chhattisgarh news media & rojgar logo

Tag: person

व्यक्ति विशेष: हीरारतन थवाईत, जिन्होंने अकेले ही नदी तट पर 7 एकड़ बंजर जमीन को 5 सौ पौधे रोप कर बना दिया हराभरा

व्यक्ति विशेष: हीरारतन थवाईत, जिन्होंने अकेले ही नदी तट पर 7 एकड़ बंजर जमीन को 5 सौ पौधे रोप कर बना दिया हराभरा

special
कसडोल (एजेंसी) | मैं दुनिया बदल सकता हूं मुहावरे को ग्राम कटगी में एक गरीब किसान ने चरितार्थ कर दिया है। उन्होंने गांव में हरियाली ही हरियाली ला दी है। उन्होंने नदी तक के डुबान क्षेत्र में बंजर पड़ी 7 एकड़ जमीन पर लगाए हैं 5 सौ पौधे, जिसमें 20 दिन से 20 साल उम्र के पेड़ शामिल हैं। पर्यावरण तो शुद्ध हुआ ही है। इस एरिया को देखने में मन बाग-बाग हो जाता है। उस व्यक्ति की जितनी प्रंशसा की जाए कम है। कसडोल से गिधौरी मुख्य मार्ग में 12 किमी दूरी पर जोक नदीं के तट पर बसा ग्राम कटगी है, जिसकी आबादी लगभग 4 हजार है। इसी गांव गरीब किसान 64 साल के हीरारतन थवाईत 20-25 सालों से लगातार पौधरोपण कर रहे हैं। उन्होंने जोक नदी एवं कटगी बस्ती के बीच बाढ़ आने पर डुबान क्षेत्र नदी किनारे पौधरोपण कर हरियाली ला दी है, जिसे देखकर मन आनंदित हो उठता है। 25 सालों में 500 पौधे रोपे शुरुआत में कुछ बबूल के बीज छिड़क
कौन है स्मिता तांडी जिन्हे नवरात्री पर सीएम ने ट्वीट कर कहा, “महतारी तोला प्रणाम”

कौन है स्मिता तांडी जिन्हे नवरात्री पर सीएम ने ट्वीट कर कहा, “महतारी तोला प्रणाम”

special
नवरात्री के पवित्र नौ दिन चल रहे है। पुरे देश में नारी शक्ति रूपी दुर्गा माँ की आराधना की जा रही है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने #महतारी_तोला_प्रमाण का ट्वीट किया। नारी शक्ति के प्रतीक स्वरुप राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्मिता तांडी का फोटो शेयर करते हुए कहा, "यदि निस्वार्थ सेवा का भाव हो तो हर राह स्वयं ही सहज हो जाती है। इस बात का साक्षात उदाहरण है प्रदेश की रोल-मॉडल बन चुकी महिला कांस्टेबल स्मिता तांडी। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मैं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्मिता तांडी की नेक भावना को प्रणाम करता हूँ। #महतारी_तोला_प्रणाम" यदि निस्वार्थ सेवा का भाव हो तो हर राह स्वयं ही सहज हो जाती है। इस बात का साक्षात उदाहरण है प्रदेश की रोल-मॉडल बन चुकी महिला कांस्टेबल स्मिता तांडी। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मैं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्मिता तांडी की नेक भावना क
#Birthday मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी बधाई, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ऐसे बैठे की हिलाना मुश्किल हो गया

#Birthday मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी बधाई, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ऐसे बैठे की हिलाना मुश्किल हो गया

chhattisgarh
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह आज (15 अक्टूबर, सोमवार) अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 15 अक्टूबर 1952 को जन्मे मुख्यमंत्री आज 66 वर्ष के हो गए है। जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और कई अन्य नेताओ ने उन्हें बधाई दी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भी डॉ. सिंह को जन्मदिन की बधाई दी। गोंडवाना एक्सप्रेस परिवार डॉ. रमन सिंह को उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई देता है। Birthday wishes to @drramansingh Ji. Under his exemplary leadership for the last 15 years, Chhattisgarh has witnessed notable transformations in several sectors. His policies have benefitted the state’s youth tremendously. I pray for Raman Singh ji’s good health and long life. — Narendra Modi (@narendramodi) October 15, 2018 मुख्यमंत्री @drramansingh जी, आपको जन्
एपीजे अब्दुल कलाम जन्मदिन विशेष: सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते, पढ़िए डॉ. कलाम की बाते जो आपको प्रेरणा देगी

एपीजे अब्दुल कलाम जन्मदिन विशेष: सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते, पढ़िए डॉ. कलाम की बाते जो आपको प्रेरणा देगी

special
भारत देश के 11वें राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम का आज (15 अक्टूबर) को जन्मदिन है। डॉ. कलाम वर्ष 2002 में भारत के 11वें राष्ट्रपति चुने गए थे। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को हुआ और 27 जुलाई साल 2015 को डॉ.कलाम ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। डॉ.कलाम के कहे हुए बोल आज भी प्रेरणादायी हैं। एक मछुआरे के बेटे का दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का राष्ट्रपति बन जाना यूं ही नहीं हुआ। वे जीवन के कड़े संघर्ष और अपनी सकारात्मक को लिए आगे बढ़ते रहे और लोगों को भी इसी सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के प्रेरणा देते है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); डॉ कलाम हमेशा अपने सपनों पर विश्वास करने की बात कहते थे। उन्हें अपने सपनों पर भरोसा था शायद इसीलिए जीवन में विपरीत परिस्थितियों के होते हुए भी वह उस शिखर तक पहुंचे, जहां तक पहुंचने वाले दुनिया में कम ही शख्स होते हैं।  पढ़
राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – III

राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – III

special
आजादी के समय भारत में लगभग 565 रियासत थीं, जिनके शासक नवाब या राजा कहलाते थे। आजाद भारत की कई प्रमुख समस्याओं में एक समस्या इन रियासतों के विलय की भी थी। ऐसे कई राजा या नवाब थे जो आजादी और विलय को देशहित में मानते थे। इसीलिए कुछ रियासतों को छोड़ कर अधिकांश रियासतों ने स्वेच्छा से भारत के संघीय ढांचे का हिस्सा बनना स्वीकार कर लिया। 15 दिसंबर 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने मध्यप्रांत की राजधानी नागपुर में छत्तीसगढ़ की सभी 14 रियासतों के शासको को भारत संघ में शामिल होने का आग्रह किया। महाराजा प्रवीरचंद्र भंज देव ने आदिवासियों के विकास के लिए विलय को स्वीकृति प्रदान करते हुए स्टेटमेंट ऑफ़ सबसेशन पर हस्ताक्षर कर दिए। इस तरह 1 जनवरी 1948 में बस्तर के मध्यप्रांत में विलय होने की औपचारिक घोषणा हुई और 9 जनवरी 1948 में बस्तर मध्यप्रांत का हिस्सा बन गया। बस्तर और कांकेर की रियासतों को मिलकर बस्तर जिल
विख्यात पद्मश्री नेत्र सर्जन डॉ. गोविंदप्पा वेंकटस्वामी को Google ने डूडल बनाकर किया याद

विख्यात पद्मश्री नेत्र सर्जन डॉ. गोविंदप्पा वेंकटस्वामी को Google ने डूडल बनाकर किया याद

special
भारत के जाने-माने नेत्र सर्जन डॉ. गोविंदप्पा वेंकटस्वामी (Dr. Govindappa Venkataswamy) का आज 1 अक्टूबर को 100वां जन्मदिन है। इस अवसर पर दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल (Google) ने डूडल (Doodle) बनाकर उन्हें याद किया।वेंकटस्वामी का जन्म 1 अक्टूबर 1918 में हुआ था। इन्हें देश में अंधेपन से जूझ रहे लोगों की सेवा के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); वेंकटस्वामी की मृत्यु 87 साल की उम्र में 7 जुलाई 2006 को हुई। उन्होंने अपने जीवन में लाखों लोगों की जिंदगी में रोशनी बिखेरी।आंखों के इलाज को लेकर उन्होंने एक मिसाल पेश किया। उनकी बेहतरीन उपलब्धि की वजह से आज गूगल उन्हें सम्मान दे रहा है। गठिया होने के बावजूद ऑपरेशन जारी आंखों के इतने बड़े डॉक्टर भारतीय सेना के मेडिकल कोर में थे. तमिलनाडु में एक गरीब परिवार में जन्मे डॉ. गोविंदप्पा वेंकटस्वा
राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – II

राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – II

special
युवा प्रवीर चंद्र भंज देव की एक दुर्लभ तस्वीर  राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव ने आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष किया। वे आजाद भारत से बहुत उम्मीद रखने वाले रौशनख्याल राजा थे। उन्हें लगता था कि आजाद भारत में आदिवासियों का शोषण अंग्रेजों की तरह नहीं होगा। वे मानते थे कि आदिवासियों को उनकी जमीन पर बहाल करना अब आसान होगा। साथ ही आदिवासियों को भी विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर प्राप्त होगा। एक तरह से वे आजादी को बस्तर के पूर्ण विकास के लिए एक बेहतरीन अवसर के रूप में देखते थे। नए रंग और देश की आजादी व रियासतों के विलय से बस्तर नरेश और काकतीय वंश के अंतिम राजा प्रवीर चंद भंजदेव बहुत आशान्वित थे। प्रवीर के सामाजिक जीवन की पहली झलक मिलती है सन 1950  में जगदलपुर राजमहल परिसर में आयोजित मध्यप्रादेशिक हिंदी साहित्य सम्मलेन में, जिसमे उन्होंने आदिवासी समाज, उनकी शिक्षा और विकास को लेकर अपने वि
राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – I

राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – I

special
रियासत काल के प्रथम उड़िया और अंतिम काकतिया शासक प्रवीर चन्द्र भंजदेव आधुनिक बस्तर को दिशा प्रदान करने वाले पहले युगपुरुषों में से एक हैं। सन 1947 में भारत की आज़ादी के बाद मध्यप्रदेश के बस्तर क्षेत्र में (उस समय बस्तर मध्यप्रदेश का हिस्सा थी।) राजा प्रवीर चंद्र भंज देव के नेतृत्व में आदिवासी आंदोलन कांग्रेस के लिए चुनौती बनता जा रहा था। वे बस्तर के जनजातीय लोगों के अधिकारों के लिए लड़े। बाद में वे 1957 के आम चुनाव जीतकर अविभाजित मध्य प्रदेश विधान सभा के जगदलपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे अपने लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे, क्योंकि उन्होंने स्थानीय जनजातीय का मुद्दा उठाया और इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के शोषण के खिलाफ राजनीतिक नेतृत्व प्रदान किया। भूमि सुधारों में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाया और इस प्रकार वे तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस के लोगों द्वारा खतरा म
घोर नक्सल प्रभावित जिला सुकमा की ये बेटी अब बनेगी डॉक्टर

घोर नक्सल प्रभावित जिला सुकमा की ये बेटी अब बनेगी डॉक्टर

special
सुकमा (एजेंसी) | सुकमा जिले के दोरनापाल गांव एक ऐसा इलाका जो चारों ओर से नक्सलियों से घिरा है। इस इलाके में जहाँ एक ओर मूलभूत सुविधाएं नहीं है, वहाँ की बेटी माया कश्यप ने अभावो के बीच रहकर मेडिकल एंट्रेंस का एग्जाम क्लियर किया है। और अब वह एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगी। माया कश्यप ने अपने मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य पाने की इच्छा हो तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नही है। लेकिन सरकार ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए यहां के करीब 3 हजार बच्चों को हॉस्टलों में रखकर शिक्षा दे रही है. यहां का माहौल ऐसा रहा है कि कोई नौकरी करने वाला भी आने से कतराता है. वहां की बेटी माया कश्यप दोरनापाल की पहली डॉक्टर बनने जा रही है। उसको एमबीबीएस में दाखिला मिल चुका है, जो आने वाले कुछ वर्षों में अपनी पढ़ाई पूरी कर के डॉक्टर बन जाएगी। ये इसलिए भी बड़ी बात है क्योंकि जहां कभी खुद डॉक्टर भी आने से डरते