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पढ़ाई के लिए अखबार बांटा, दुकान में काम कर मजदूर का बेटा 10वीं में ले आया 90.33 % अंक

बिलासपुर (एजेंसी) | ये दो तस्वीरें हैं, उन दो बच्चों के पढ़ने का हौंसले की। दोनों बच्चो के घरों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। माता-पिता मजदूर हैं। दोनों बच्चो ने कक्षा चौथी से किराना दुकान में काम करना शुरू कर दिया। कभी दूसरों के घरेलू काम, न्यूज पेपर बांटा और इसी तरह के कामों से खुद की पढ़ाई का खर्च उठाया। ये हौसले की कहने है शंकर और शिवम् की। शंकर ने कक्षा 10वीं में 90.33 फीसदी और शिवम सिंगरौले ने 85 फीसदी अंक हासिल कर माता-पिता और स्कूल का नाम रोशन कर दिया।

जब सब सो जाते थे, तब पढ़ पाता था

यहां तक की पढ़ाई तो किसी तरह हो गई। आगे और कठिनाइयां हैं। बस मन में आगे बढ़ने की ललक है। देखता हूं कितना कर पाऊंगा। किसी भी बड़े आदमी के बारे में पढ़ता हूं, या देखता हूं तो मुझे हौसला मिलता है। एक कमरे के घर में पढ़ पाना मुश्किल था। माता-पिता जब काम पर चले जाते थे तब मैं पढ़ाई करता था। स्कूल से 12 बजे आने के बाद दोपहर दो बजे से शाम 5 बजे तक पढ़ाई की।

शाम छह बजे से रात 10 बजे तक सीए ऑफिस में काम किया। फिर जब रात में सब सो जाते थे तब मैं फिर पढ़ाई करता था। आगे कॉमर्स लेकर सीए बनने का सपना देख रहा हूं। उन्होंने बताया कि वे कूडो खिलाड़ी भी हैं। स्कूल नेशनल कूडो में दो बार हिस्सा ले चुके हैं। हालांकि पदक जीतने में सफलता नहीं मिली है।

छोटी उम्र से ही करने लगा था काम

शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल कोनी में पढ़ने वाले शंकर कुमार के पिता संतोष कुमार प्रजापति पेशे से मिस्त्री हैं। माता श्याम कुमार प्रजापति भी मजदूरी करती हैं। बड़ी कोनी निवासी शंकर ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। एक किराए के कमरे में हम चार भाई बहन मिलाकर कुल छह लोग गुजर बसर करते हैं। चार बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा पाना माता-पिता के लिए मुश्किल था।

मुझे ऐसा लगा तो मैं कक्षा चौथी से ही छोटे-मोटे काम करने लगा ताकि मैं अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठा सकूं। आज भी मैं पढ़ाई के साथ काम पर जाता हूं। सीए ऑफिस में काम करने वाले शंकर ने बताया कि उन्हें 2000 हजार रुपए हर महीने मिलते हैं जिससे वे अपनी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। अगर पैसे बच जाते हैं तो वे अपने परिवार की जरूरतों पर खर्च करते हैं।

बर्तन कारखाने में काम करते हैं पिता, 85 फीसदी अंकों से पास हुआ शिवम

इधर इसी स्कूल के शिवम सिंगरौले भी इन्हीं परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। शिवम कक्षा दसवीं में 85 फीसदी अंकों से पास हुए हैं। छोटी कोनी में रहने वाले शिवम के पिता बर्तन कारखाने में काम करते हैं। इसी से पूरे घर का खर्च चलता है। दो भाई और एक बहन में शिवम दूसरे नंबर के हैं। तीनों की पढ़ाई का खर्च उठा पाना पिता के लिए मुश्किल है। माता संजुलता सिंगरौले घर को संभालती हैं। शिवम ने बताया है कि वे ज्यादा तो कुछ नहीं कर पाते लेकिन पिता को थोड़ी राहत मिल सके, इसलिए काम में उनका हाथ बंटाते हैं। साथ ही घर के सारे काम भी करते हैं। घर की स्थिति ठीक नहीं है इसलिए सुविधाओं की उम्मीद नहीं करते हैं। प्रतिदिन 4 घंटे पढ़ाई करने की मेहनत से ही मेरे अंक 85 फीसदी आ गए। आगे बायो से पढ़ाई कर डॉक्टर बनने के बारे में सोच रहा हूं। इसके अलावा शिवम कूडो में स्टेट लेवल पर सिल्वर मेडल भी जीत चुके हैं।

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CM Bhupesh Bhagel Mandi ko Maar

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