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विशेष: देश में बेरोजगारी चरम पर, केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का युवाओं को अयोग्य कहना शर्मनाक

विगत महीनों से देश में नई सरकारी भर्तियां कम प्रकाशित हो रही. देश स्तर में आई आर्थिक मंदी इसकी प्रमुख वजह हो सकती नए संस्थान जैसे बैंकिंग, फाइनेंस, इन्शुरन्स इत्यादि भी अपना विस्तार जमीनी स्तर पर नहीं कर रहे है. भारत सरकार भी रोजगार हेतु चल रहे कार्यकर्मो में इतनी रूचि नहीं दिखा रही है.

unemployment in youth of india
सांकेतिक चित्र

आखिर सरकारी रोजगार भर्ती सूचनाएं चुनावी साल में ही क्यों जारी होती है, जारी भी होती है तो सरकार बदल जाने पर निरस्त कर दी जाती है, अथवा सिलेक्शन परिणाम को काफी दिनों तक विलम्बित कर दिया जाता है. राजनीतिक पार्टियों की महत्वाकांक्षा में आज के बेरोजगार युवा पिछड़ रहे है.

भारत सरकार द्वारा संचालित तमाम स्वरोजगार एवं प्रशिक्षण योजनाएं युवाओं को वो मुकाम नहीं दे पा रही, उल्टा उनपे बैंक से  लिए क़र्ज़ का भोझ डाल रही है. गौर करने वाली बात है, एक युवा को आप किसी भी ट्रेंड में प्रशिक्षण दे सकते है, पर एक दूकान अथवा संस्थान चलना बड़ी बात होती है जो अनुभव के साथ ही आ पाता है, ये अनुभव आप किसी और संस्थान निजी सरकारी इत्यादि में नौकरी करके प्राप्त कर सकते है.

केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार जी का बयान था “उत्तर भारत के युवा में योग्यता नहीं, तो नौकरी किस बात की ? नौकरी बहुत है करने वाले योग्य नहीं”. ये बयान देते वक़्त माननीय मंत्री जी ने एक बार भी याद नहीं किया भारत सरकार द्वारा संचालित स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया इत्यादि योजनाओ को जिसको बड़े जोर शोर से सरकार ने ही युवाओ में योग्यता एवं प्रशिक्षण देने के लिए शुरू किया था.

“राजनेताओं से अपील है की वो शिक्षित युवाओं को अयोग्य, उत्तर, दक्षिण इत्यादि कहकर अपनी जिम्मेदारियों से पीछे न हटे. उनमे भेदभाव एवं हीन भावना उत्पन ना होने दे.  भारत के तमाम शिक्षित युवा, योग्य है. अगर कमी है तो रोजगार के अवसरो की. उम्मीद है की भारत सरकार एवं तमाम राज्य की सरकारे साथ मिल के बेरोजगारी के विषय पर आने वाले समय में सार्थक प्रयास करेगी.”

bishes dudani
बिशेष दुदानी
संपादक – छत्तीसगढ़ रोजगार

RO No - 11069/ 14
CM Bhupesh Bhagel Mandi ko Maar

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