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मकर सक्रांति 2020: सूर्य हुए उत्तरायण, धनु से मकर राशि में किया प्रवेश, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

मकर सक्रांति 2020: सूर्य हुए उत्तरायण, धनु से मकर राशि में किया प्रवेश, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

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सूर्य को अन्न धन का दाता और समस्त ऊर्जा का आधार माना गया है। भारत में सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर रेखा की ओर जाने का स्वागत उमंग और उत्साह से किया जाता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में इसे मकर संक्रांति, पोंगल और लोहड़ी पर्व के नाम से मनाते है। मकर संक्रांति का यह त्यौहार ऋतु परिवर्तन का संदेश लेकर आता है। इस बार मकर सक्रांति की तिथि को लेकर संशय बना है। ज्योतिषियों के मुताबिक मकर सक्रांति इस बार 15 जनवरी को पड़ेगी। मकर सक्रांति का जितना धार्मिक महत्व है उतना ही वैज्ञानिक महत्व भी है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। माना जाता है क‍ि मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य देव अपने पुत्र शनि से नाराजगी छोड़कर उनके घर गए थे। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि भगीरथ के ...
हनुमान जयंती आज, ऐसे करें व्रत और ये है पूरी पूजा विधि, हनुमान चालीसा का पाठ करते समय इन बातों का रखे ध्यान, मिल सकते है बड़े फायदे

हनुमान जयंती आज, ऐसे करें व्रत और ये है पूरी पूजा विधि, हनुमान चालीसा का पाठ करते समय इन बातों का रखे ध्यान, मिल सकते है बड़े फायदे

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19 अप्रैल, शुक्रवार को हनुमान जयंती है। ग्रंथों के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा यानी आज हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को हनुमान जयंती या हनुमान प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। हनुमान जयंती पर बजरंगबली की विशेष पूजा की जाती है। हनुमान जयंती पर व्रत करने और बजरंग बली की पूजा करने से दुश्मनों पर जीत मिलती है इसके साथ ही हर मनोकामना भी पूरी होती है। हनुमान जी की पूरी पूजा विधि हनुमान जयंती का व्रत रखने वालों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान श्रीराम, माता सीता व हनुमानजी का स्मरण करें। इसके बाद नहाकर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें और विधिपूर्वक पूजा करें। हनुमान जी को शुद्ध जल से स्नान करवाएं। फिर सिंदूर और चांदी का वर्क चढ़ाएं। हनुमान जी को अबीर, गुलाल, चंदन और चावल चढ़ाएं। इसके बाद सुगंधित फूल और फूलों की माला चढ़ाए...
देवउठनी एकादशी आज, पर 7 दिसंबर के बाद होंगे शुभ कार्य, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, कथा और महत्व

देवउठनी एकादशी आज, पर 7 दिसंबर के बाद होंगे शुभ कार्य, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, कथा और महत्व

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देवउठनी एकादशी के लिए नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में गन्ना मंडप बनाकर शालीग्राम का तुलसी विवाह मनाया जाएगा।देवउठनी एकादशी से ही सारे मांगलिक कार्य जैसे कि विवाह, नामकरण, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश की शुरुआत हो जाती है। इसके लिए शहर में रविवार की सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्रों से गन्ने की बिक्री के लिए दुकानें लग गई थी। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी और तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है। ऐसी मान्‍यता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु चार महीने तक सोने के बाद दवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह कार्तिक माह की शुक्‍ल पक्ष एकादशी को मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक यह त्‍योहार हर साल नवंबर में आता है. इस बार देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह 19 नव...