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Guru Nanak Jayanti 2018: गुरू नानक जयंती आज, जानें कौन थे गुरू नानक देव, क्यों मनाया जाता है यह पर्व?

आज 23 नवंबर को देश भर में  गुरू नानक जयंती मनाई जा रही है। जिस दिन गुरू नानक देव जी का जन्म हुआ उस दिन कार्तिक महीने की पूर्णिमा थी, इसीलिए हर साल कार्तिक महीने की पूर्णिमा को गुरू नानक जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सिख समुदाय के लोग प्रकाशोत्सव के रूप में मनाते हैं। कहा जाता है कि गुरु नानक देव जी ने ही सिख धर्म की स्थापना की थी और इसलिए गुरु नानक सिखों के आदिगुरु कहलाए। समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने के लिए गुरू नानक देव जी ने कई दौरे किए और जहां पर भी वो गए अपने उपदेशों को फैलाया। उनके उपदेश आज भी प्रासंगिक नज़र आते हैं।

गुरू नानक जयंती सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरू नानक देव के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। गुरू नानक का जन्म संवत् 1526 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था, जिसके चलते आज के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। हालांकि उनके जन्म को लेकर आज धर्म प्रमुखों में आज भी कई मतभेद हैं, लेकिन जन्म तिथि के अनुसार आज ही के दिन गुरू नानक जयंती पर्व मनाया जाता है। उनका जन्म रावी नदी के किनारे बसे गांव लोखंडी में हुआ था, जोकि अब पाकिस्तान का हिस्सा है। यही कारण है कि गुरू नानक देव की जयंती पर हजारों की संख्या में सिख श्रद्धालु पाकिस्तान के लिए रवाना हो जाते हैं।




गुरू नानक जयंती को सिख धर्म के लोग प्रकाश पर्व के रूप में मनाते हैं और इस दिन से कुछ समय पहले से ही पाठ कर गुरू नानक देव के समाज के प्रति समर्पण को याद करते हैं। इस अवसर पर कई सिख अखंड पाठ का आयोजन कराते हैं, जिसमें गुरू ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है। करीब 48 घंटे तक अखंड पाठ का आयोजन कर सभी सिख गुरू नानक देव की जयंती से एक दिन पहले प्रभात फेरी पर निकालते हैं।

बता दें कुछ विद्वान गुरू नानक देव की जयंती 15 अप्रैल 1469 भी मानते हैं। यही कारण है कि ये लोग 15 अप्रैल को भी गुरू नानक की जयंती मनाते हैं। बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के रहे गुरू नानक देव ने कुछ ऐसे चमात्कारिक कार्य किए जिसके चलते लोगों ने उन्हें विशेष और दिव्य व्यक्तित्व वाला मानने लगे। इस दौरान गुरू नानक देव ने समाज में फैली कुरीतियों और लोगों के मन से घृणा के भाव को मिटाने व आपस में प्रेम की भावना जागृत करने के लिए कई काम किए।

कहते हैं गुरू नानक देव ने ही सिख धर्म की स्थापना की थी। इसीलिए सिख उन्हें अपना आदि गुरू मानते हैं। अपने जीवन काल में एक समाज सुधारक और धर्म सुधारक के रूप में कई यात्राएं की। इस दौरान उन्होंने एक कवि के के साथ ही विश्व बंधू के रूप में कई कार्य किए। उन्होंने समाज में फैली बुराईयों को दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मात्र 16 साल की आयु में शादी होने और बेटे लखीमदास के जन्म के बाद भी जब उनका मन घर-गृहस्थी में नहीं रमा तो वह भारत सहित अन्य देशों की यात्रा पर निकल गए और वहां धार्मिक उपदेश देकर लोगों को सही रास्ते पर लाने का कार्य किया।



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