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रायपुर : मुख्यमंत्री श्री बघेल देश में किसानों के नए रोल मॉडल, तमिलनाडु के किसानों की मुलाकात

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री बघेल देश में किसानों के नए रोल मॉडल, तमिलनाडु के किसानों की मुलाकात

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रायपुर. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में तमिलनाडु के तंजावूर, तिवारूर और नागपट्टनम जिले से आए किसानों ने सौजन्य मुलाकात की और शाल तथा नारियल का पौधा भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। किसानों ने मुख्यमंत्री से कहा कि धान का 2500 रूपए प्रति क्विंटल कीमत देकर देशभर में किसानों के नए रोल मॉडल के रूप में उभर रहे है। धान से इथेनाल बनाने के लिए प्लांट लगने से उनकी कीर्ती देश-दुनिया में फैलेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था हो मजबूती देने के लिए सुराजी गांव योजना के तहत नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी कार्यक्रम की प्रसंशा की और पारम्परिक खेती-किसानी के संबंध में किसानों का बड़ा सम्मेलन आयोजित कराने का भी आग्रह किया, जिससे देशभर के किसान अपने अनुभव साझा कर सके। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान किसानों ने कहा कि देशभर में आप पहले मुख्यमंत्री है, ज
27, 28, एवं 29 दिसम्बर को देशभर के आदिवासी नृत्यों की रहेगी धूम, राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2019 की तैयारियां जोरो से शुरू

27, 28, एवं 29 दिसम्बर को देशभर के आदिवासी नृत्यों की रहेगी धूम, राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2019 की तैयारियां जोरो से शुरू

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई है। इस महोत्सव की विकासखण्ड और जिला स्तर पर प्रतियोगिताएं प्रारंभ हो गई है। फायनल प्रतियोगिताएं 27,28, एवं 29 दिसम्बर को राजधानी रायपुर में आयोजित होंगी। इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ सहित देश भर के परंपरागत आदिवासी नृत्य शामिल होंगे। महोत्सव की तैयारियों के संबंध में मुख्य सचिव श्री आर.पी. मण्डल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में अंतर्विभागीय समिति की बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के सफल आयोजन के लिए विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई। महोत्सव की तैयारी के तहत देश के अन्य राज्यों से आने वाले कलाकारों के ठहराने, उन्हें लाने-ले जाने तथा भोजन सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं और महोत्सव के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए संबंधित व
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की घोषणा छत्तीसगढ़ में बनेगा राम वनपथ गमन सर्किट, राज्य सरकार 51 स्थानों को करेगी विकसित

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की घोषणा छत्तीसगढ़ में बनेगा राम वनपथ गमन सर्किट, राज्य सरकार 51 स्थानों को करेगी विकसित

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में भगवान राम के वनवास काल के दौरान बिताए गए समय और उनके रहने के स्थानों को पर्यटन सर्किट के ताैर पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए राम वनपथ गमन सर्किट बनेगा, जिसके तहत राज्य सरकार प्रदेश के 51 स्थानों को विकसित करेगी। विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई। इसके साथ ही बैठक में अनुपूरक बजट के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने यह भी तय किया है कि 25 नवंबर को सत्र की शुरुआत वाले दिन अनुपूरक बजट लाएगी। छत्तीसगढ़ अस्मिता प्रतिष्ठान के शोध के आधार पर तय किया गया है सर्किट मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि छत्तीसगढ़ में जिन स्थानों से भगवान राम गुजरे हैं उसे पर्यटन सर्किट के तौर पर विकसित किया जाएगा। पहले चरण के लिए 8 स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है। इसका शुभारंभ रायपुर के
खिल उठेगा प्रभु श्री राम जी का ननिहाल, कौशल्या मंदिर को सुसज्जित करने विधायक द्वय ने मुख्यमंत्री को सौंपा 1.10-1.10 लाख रूपए का चेक

खिल उठेगा प्रभु श्री राम जी का ननिहाल, कौशल्या मंदिर को सुसज्जित करने विधायक द्वय ने मुख्यमंत्री को सौंपा 1.10-1.10 लाख रूपए का चेक

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को आज उनके निवास कार्यालय में आयोजित जनचौपाल भेंट मुलाकात कार्यक्रम में रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री विकास उपाध्याय और भिलाई के विधायक तथा महापौर श्री देवेन्द्र यादव ने चंदखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर को बेहतर ढ़ंग से व्यवस्थित करने और निर्माण कार्य के लिए 1.10-1.10 लाख रूपए का चेक सौंपा। इस अवसर पर वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर और रायपुर उत्तर के विधायक श्री कुलदीप जुनेजा भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर से करीब 27 किमी दूरी पर आरंग विकासखंड के ग्राम चंद्रखुरी में माता कौशल्या का मंदिर है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की माता कौशल्या का यह मंदिर पूरे भारत में एक मात्र होने के कारण प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है। यह क्षेत्र रामवनगमन पथ में होने के कारण उनके यहां वनवास काल में आने की जनश्रुति मिलती है।
छत्तीसगढ़: अब 3 नहीं 5 दिन का होगा राज्योत्सव, राज्यपाल के कहने पर सीएम भूपेश बघेल ने की घोषणा

छत्तीसगढ़: अब 3 नहीं 5 दिन का होगा राज्योत्सव, राज्यपाल के कहने पर सीएम भूपेश बघेल ने की घोषणा

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रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर चल रहा राज्योत्सव अब तीन की बजाय पांच दिन का होगा। शनिवार को राज्योत्सव में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंची राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा कि दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाले व्यापार मेले की तर्ज पर राज्योत्सव का आयोजन किया गया है। यहां काफी भव्य और आकर्षक पंडाल लगे हैं, इसलिए तीन दिन का समय काफी कम है। आप सभी को बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि आदरणीया राज्यपाल महोदया जी की भावना के अनुरूप राज्योत्सव का कार्यक्रम 2 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है। आप सभी सपरिवार पहुंचें और आपके अपने राज्योत्सव का आनंद लें।#CGRajyotsav2019 — Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) November 2, 2019 pic.twitter.com/LyNTisVWAL — Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) November 2, 2019 इसके बाद सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि राज्यपाल का कथन आदेश होता है। इ
छत्तीसगढ़: जशपुर में 100 एकड़ में चाय-कॉफी, कोंडागांव में मक्का व गरियाबंद में 32 करोड़ में लगाएंगे कोदो प्रोसेसिंग सेंटर

छत्तीसगढ़: जशपुर में 100 एकड़ में चाय-कॉफी, कोंडागांव में मक्का व गरियाबंद में 32 करोड़ में लगाएंगे कोदो प्रोसेसिंग सेंटर

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रायपुर (एजेंसी) | पहली बार राज्य के आदिवासी क्षेत्रों की विशेषता को ध्यान में रखकर सरकार ने 2474 करोड़ का प्लान तैयार किया है। इसके अंतर्गत जशपुर में 100 एकड़ में चाय-कॉफी प्रोसेसिंग सेंटर, कोंडागांव में मक्का और सूरजपुर व गरियाबंद में 32 करोड़ खर्च कर कोटो-कुटकी प्रोसेसिंग सेंटर लगाए जाएंगे। मुख्य सचिव सुनील कुजूर की अध्यक्षता में अनुसूचित जनजाति उपयोजना समिति की बैठक में इसका खाका तैयार कर लिया गया है। इसे केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय को भेजा जाएगा। राज्य के उत्तरी व दक्षिणी हिस्से की जलवायु विविधता के साथ-साथ कई खास किस्म के उत्पादों के लिए भी बेहतर है। जैसे जशपुर में चाय की खेती की जा रही है। जशपुर और बस्तर में काजू का उत्पादन होता है। इसे ध्यान में रखकर इन क्षेत्रों के विकास के लिए प्लान तैयार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इन क्षेत्रों में प्रोसेसिंग सेंटर के साथ-साथ ब
रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे, 23 अक्टूबर को ‘जनचौपाल: भेंट-मुलाकात‘ कार्यक्रम स्थगित

रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे, 23 अक्टूबर को ‘जनचौपाल: भेंट-मुलाकात‘ कार्यक्रम स्थगित

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री 22 अक्टूबर को सुबह 10 बजे राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से विशेष विमान द्वारा झारखण्ड के बोकारो के लिए रवाना होंगे। श्री बघेल वहां से जामताड़ा जिला मुख्यालय पहुंचकर वहां आयोजित आमसभा में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री बोकारो से कानपुर (उत्तरप्रदेश) आएंगे और यहां अपरान्ह 3.30 बजे किदवई नगर में आयोजित अभिनंदन समारोह और शाम 5 बजे लाजपत भवन लॉन मोतीझील में आयोजित ‘शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी जयंती समारोह’ तथा अन्य स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री कानपुर से कार द्वारा लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचकर विशेष विमान द्वारा रात्रि 10 बजे नई दिल्ली पहुंचेंगे और छत्तीसगढ़ सदन में रात्रि विश्राम करेंगे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित निवास
विजयादशमी विशेष: 600 वर्ष पुराना और 75 दिनों तक मनाया जाता है बस्तर दशहरा, विश्व का सबसे लम्बा चलने वाला पर्व है

विजयादशमी विशेष: 600 वर्ष पुराना और 75 दिनों तक मनाया जाता है बस्तर दशहरा, विश्व का सबसे लम्बा चलने वाला पर्व है

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बस्तर का दशहरा अपनी अभूतपूर्व परंपरा व संस्कृति की वजह से विश्व प्रसिद्ध है। यह कोई आम पर्व नहीं है यह विश्व का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला पर्व है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा 75 दिन तक मनाया जाता है। बस्तरवासी वगभग 600 साल से यह पर्व मनाते आ रहे हैं। बस्तर ही एकमात्र जगह है जहां दशहरे पर रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता। यह पर्व बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा हुआ है। बस्तर के आदिवासियों की अभूतपूर्व भागीदारी का ही प्रतिफल है कि बस्तर दशहरा की राष्ट्रीय पहचान स्थापित हुई। प्रतिवर्ष दशहरा पर्व के लिए परगनिया माझी अपने अपने परगनों से सामग्री जुटाने का प्रयत्न करते थे। सामग्री जुटाने का काम दो तीन महीने पहले से होने लगता था। इसके लिए प्रत्येक तहसील का तहसीलदार सर्वप्रथम बिसाहा पैसा बाँट देता था, जिससे गाँव-गाँव से बकरे सुअर भैंसे चावल दाल तेल नम
नवरात्रि विशेष: गंगरेल बांध के समीप स्थित है अंगारमोती माता का धाम

नवरात्रि विशेष: गंगरेल बांध के समीप स्थित है अंगारमोती माता का धाम

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गंगरेल बांध जिसे आर. एल. बांध ( रविशंकर सागर बांध ) भी कहते है। सागर बांध भारत के छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित है। यह महानदी नदी के पार बनाया गया है छत्तीसगढ़ में यह सबसे लम्बा बांध है। यह बांध वर्षभर के सिचाई प्रदान करता है जिससे किसान प्रतिवर्ष दो फसलों का उत्पादन कर सकते है और भिलाई स्टील प्लांट और नई राजधानी रायपुर को भी पानी प्रदान करता है। प्लांट में 10 मेगावाट की हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर क्षमता है। यह रायपुर राजधानी से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सन् 1978 में जब गंगरेल बांध बनकर तैयार हुआ उस समय अनेक गाँव के साथ अनेक देवी-देवतओं के मंदिर भी जल में समां गए थे, जिनमें से एक माँ अंगारमोती का मंदिर भी था। इसके पश्चात विधि-विधान के साथ देवी की मूर्ति को पूर्व स्थान से हटाकर गंगरेल बांध के समीप स्थापित किया गया है। यहाँ विशाल वृक्ष के नीचे खुले चबूतरे पर उनकी प्राण-प्रति
नवरात्रि विशेष: देखे राजनांदगांव के बर्फानी धाम और पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

नवरात्रि विशेष: देखे राजनांदगांव के बर्फानी धाम और पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

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बर्फानी धाम छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव शहर में एक विशाल हिन्दू मंदिर है। यह दुर्ग से 40 किलोमीटर (25 मिनट) दूर है। एक बड़ा शिव लिंग मंदिर के शीर्ष पर देखा जा सकता है, जबकि एक बड़ी नंदी की प्रतिमा सामने खड़ी है। मंदिर का निर्माण तीन स्तरों में किया गया है। सबसे नीचे माँ पाताल भैरवी का मंदिर है। दूसरा मंजिल में नवदुर्गा या त्रिपुरा सुंदरी माता का मंदिर है और सबसे ऊपर शिव जी का मंदिर है। वीडियो देखे https://youtu.be/jYFF0srjrvo बर्फानी धाम राजनांदगाव कैसे पहुंचे सड़क मार्ग से: पाताल भैरवी देवी मंदिर राजनंदगांव में आशा नगर के पास स्थित है। यह राजनांदगांव बस स्टेशन से सिर्फ 5 किमी दूर स्थित है। यह लोकप्रिय रूप से बरफ़ानी धाम या पाताल भैरवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। ट्रेन से: सीधे लोकल या पैसेंजर ट्रेने रायपुर से उपलब्ध हैं। राजनांदगांव रायपुर से 89 किमी (1:30 घंटे) दू