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सीजी पीएससी घोटाला: राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने किया तलब

सीजी पीएससी घोटाला: राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने किया तलब

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रायपुर (एजेंसी) | पीएससी चयन में गड़बड़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारियों को तलब किया है। कोर्ट की ओर से जारी नोटिस में इन अधिकारियों को 30 दिन का समय दिया गया है। यह अंतिम नोटिस है। इस दौरान इन अधिकारियों को स्वयं उपस्थित होना होगा या फिर वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखना होगा। ऐसा नहीं करने पर माना जाएगा कि वे अपना पक्ष नहीं रखना चाहते हैं और कोर्ट इसी आधार पर मामले की सुनवाई करेगा। अंतिम बार भेजा गया नोटिस, कई अधिकारी अब मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में भी नियुक्त दरअसल, वर्ष 2003 में छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग की ओर से जारी किए गए परिणामों में चयनित 147 अभ्यर्थियों के चयन को लेकर चुनाती दी गई थी। इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी अभ्यर्थियों को नोटिस जारी किया था। इनमें से 138 अभ्यर्थियों ने तो नोटिस का जवाब दिया,
सुप्रीम कोर्ट ने कमल विहार प्रोजेक्ट पर लगाई रोक, केंद्र से नहीं ली थी पर्यावरण अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने कमल विहार प्रोजेक्ट पर लगाई रोक, केंद्र से नहीं ली थी पर्यावरण अनुमति

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रायपुर (एजेंसी) | पूर्व भाजपा सरकार की महत्वाकांक्षी कमल विहार आवासीय प्रोजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस प्रोजेक्ट को देश की सर्वोच्च अदालत ने यह कहते हुए रोक लगा दिया क्योकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से इंवायरमेंटल क्लियरेंस नहीं ली गई थी। इसे लेकर 2009 में चार लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। शुक्रवार को सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई के बाद रोक लगा दी इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहिंगटन फली नरी मन और जस्टिस विनीत सरन की बेंच ने शुक्रवार को राजेंद्र शंकर शुक्ला वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया मामले की सुनवाई करते हुए योजना पर रोक लगाने का फैसला दिया। बता दें कि इससे पहले भी 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की जमीन को योजना से बाहर रखने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता शुक्ला का कहना है कि आज तक उन्हें न तो जमीन मिली, न ही शासन की तरफ से कोई लैंड डिमार्क
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सिकरी हुए रिटायर; कहा, “हर जज में नारीत्व का अंश होना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सिकरी हुए रिटायर; कहा, “हर जज में नारीत्व का अंश होना चाहिए।”

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नई दिल्ली (एजेंसी) | सुप्रीम काेर्ट के जज जस्टिस एके सिकरी बुधवार काे रिटायर हाे गए। सुप्रीम काेर्ट बार एसाेसिएशन के विदाई समाराेह में जस्टिस सिकरी ने कहा कि पूर्ण न्याय करने के लिए हरेक जज में नारीत्व के कुछ अंश होने चाहिए। भावुक हुए जस्टिस सिकरी ने अपने करियर में मिली मदद के लिए न्यायपालिका और वकीलों का धन्यवाद किया। इससे पहले काम के आखिरी दिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसए बोबडे के साथ बेंच में बैठने के दौरान भी उनकी आंखें नम हो गई थीं। "न्याय की देवी के आंख पर पट्टी बंधी है लेकिन उसका दिल बंद नहीं है" : जस्टिस एके सिकरी विदाई समाराेह में जस्टिस सिकरी ने कहा, “प्रकृति से मेरा कुछ अंश नारी सा है। इस लिंग में जिस तरह के गुण होते हैं अगर उसपर जाएं तो मेरे विचार में पूर्ण न्याय करने के लिए प्रत्येक जज में नारीत्व के कुछ अंश होने चाहिए।’ उन्होंने कहा कि न्याय की प्रतीक एक देवी हैं
सुप्रीम कोर्ट ने 11.8 लाख आदिवासियों को दी राहत, जंगल से वनवासियों की बेदखली पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने 11.8 लाख आदिवासियों को दी राहत, जंगल से वनवासियों की बेदखली पर रोक

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जगदलपुर (एजेंसी) | सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासियों और वनवासियों को भारी राहत देते हुए उन्हें फिलहाल बेदखल नहीं करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दिया है। उन्होंने मामले का उल्लेख करते हुए 11.8 लाख आदिवासियों को जंगलों से हटाने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस अरुण मिश्रा ने गुरूवार को मामले की सुनवाई करते हुुए सभी 16 राज्यों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सभी राज्य हलफनामा दायर कर बताएं कि उन्होंने जंगल में रह रहे लोगों के दावों का इतनी जल्दी निपटारा किस आधार पर किया है? वह अब तक सोते क्यों रहे? सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को 16 राज्यों के करीब 11.8 लाख आदिवासियों व वनवासियों के जमीन पर कब्जे के दावों को खारिज करते हुए राज्य सरकारों को आदेश दिया था कि वे अपने कानूनों के मुताबिक जमीनें खाली कराएं। कोर्ट ने यह भी आदेश जारी किया था कि सभी राज्यों
वनभूमि मामला: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बस्तर में 1.63 लाख आदिवासी परिवारों पर होगा असर

वनभूमि मामला: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बस्तर में 1.63 लाख आदिवासी परिवारों पर होगा असर

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जगदलपुर (एजेंसी) | वनभूमि से आदिवासियों को बेदखल करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अकेले बस्तर में ही दो लाख से ज्यादा आदिवासी परिवार प्रभावित हो रहे है। इनमें एक लाख 63 हजार से ज्यादा आदिवासी परिवार अभी वन भूमि पर काबिज है तो वहीं 60 हजार से ज्यादा परिवारों के आवेदन लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आदिवासियों में मायूसी है। अखिल भारतीय आदिवासी महासभा ने कहा कि जल, जंगल, जमीन पर असली हक आदिवासियों का है और उनके जंगल में उन्हें ही जमीन नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारों से मांग की जा रही है कि 24 जुलाई को होने वाली सुनवाई में सरकारें पुनर्विचार याचिका लगाए। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 राज्यों के आदिवासियों को दिए गए वनभूमि के पट्टे को निरस्त कर बेदखली की कार्रवाई का आदेश दिया है। इस मामले में 24 जुलाई 2019 को फिर से सुनवाई होनी है।
क्या है सबरीमाला विवाद? पढ़िए भगवान अयप्पा के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते है

क्या है सबरीमाला विवाद? पढ़िए भगवान अयप्पा के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते है

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सबरीमाला मंदिर महिला प्रवेश को लेकर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने महिला प्रवेश पर प्रतिबंध को हटाए जाने का फैसला सुनाया तब से कई हिंदूवादी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं आइए समझते हैं यह विवाद क्या है? क्यों इसका विरोध हो रहा है? भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है विश्‍व प्रसिद्ध सबरीमाला का मंदिर। यहां हर दिन लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। करीब 800 साल पुराने इस मंदिर में ये मान्यता पिछले काफी समय से चल रही थी कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश ना करने दिया जाए। कौन है भगवान अयप्पा भगवान अयप्पा विष्णु और शिव के पुत्र हैं. यह किस्सा उनके अंदर की शक्तियों के मिलन को दिखाता है न कि दोनों के शारीरिक मिलन को। इनसे सस्तव नामक पुत्र का जन्म का हुआ जिन्हें दक्षिण भारत
सुप्रीम कोर्ट: महिलाओ को मिला सबरीमाला में प्रवेश करने का अधिकार, 800 साल पुराणी प्रथा समाप्त

सुप्रीम कोर्ट: महिलाओ को मिला सबरीमाला में प्रवेश करने का अधिकार, 800 साल पुराणी प्रथा समाप्त

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नई दिल्ली (एजेंसी) | सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओ के प्रवेश को लेकर ऐतिहासिक फैसला देते हुए मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने की इजाजत दे दी। इससे पहले यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। यह प्रथा 800 साल से चली आ रही थी। एक याचिका में इस नियम को चुनौती दी गई थी। केरल सरकार भी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में थी। सबरीमाला मंदिर का संचालन करने वाला त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड अब कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी में है। महिलाएं पुरुषों से कमतर नहीं -सुप्रीम कोर्ट  चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने शुक्रवार को सुनाए फैसले में कहा, "सभी अनुयायियों को पूजा करने का अधिकार है। लैंगिक आधार पर श्रद्धालुओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता। महिलाएं पुरुषों से कमतर नहीं हैं। एक तरफ आप महिलाओ
सुप्रीम कोर्ट: आधार पर बड़ा फैसला; जानिए आधार कहां जरूरी, कहां नहीं

सुप्रीम कोर्ट: आधार पर बड़ा फैसला; जानिए आधार कहां जरूरी, कहां नहीं

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नई दिल्ली (एजेंसी) | सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अाधार की अनिवार्यता पर अहम् फैसला दिया। देश की शीर्ष अदालत ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा और कहा- ‘सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए आधार अनिवार्य रहेगा।' साथ ही यह भी कहा कि, स्कूलों में एडमिशन और बैंक खाता खोलने के लिए यह जरूरी नहीं है। जानिए आधार की अनिवार्यता के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा। आधार कहां जरूरी, कहां नहीं  आधार को सवैधानिक रूप से वैध करने के साथ ही इस पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश जारी किये है: आधार जरुरी है सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पैन कार्ड को लिंक करने और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए। आधार जरुरी नहीं है  शिक्षा ही हमें अंगूठे के निशान से दस्तखत की ओर ले गई। अब टेक्नोलॉजी हमें दस्तखत से दोबारा अंगूठे के निशान पर ले जा रही है, इसलिए स्कूलों में एडमिशन के लिए आधार को जरूरी नह
सुप्रीम कोर्ट: दहेज़ उत्पीड़न मामले में अब पति और ससुराल वालो की होगी तुरंत गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट: दहेज़ उत्पीड़न मामले में अब पति और ससुराल वालो की होगी तुरंत गिरफ्तारी

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नई दिल्ली (एजेंसी) | सुप्रीम कोर्ट ने दहेज़ उत्पीड़न मामले में जाँच के लिए बनायीं गई परिवार कल्याण समिति बनाने के आदेश में बदलाव किया है। अब दहेज़ उत्पीड़न संबंधी मामलो में पति और ससुराल पक्ष वालो की तुरंत गिरफ्तारी होगी। कोर्ट ने कहा कि दहेज़ पीड़िता की सुरक्षा के लिए ये बहुत जरुरी है। कोर्ट इस तरह की क़ानूनी खामिया नहीं भर सकता। चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच ने शुक्रवार को एक साल पहले किये गए फैसले में बड़ा बदलाव किया। इससे पहले पिछले साल जुलाई में आदेश जारी कर दहेज़ के मामलो में परिवार कल्याण समिति को जाँच सौप दी थी। इनकी रिपोर्ट के पहले पति और रिश्तेदारो की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गयी थी। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
SC-ST दूसरे राज्यों की नौकरी में नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ : सुप्रीम कोर्ट

SC-ST दूसरे राज्यों की नौकरी में नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ : सुप्रीम कोर्ट

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दिल्ली (एजेंसी)। एससी-एसटी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्‍पणी की है। दिल्‍ली और केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट की पांच संदस्‍यीय संवैधानिक पीठ का कहना था कि आरक्षण में एक समान व्‍यवस्‍था का होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, एससी-एसटी आरक्षण के तहत सेवा या नौकरी में लाभ पाने वाला व्यक्ति किसी दूसरे राज्य में उसका फायदा नहीं ले सकता है। जबतक कि वहां उसकी जाति सूचीबद्ध न हो। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिये आरक्षण का लाभ एक राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश की सीमा तक ही सीमित रहेगा। एक राज्य के अनुसूचित जाति या अनुसूचति जनजाति समूह के सदस्य दूसरे राज्य के सरकारी नौकरी में आरक्षण के लाभ का तब तक दावा नहीं कर सकते जब तक उनकी जाति वहां सूचीबद्ध नहीं हो। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट