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‘छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना’ से लाखो लोगो की तीर्थ यात्रा करने की इच्छा हुई पूरी

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना की वजह से कई लोगों की सालों पुरानी इच्छा पूरी हो रही है। गरीबी या फिर धन के अभाव की वजह से तीर्थ-यात्रा न कर पाने वाले लोगों के लिए यह योजना वरदान मानी जा रही है। इस योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के निवासी वरिष्ठ नागरिकों यानी 60 वर्ष या अधिक आयु के लोगों को उनके जीवनकाल में एक बार, प्रदेश के बाहर स्थित विभिन्न नामनिर्दिष्ट तीर्थ स्थानों में से किसी एक या एक से अधिक स्थानों की यात्रा सुलभ कराने हेतु शासकीय सहायता प्रदान करना है।

यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों को भोजन, आवास और परिवहन की व्यवस्था पूरी तरह से निःशुल्क है। इसके तहत प्रत्येक यात्रा में 1000 तीर्थ यात्रियों को विशेष ट्रैन द्वारा यात्रा पूर्ण कराइ जाती है।

इन तीर्थ स्थानों की कराइ जाती है यात्रा

मुख्यमंत्री तीर्थ-यात्रा योजना के अंतर्गत बुजुर्गों और दिव्यांगों ने वैष्णो देवी,  मथुरा, वृंदावन, पुरी जगन्नाथ, ओम्कारेश्वर, उज्जैन, कामाख्या मंदिर, अजमेर शरीफ, पुष्कर, द्वारिका, सोमनाथ, नागेश्वर, अमृतसर,फतेहपुर चिस्ती की दरगाह, हरिद्वार, ऋषिकेश, भारत माता का मंदिर,  सम्मेद शिखर, रामेश्वर, मदुराई, तिरुपति, स्वर्ण बेलगोला, शिरडी शनि सिगनापुर, बाबा बैजनाथ धाम,प्रयाग काशी, अमृतसर स्वर्ण मंदिर, बेलांगणी चर्च, नागापट्टनम, बाबाधाम, बोधगया, गंगा सागर, बिरला मंदिर, कालीघाट, तख्तश्री पटना साहेब, श्रवण बेलगोला गुरुवायुर, इट्टुमन्नूर, तिरुपति जैसे पवित्र स्थानों और तीर्थ-स्थलों के दर्शन करवाए गये हैं।

योजना का लाभ लेने की पात्रता 

छत्तीसगढ़ का मूल निवासी हो।
60 वर्ष या उससे अधिक आयु का हो।
इस योजना के अंतर्गत पूर्व में यात्रा न की हो।
यात्रा हेतु शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम हो।

आवेदन करने की प्रक्रिया

संबंधित हितग्राही अपने आवेदन पत्र निर्धारित प्रपत्र में ग्राम पंचायत/जनपद पंचायत/ उप संचालक, पंचायत एवं समाज कल्याण संबंधित जिला को प्रस्तुत करेंगे।

इसकी चयन प्रक्रिया 

प्राप्त आवेदन पत्रों में से लक्ष्य के अनुरूप लाटरी निकालकर कलेक्टर द्वारा किया जाएगा

वर्ष 2013 से चल रही है यह योजना 

इस योजना की शुरूआत 15 जनवरी, 2013 को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा राजधानी रायपुर के रेल्वे स्टेशन विशेष रेलगाड़ी को हरी झण्डी दिखाकर की गई थी। आंकड़े बताते है कि वर्ष 2012-13 में योजना प्रारंभ होने के बाद अब तक 255 तीर्थ यात्राओं के माध्यम से 2 लाख 31 हजार 591 बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से देश के विभिन्न तीर्थों का निःशुल्क भ्रमण करवाया गया है। इनमें से छह यात्राएं दिव्यांगजनों के लिए आयोजित की गयी थीं। इन यात्राओं में तीन हजार 82 दिव्यांगजनों ने देश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया। उनके सहयोग के लिए दो हजार 156 सहायकों और 233 अनुरक्षकों को भी भेजा गया था।  वर्ष 2018-19 के लिए इस योजना के अंतर्गत 46 करोड़ की राशि का व्यय संभावित है।



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