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व्यक्ति विशेष: पांडवानी गायिका तीजन बाई को पद्म विभूषण, यह सम्मान पाने वाली प्रदेश की पहली छत्तीसगढ़ियां कलाकार

भिलाई (एजेंसी) | अंतरराष्ट्रीय पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को देश का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्म विभूषण मिलने जा रहा है। इसका ऐलान केंद्र सरकार ने किया है। यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली प्रदेश से पहली छत्तीसगढ़ियां कलाकार है। अब तक प्रदेश में किसी को भी पद्म विभूषण नहीं मिला है।

जब तीजन बाई को इसकी खबर मिली तो वो अपने गनियारी स्थित घर में थी। तब उनके निज सचिव मनहरण सार्वा ने घर पर फोनकर तीजन बाई इसकी खबर दी। तब तीजन बाई की जुबान से सिर्फ एक ही शब्द था, ऐ का होथे रे… (ये क्या होता है?) तीजन बाई के इस सवाल का जवाब मनहरण सार्वा ने दिया कहा, यह देश का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार है। तीजन बाई हंसते हुए बोली। चलो बढ़िया है। जाबो सम्मान लेबर (सम्मान लेने जाउंगी)।




पीए मनहरण सार्वा ने तीजन बाई को खबर दी… 

मनहरण सार्वा तीजन से : अम्मा, आप मन ल एक ठन अऊ सम्मान मिलने वाला हे, अभी खबर मिली से?

तीजन बाई: काए सम्मान मिलही।

मनहरण: देश के दूसरा सबले बड़े पुरस्कार हरे। पद्म विभूषण पुरस्कार कहिथे ऐला।

तीजन बाई: ऐ काए पुरस्कार हरे। में तो नहीं जानो एकर बारे में। मोला लगिस कि कोई देने वाला हो ही। अभिचे तो जापान ले पुरस्कार लाए रेहेन।

कौन है तीजन बाई?

तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को हुआ। गनियारी में जन्मी तीजन के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था। नन्हीं तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते सुनाते देखतीं और धीरे-धीरे उन्हें ये कहानियां याद होने लगीं। उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया।

13 साल की उम्र में नाना से सीखी थी पांडवानी

13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएं केवल बैठकर गा सकती थीं जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं कापालिक शैली में पांडवानी की।

कभी स्कूल नहीं गई तीजन बाई, 4 बार मिली डिलीट

बचपन में स्कूल का मुंह न देख पाने वाली पंडवानी गायिका तीजन बाई साक्षरता अभियान में किसी तरह पांचवीं की सीढ़ी ही चढ़ पाईं लेकिन उनकी पंडवानी की ऐसी धूम रही कि भारत रत्न छोड़ सब पुरस्कार मिल गए। तीजन बाई ट्विनसिटी की ऐसी एकमात्र हस्ती हैं जिन्हें डि लिट् की इतनी उपाधि मिली है।




पंडवानी के अस्तित्व को जिंदा रखने ले रही क्लास

लोक कला पंडवानी का अस्तित्व बचाए रखने के लिए तीजन बाई हर वो संभव कर रही है जो उन्हें करना चाहिए। अब तक 217 स्टूडेंट्स को पांडवानी की ट्रेनिंग दे चुकी है। आसपास के गांव के बच्चे भी सीखने के लिए गनियारी आते हैं।

जब पुरस्कार लेने के लिए खुद को पीछे कर अपने सहयोगी को बढ़ाया आगे

मनहरण बताते हैं हालही में संगीत कला एकेडमी पुरस्कार के लिए एक बार फिर तीजन बाई के पास फोन आया। पुरस्कार देने वालों ने इस पुरस्कार के लिए तीजन बाई को बुलाया। लेकिन खुद के बजाए अपने सहयोगी मीनू साहू का नाम आगे बढ़ाया।

हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और फिर बदल गई जिंदगी

एक दिन ऐसा भी आया जब प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तबसे तीजनबाई का जीवन बदल गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से लेकर अनेक अतिविशिष्ट लोगों के सामने देश-विदेश में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रदेश और देश की सरकारी व गैरसरकारी अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत तीजनबाई मंच पर सम्मोहित कर देनेवाले अद्भुत नृत्य नाट्य का प्रदर्शन करती हैं। तीजन बाई अब खुद पांडवानी की ट्रेनिंग दे रही है।

सितंबर 2016 में बीएसपी से रिटायर हुई

डॉ. तीजन बाई बीएसपी में डीजीएम थी। सितंबर 2016 में रिटायर हुई। 2017 में तीजन बाई को खैरागढ़ यूनिवर्सिटी डिलीट की उपाधी दी। संगीत विवि खैरागढ़ में तीजन बाई को डिलीट की उपाधि दी गई थी।

1988 में पद्मश्री से अब 2019 में पद्म विभूषण तक का सफर 

1988 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री
2003 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से अलंकृत की गयीं।
1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
2007 में नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया गया।



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