Shadow

Tag: festival

मकर सक्रांति 2020: सूर्य हुए उत्तरायण, धनु से मकर राशि में किया प्रवेश, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

मकर सक्रांति 2020: सूर्य हुए उत्तरायण, धनु से मकर राशि में किया प्रवेश, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

chhattisgarh, News, special
सूर्य को अन्न धन का दाता और समस्त ऊर्जा का आधार माना गया है। भारत में सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर रेखा की ओर जाने का स्वागत उमंग और उत्साह से किया जाता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में इसे मकर संक्रांति, पोंगल और लोहड़ी पर्व के नाम से मनाते है। मकर संक्रांति का यह त्यौहार ऋतु परिवर्तन का संदेश लेकर आता है। इस बार मकर सक्रांति की तिथि को लेकर संशय बना है। ज्योतिषियों के मुताबिक मकर सक्रांति इस बार 15 जनवरी को पड़ेगी। मकर सक्रांति का जितना धार्मिक महत्व है उतना ही वैज्ञानिक महत्व भी है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। माना जाता है क‍ि मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य देव अपने पुत्र शनि से नाराजगी छोड़कर उनके घर गए थे। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि भगीरथ के
ठेठरी, खुरमी और पिड़िया से महकी रसोई आज 24 घंटे निर्जला व्रत रहेंंगी तिजहारिनें

ठेठरी, खुरमी और पिड़िया से महकी रसोई आज 24 घंटे निर्जला व्रत रहेंंगी तिजहारिनें

chhattisgarh, News
रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ में बहनों और बेटियों के सम्मान का सबसे अहम लोकपर्व तीजा रविवार को मनाया जाएगा। इसकी शुरुआत शनिवार को करूभात से हो गई। रविवार को सुहागिनें व कुंवारी कन्याएं 24 घंटे से भी ज्यादा समय का सबसे कठिन निर्जला व्रत रखेंगी। रतजगा कर भगवान का भजन व नाच-गान करेंगी। मायके से भेंट में मिले नए वस्त्र व आभूषण धारण करेंगी। सोमवार को सुबह शिव-पार्वती व गणेश भगवान की पूजा के बाद व्रत का समापन होगा और दिनभर महिलाएं एक-दूसरे के घर जाकर छत्तीसगढ़ी पकवान खाएंगी। इस पौराणिक त्योहार में सभी सुहागिनें सोलह श्रृंगार करेंगी। तीज के ये हैं तेरह चलन 1. तीज का व्रत निर्जला किया जाता है। यानी पूरे दिन और रात अगले सूर्योदय तक कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता। 2. वृद्ध या बीमार महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से छूट दी जाती है। 3. तीज का व्रत कुंवारी कन्याएं और सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा किया ज
पोला तिहार: बैलो के श्रृँगार व गर्भ पूजन का पर्व है पोला, जानिए पूजन विधि, महत्व और पौराणिक कथा

पोला तिहार: बैलो के श्रृँगार व गर्भ पूजन का पर्व है पोला, जानिए पूजन विधि, महत्व और पौराणिक कथा

chhattisgarh, tourism
किसी भी राज्य की सार्थक पहचान उनकी संस्कृति से होती है। जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य भारत देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जो पूर्णतः कृषि कार्य प्रधान राज्य है। यहाँ के निवासी पूरे वर्ष भर खेती कार्य मे लगे रहते है। धान की खेती यहाँ की प्रमुख फसल है। यहाँ के निवासियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को कुछ इस तरह संजोकर रखा है, कि कृषि कार्यो के दौरान साल के विभिन्न अवसरो पर- खेती कार्य आरंभ होने के पहले अक्ती, फसल बोने के समय सवनाही, उगने के समय एतवारी-भोजली, फसल लहलहाने के समय हरियाली, आदि आदि अवसरो व ऋतु परिवर्तन के समय को धार्मिक आस्था प्रकट कर पर्व-उत्सव व त्योहार के रूप मे मनाते हुए जनमानस मे एकता का संदेश देते है। यहाँ के निवासी, पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं तथा प्रकृति को भी भगवान की ही तरह पूजा करते है। बैलो के श्रृँगार व गर्भ पूजन का पर्व-पोला पोला पर्व के अवसर पर तरह तरह के व्यंजन बनाए जात
धूमधाम से मनाया गया पोला तिहार, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाये, बैल दौड़ का आयोजन किया गया

धूमधाम से मनाया गया पोला तिहार, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाये, बैल दौड़ का आयोजन किया गया

chhattisgarh, News
रायपुर (एजेंसी) | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर निवास में आज पोरा-तीजा तिहार पर आज दिन भर उत्सव का माहौल बना रहा । सीएम निवास में मुख्यमंत्री ने पारंपरिक ढंग से सजे-धजे बैलों की पूजा की। महिलाओं ने कबड्डी और फुगड़ी खेली और जलेबी दौड़ में हिस्सा लिया। महिलाओं ने एक-दूसरे से मिल कर पोरा-तीजा की बधाईयां दी। लोकगायिका श्रीमती ममता चंद्राकर के दल की लोकगीतों की प्रस्तुति पर नृत्य भी किया। मुख्यमंत्री निवास में रईचुली झूले की भी व्यवस्था विशेष रुप से की गयी थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बेटी के साथ झूले का आनंद लिया। खेती किसानी अउ छत्तीसगढ़िया संस्कृति के प्रतीक पोला तिहार के गाड़ा गाड़ा बधाई। प्रदेश धन-धान्य से भरपूर रहाय अउ हमर पशुधन हमर तरक्की मा सहाय बने रहाय। ठेठरी-खुर्मी खावव और सब संगी साथी मन ला खवावव। सुभकामना। pic.twitter.com/xInlQSYpZb — Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel)
हरेली तिहार: छत्तीसगढ़ का पहला तिहार, अच्छे फसल और स्वास्थ्य की कामना

हरेली तिहार: छत्तीसगढ़ का पहला तिहार, अच्छे फसल और स्वास्थ्य की कामना

tourism
धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ अपनी संस्कृति और तीज त्योहारों के लिए भी प्रसिद्ध है. हरेली तिहार पहला त्यौहार है जिसका किसानों के लिए बहुत महत्व है. हरेली छत्तीसगढ़ी शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ होता है ‘हरियाली’. तब प्रकृति भी प्रचंड गर्मी के बाद हरियाली से आच्छादित हो जाती है. छत्तीसगढ़ के ‘गोंड‘ जनजातीय का मुख्य रूप से महत्वपूर्ण त्योहार है. यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के सावन (श्रावण) महीने के श्रावणी अमावस्या के दिन मनाया जाता है. जो जुलाई और अगस्त के बीच वर्षा ऋतु में होता है. यह त्यौहार ‘श्रावण’ के महीने के प्रारंभ को दर्शाता है जो कि हिंदुओं का पवित्र महीना है. रिवाज: पशुधन और किसानी में काम आने वाले औजारों की पूजा की जाती है  यह त्योहार पूरे दिन मनाया जाता है और किसी को भी कोई काम करने की अनुमति नहीं है। खेतों से संबंधित उपकरण और गायों की इस शुभ दिन पर किसान पूजा करत