व कुछ अधिक है। न्यौता मायके से, लिवाने सस
#culture तीजा के तीज सुहागन महिलाओं का त्यौहार, जानिए पौराणिक कथा और महत्व

#culture तीजा के तीज सुहागन महिलाओं का त्यौहार, जानिए पौराणिक कथा और महत्व

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सुहागिनें जहां अपने पति की लंबी आयु के लिए तीज का व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित लड़कियां अच्छा वर प्राप्त करने के लिए यह व्रत करती हैं। यूं तो हरतालिका तीज देश के कई राज्यों में मनाई जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस त्योहार का उत्साह दोगुना हो जाता है। मानसून के मौसम का स्वागत करने के लिए छत्तीसगढ़ और उत्तरी भारत में तीज त्योहार ('छत्तीसगढ़ी  में तीजा') मनाया जाता है। पति की लंबी उम्र की कामना और परिवार की खुशहाली के लिए सभी विवाहित महिलाओं में निर्जला उपवास रखती है (वे पूरे दिन पानी नहीं पीते हैं) और शाम को तीज माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा के बाद, वे पानी और भोजन लेती है। तीज के एक दिन पहले सभी महिलाये एक दूसरे के घर जाकर कड़वा भोजन (छत्तीसगढ़ी में 'करू भात') का सेवन करती है। करेले की सब्जी एवं अन्य व्यंजन बनाये जाते है।  यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया (भादो की शुक्ल पक्ष क