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Ganesh Chaturthi 2018: जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और प्रतिष्ठापना विधि

आज पुरे देश में गणेश चतुर्थी बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। तीज के दूसरे दिन यानि कि भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दर्शी तक यह उत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि इन 10 दिनों में गणपति बप्पा अपने भक्तों के घर आते हैं और उनके दुख हरकर ले जाते हैं। यही वजह है कि लोग उन्हें अपने घर में विराजमान करते हैं। 10 दिन बाद उनका विसर्जन किया जाता है।

श्रीगणेश स्थापना मुहूर्त

श्रीगणेश प्रतिमा स्थापना अभिजीत मुहूर्त में सुबह 10.40 से दोपहर 12.40 के बीच कर सकते हैं।
अन्य मुहूर्त
सुबह 6.16 से 7.46 शुभ
10.46 से दोपहर 12.16 चंचल
दोपहर 12.16 से 1.46 लाभ
दोपहर 1.46 से 3.16 अमृत
प्रतिमा स्थापना सूर्यास्त के बाद नहीं की जानी चाहिए।
13 सितंबर मध्याह्न गणेश पूजा का समय – 11:03 से 13:30 बजे तक
13 सितंबर को चन्द्रमा को नहीं देखने का समय – 09:31 से 21:12 बजे तक
चतुर्थी तिथि समाप्त – 13 सितम्बर 2018 को 14:51 बजे।




गणपति की प्रतिष्ठापना

श्री गजानन को लेने जाएं तो नवीन वस्त्र धारण करें। चांदी की थाली में स्वास्तिक बनाकर उसमें गणपति को विराजमान करके घर में लाएं। अगर चांदी की थाली संभव न हो पीतल या तांबे का प्रयोग करें। और मूर्ति बड़ी है तो हाथों में लाकर भी विराजमान कर सकते हैं। घर में विराजमान करें तो मंगलगान करें, कीर्तन करें और लड्डू का भोग भी लगाएं।

ऐसा हो पूजा स्थल

आज आप ऊपर दिए गए मुहूर्त में अपने घर गणपति को विराजमान करें। कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। चार हल्दी की बंद लगाएं व एक मुट्ठी अक्षत रखें। इस पर छोटा चौकी या पाटा रखें। लाल, केसरिया या पीले वस्त्र को उस पर बिछाएं। रंगोली, फूल, आम के पत्ते और अन्य सामग्री से पूजा स्थल को सजाएं। फिर तांबे का कलश में पानी भर कर, आम के पत्ते और नारियल से सजाएं। यह तैयारी गणेश उत्सव के पहले कर लें।



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