chhattisgarh news media & rojgar logo

tourism

खिल उठेगा प्रभु श्री राम जी का ननिहाल, कौशल्या मंदिर को सुसज्जित करने विधायक द्वय ने मुख्यमंत्री को सौंपा 1.10-1.10 लाख रूपए का चेक

खिल उठेगा प्रभु श्री राम जी का ननिहाल, कौशल्या मंदिर को सुसज्जित करने विधायक द्वय ने मुख्यमंत्री को सौंपा 1.10-1.10 लाख रूपए का चेक

chhattisgarh, News, special, tourism
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को आज उनके निवास कार्यालय में आयोजित जनचौपाल भेंट मुलाकात कार्यक्रम में रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री विकास उपाध्याय और भिलाई के विधायक तथा महापौर श्री देवेन्द्र यादव ने चंदखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर को बेहतर ढ़ंग से व्यवस्थित करने और निर्माण कार्य के लिए 1.10-1.10 लाख रूपए का चेक सौंपा। इस अवसर पर वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर और रायपुर उत्तर के विधायक श्री कुलदीप जुनेजा भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर से करीब 27 किमी दूरी पर आरंग विकासखंड के ग्राम चंद्रखुरी में माता कौशल्या का मंदिर है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की माता कौशल्या का यह मंदिर पूरे भारत में एक मात्र होने के कारण प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है। यह क्षेत्र रामवनगमन पथ में होने के कारण उनके यहां वनवास काल में आने की जनश्रुति मिलती है।
छत्तीसगढ़: अब 3 नहीं 5 दिन का होगा राज्योत्सव, राज्यपाल के कहने पर सीएम भूपेश बघेल ने की घोषणा

छत्तीसगढ़: अब 3 नहीं 5 दिन का होगा राज्योत्सव, राज्यपाल के कहने पर सीएम भूपेश बघेल ने की घोषणा

chhattisgarh, News, tourism
रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर चल रहा राज्योत्सव अब तीन की बजाय पांच दिन का होगा। शनिवार को राज्योत्सव में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंची राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा कि दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाले व्यापार मेले की तर्ज पर राज्योत्सव का आयोजन किया गया है। यहां काफी भव्य और आकर्षक पंडाल लगे हैं, इसलिए तीन दिन का समय काफी कम है। आप सभी को बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि आदरणीया राज्यपाल महोदया जी की भावना के अनुरूप राज्योत्सव का कार्यक्रम 2 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है। आप सभी सपरिवार पहुंचें और आपके अपने राज्योत्सव का आनंद लें।#CGRajyotsav2019 — Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) November 2, 2019 pic.twitter.com/LyNTisVWAL — Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) November 2, 2019 इसके बाद सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि राज्यपाल का कथन आदेश होता है। इ
छत्तीसगढ़: जशपुर में 100 एकड़ में चाय-कॉफी, कोंडागांव में मक्का व गरियाबंद में 32 करोड़ में लगाएंगे कोदो प्रोसेसिंग सेंटर

छत्तीसगढ़: जशपुर में 100 एकड़ में चाय-कॉफी, कोंडागांव में मक्का व गरियाबंद में 32 करोड़ में लगाएंगे कोदो प्रोसेसिंग सेंटर

chhattisgarh, News, special, tourism
रायपुर (एजेंसी) | पहली बार राज्य के आदिवासी क्षेत्रों की विशेषता को ध्यान में रखकर सरकार ने 2474 करोड़ का प्लान तैयार किया है। इसके अंतर्गत जशपुर में 100 एकड़ में चाय-कॉफी प्रोसेसिंग सेंटर, कोंडागांव में मक्का और सूरजपुर व गरियाबंद में 32 करोड़ खर्च कर कोटो-कुटकी प्रोसेसिंग सेंटर लगाए जाएंगे। मुख्य सचिव सुनील कुजूर की अध्यक्षता में अनुसूचित जनजाति उपयोजना समिति की बैठक में इसका खाका तैयार कर लिया गया है। इसे केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय को भेजा जाएगा। राज्य के उत्तरी व दक्षिणी हिस्से की जलवायु विविधता के साथ-साथ कई खास किस्म के उत्पादों के लिए भी बेहतर है। जैसे जशपुर में चाय की खेती की जा रही है। जशपुर और बस्तर में काजू का उत्पादन होता है। इसे ध्यान में रखकर इन क्षेत्रों के विकास के लिए प्लान तैयार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इन क्षेत्रों में प्रोसेसिंग सेंटर के साथ-साथ ब
रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे, 23 अक्टूबर को ‘जनचौपाल: भेंट-मुलाकात‘ कार्यक्रम स्थगित

रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे, 23 अक्टूबर को ‘जनचौपाल: भेंट-मुलाकात‘ कार्यक्रम स्थगित

chhattisgarh, News, tourism
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री 22 अक्टूबर को सुबह 10 बजे राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से विशेष विमान द्वारा झारखण्ड के बोकारो के लिए रवाना होंगे। श्री बघेल वहां से जामताड़ा जिला मुख्यालय पहुंचकर वहां आयोजित आमसभा में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री बोकारो से कानपुर (उत्तरप्रदेश) आएंगे और यहां अपरान्ह 3.30 बजे किदवई नगर में आयोजित अभिनंदन समारोह और शाम 5 बजे लाजपत भवन लॉन मोतीझील में आयोजित ‘शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी जयंती समारोह’ तथा अन्य स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री कानपुर से कार द्वारा लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचकर विशेष विमान द्वारा रात्रि 10 बजे नई दिल्ली पहुंचेंगे और छत्तीसगढ़ सदन में रात्रि विश्राम करेंगे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित निवास
विजयादशमी विशेष: 600 वर्ष पुराना और 75 दिनों तक मनाया जाता है बस्तर दशहरा, विश्व का सबसे लम्बा चलने वाला पर्व है

विजयादशमी विशेष: 600 वर्ष पुराना और 75 दिनों तक मनाया जाता है बस्तर दशहरा, विश्व का सबसे लम्बा चलने वाला पर्व है

chhattisgarh, News, tourism, Videos
बस्तर का दशहरा अपनी अभूतपूर्व परंपरा व संस्कृति की वजह से विश्व प्रसिद्ध है। यह कोई आम पर्व नहीं है यह विश्व का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला पर्व है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा 75 दिन तक मनाया जाता है। बस्तरवासी वगभग 600 साल से यह पर्व मनाते आ रहे हैं। बस्तर ही एकमात्र जगह है जहां दशहरे पर रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता। यह पर्व बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा हुआ है। बस्तर के आदिवासियों की अभूतपूर्व भागीदारी का ही प्रतिफल है कि बस्तर दशहरा की राष्ट्रीय पहचान स्थापित हुई। प्रतिवर्ष दशहरा पर्व के लिए परगनिया माझी अपने अपने परगनों से सामग्री जुटाने का प्रयत्न करते थे। सामग्री जुटाने का काम दो तीन महीने पहले से होने लगता था। इसके लिए प्रत्येक तहसील का तहसीलदार सर्वप्रथम बिसाहा पैसा बाँट देता था, जिससे गाँव-गाँव से बकरे सुअर भैंसे चावल दाल तेल नम
नवरात्रि विशेष: गंगरेल बांध के समीप स्थित है अंगारमोती माता का धाम

नवरात्रि विशेष: गंगरेल बांध के समीप स्थित है अंगारमोती माता का धाम

chhattisgarh, News, tourism, Videos
गंगरेल बांध जिसे आर. एल. बांध ( रविशंकर सागर बांध ) भी कहते है। सागर बांध भारत के छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित है। यह महानदी नदी के पार बनाया गया है छत्तीसगढ़ में यह सबसे लम्बा बांध है। यह बांध वर्षभर के सिचाई प्रदान करता है जिससे किसान प्रतिवर्ष दो फसलों का उत्पादन कर सकते है और भिलाई स्टील प्लांट और नई राजधानी रायपुर को भी पानी प्रदान करता है। प्लांट में 10 मेगावाट की हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर क्षमता है। यह रायपुर राजधानी से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सन् 1978 में जब गंगरेल बांध बनकर तैयार हुआ उस समय अनेक गाँव के साथ अनेक देवी-देवतओं के मंदिर भी जल में समां गए थे, जिनमें से एक माँ अंगारमोती का मंदिर भी था। इसके पश्चात विधि-विधान के साथ देवी की मूर्ति को पूर्व स्थान से हटाकर गंगरेल बांध के समीप स्थापित किया गया है। यहाँ विशाल वृक्ष के नीचे खुले चबूतरे पर उनकी प्राण-प्रति
नवरात्रि विशेष: देखे राजनांदगांव के बर्फानी धाम और पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

नवरात्रि विशेष: देखे राजनांदगांव के बर्फानी धाम और पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

chhattisgarh, News, tourism, Videos
बर्फानी धाम छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव शहर में एक विशाल हिन्दू मंदिर है। यह दुर्ग से 40 किलोमीटर (25 मिनट) दूर है। एक बड़ा शिव लिंग मंदिर के शीर्ष पर देखा जा सकता है, जबकि एक बड़ी नंदी की प्रतिमा सामने खड़ी है। मंदिर का निर्माण तीन स्तरों में किया गया है। सबसे नीचे माँ पाताल भैरवी का मंदिर है। दूसरा मंजिल में नवदुर्गा या त्रिपुरा सुंदरी माता का मंदिर है और सबसे ऊपर शिव जी का मंदिर है। वीडियो देखे https://youtu.be/jYFF0srjrvo बर्फानी धाम राजनांदगाव कैसे पहुंचे सड़क मार्ग से: पाताल भैरवी देवी मंदिर राजनंदगांव में आशा नगर के पास स्थित है। यह राजनांदगांव बस स्टेशन से सिर्फ 5 किमी दूर स्थित है। यह लोकप्रिय रूप से बरफ़ानी धाम या पाताल भैरवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। ट्रेन से: सीधे लोकल या पैसेंजर ट्रेने रायपुर से उपलब्ध हैं। राजनांदगांव रायपुर से 89 किमी (1:30 घंटे) दू
नवरात्रि विशेष: बस्तर की तरह मौली माता मंदिर, फिंगेश्वर में भी होता है शाही दशहरा

नवरात्रि विशेष: बस्तर की तरह मौली माता मंदिर, फिंगेश्वर में भी होता है शाही दशहरा

chhattisgarh, News, tourism
बस्तर दशहरे की तरह फिंगेश्वर का शाही दशहरे की अपनी अलग पहचान है। यह दशहरा भी मौली माता की पूजा अर्चना के बाद यहाँ के शाही राजा इस त्यौहार की शुरुआत करते है। जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। मौली माता का ऐतिहासिक मंदिर गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखंड में स्थित है। राजधानी रायपुर से फिंगेश्वर लगभग 60 KM दूर है। पौराणिक मान्यता पौराणिक मान्यता व पुजारी सोभा राम भंडारी के अनुसार फिंगेश्वर के राजा ठाकुर दलगंजन सिंह यात्रा में जा रहे थे तभी अचानक हमलावरों ने आक्रमण कर दिया वाही मौली माता एक बुढ़िया के रूप में आयी वहां राजा ठाकुर दलगंजन सिंह हमलावरों से घिर गए थे तब उन्हें अचानक माता जी का साक्षात्कार हुआ। माता जी की कुछ इशारा पाते ही वह उठ खड़े हुए और युद्ध में विजयी हुए। तब राजा ने माता के पास जाकर प्रणाम कर वापिस महल की ओर आने लगे माता भी वृद्धा का रूप लेकर राजा के पीछे पीछे
रायपुर : मुख्यमंत्री ने जंगल सफारी में किया नंदनवन जू (चिड़ियाघर) का लोकार्पण

रायपुर : मुख्यमंत्री ने जंगल सफारी में किया नंदनवन जू (चिड़ियाघर) का लोकार्पण

chhattisgarh, News, tourism
रायपुर | मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान आज नवा रायपुर अटल नगर स्थित नंदनवन जंगल सफारी में चिड़ियाघर (जू) का लोकार्पण किया। आज उद्घाटित जंगल सफारी चिड़ियाघर में वन्य प्राणियों के लिए कुल 37 बाड़े होंगे। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस चिड़ियाघर में अभी 11 बाड़े बनाए गए हैं। चिड़ियाघर में प्राकृतिक परिवेश में दो व्हाइट टाइगर, 4 लायन, 2 रायल बंगाल टाइगर, 2 लेपर्ड, 2 हिमालयन बियर, 2 हिप्पोपोटेमस, 2 घड़ियाल, 20 ताजे पानी में पाए जाने वाले कछुए, 4 बेंगाल मॉनिटर लिजार्ड, 13 स्टार कछुए, 8 क्रोकोडायल अलग-अलग बाड़े में रखे गए हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार वन्य प्राणियों और वनों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए दृढ़ संकल्पित है। वन विभाग द्वारा विकसित जंगल सफारी और चिड़ियाघर देश में अनूठा है । भविष्य में यहां और भी नए वन्य प्
नवरात्रि विशेष : आज पढ़िए श्री महामाया मंदिर, रतनपुर के बारे में

नवरात्रि विशेष : आज पढ़िए श्री महामाया मंदिर, रतनपुर के बारे में

chhattisgarh, News, tourism, Videos
भारत के दक्षिण पूर्व में स्थित करोड़ों लोगों की श्रद्धा एवं आस्था के प्रतीक, वास्तुकला की मिसाल तथा हमारी संस्कृति की पहचान "श्री महामाया मंदिर, रतनपुर" आपका स्वागत करता है। कई दशकों से इस मंदिर ने अनेक इतिहासकारों तथा पुरातत्त्वविदों को अपनी ओर आकर्षित किया है। चारों ओर से हरी हरी पहाड़ियों से घिरी, लगभग 150 तालों को अपनी गोद में समेटे रतनपुर नगरी में वर्ष में 2 बार भक्तों का तांता लगता है। भक्तगण लाखों की संख्या में नवरात्र के पर्व पर अपनी आराध्य देवी महामाया की प्रतिमा-द्वय के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ते हैं। बिलासपुर-अंबिकापुर राजमार्ग (छत्तीसगढ़) में बिलासपुर से 25 किलोमीटर पर ऐतिहासिक रत्नपुर (अब रतनपुर) की नगरी में स्थित दर्जनों छोटे मंदिर, स्तूप, किले तथा अन्य निर्माणों के पुरावशेष मानों अपनी कहानी बताने के लिये तत्पर हैं। महामाया मंदिर का इतिहास रतनपुर का इतिहास लगभग एक सहस्