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शिक्षक दिवस विशेष: 85 साल की पुष्पा 22 साल से गरीब बच्चों को निशुल्क दे रहीं हैं शिक्षा, ताकि उनकी पढ़ाई न रुके

बिलासपुर (एजेंसी) | रिटायरमेंट के बाद अमूमन लोग अपनी बची हुई उम्र घर परिवार के मोह में समर्पित करते हैं। कुछ ऐसे हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं। इनमें से एक हैं बिलासपुर की पुष्पा मेहता। 63 साल तक बच्चों को पढ़ाने के बाद भी इनकी पढ़ाने की भूख समाप्त नहीं हुई। इस समय राष्ट्रीय पाठशाला में प्रबंध संचालक हैं। साथ में बच्चों को हिंदी का पाठ भी पढ़ा रही हैं। वे ऐसा इसलिए कर रही हैं कि उनके जीते जी गरीब बच्चे पढ़ाई से वंचित न होने पाएं।

वेतन नाममात्र का, इसलिए शिक्षकों को यहां पढ़ाना पसंद नहीं

विद्या नगर में रहने वाली पुष्पा 85 साल की हैं। 30 अप्रैल 1997 को वे रिटायर हुईं थीं। इसके बाद भी वे 22 साल से गरीब बच्चों के बीच पांच घंटे रहती हैं। कम सुनाई देता है बावजूद इसके वे बच्चों के मन को सुन लेती हैं। बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का उद्देश्य है कि गरीब बच्चों की पढ़ाई न रुके। क्योंकि राष्ट्रीय पाठशाला में शिक्षकों को नाममात्र का वेतन मिलता है। इसलिए ज्यादातर शिक्षक यहां पढ़ाना उचित नहीं समझते।

7 रुपए से शुरू की थी नौकरी

21 मई 1935 में पुष्पा मेहता का जन्म दमाेह में हुआ। 13 सितंबर 1956 में एक निजी स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया। 19 जून 1963 को पुष्पा की शादी बिलासपुर के आनंद शंकर मेहता से हुई। 7 अगस्त 1963 में उन्होंने राष्ट्रीय पाठशाला में पढ़ाना शुरू कर दिया। तब उन्हें सैलरी के रूप में सिर्फ 7 रुपए मिलते थे। 1965 में उनकी तनख्वाह 550 रुपए हो गई। 30 अप्रैल 1997 को वे रिटायर हो गईं। तब उन्हें 4000 रुपए प्रति माह मिलते थे। अब निशुल्क शिक्षा दे रही हैं।

पूरा परिवार एक साथ रहता है

पुष्पा ने बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी है। अखिलेश मेहता बटा और अक्षय छोटा बेटा है। दोनों के तीन बच्चे हैं। बेटी अनीता की शादी हो चुकी है। दो बहुएं, बेटे, नाती-पोता समेत सात लोगों का परिवार एक साथ रहता है। उन्होंने बताया कि उनके पति आनंद शंकर मेहता का निधन 2004 में हुआ था। वे सरकारी शिक्षक थे। उन्होंने लाला लाजपत राय में सेवाएं दीं हैं।

पढ़कर विदेश में कर रहे नौकरी

पुष्पा के छोटे बेटे अक्षय ने बताया कि माता जी के पढ़ाए हुए ज्यादातर लोग बड़ी नौकरी में हैं। विदेश में बिलासपुर का नाम रौशन कर रहे हैं। मसानगंज में रहने वाले अशोक मेहता डॉक्टर हैं। संदीप अग्रवाल सिविल इंजीनियर हैं। खुद की कंसल्टेंसी। दीप जोवन पुत्रा इस समय विदेश में नौकरी कर रहे हैं। नारियल कोठी में रहने वाली मीना सिंह सरकारी स्कूल लिमतरी में प्राचार्य हैं।

बच्चों को पढ़ाना और देखभाल करना कोई मैडम से सीखे

प्रियदर्शिनी नगर में रहने वाले संदीप अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 1968 में मैंने पुष्पा मैडम से शिक्षा ली। उन्हीं का आशिर्वाद है कि आज मैं यहां तक पहुंचा। बहुत ही अच्छा स्वभाव है उनका। बच्चों की देखभाल इतने अच्छे से करती थी कि आज भी मैं उन्हें याद करता हूं। बच्चे पढ़ाई से डरते हैं लेकिन मैडम से कभी डर लगा ही नहीं। पढ़ाने का तरीका तो कोई उनसे सीखे। मैडम तो राष्ट्रीय बॉल मंदिर की पर्यायवाची हैं।

समय की प्रतिबद्धता और अनुशासन मैंने उन्हीं से सीखा

शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला लिमतरी की प्राचार्य मीना सिंह आज भी मैडम को याद करती हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1976 में मुझे पुष्पा मैडम ने पढ़ाया। उन्होंने मुझे पढ़ाया ये मेरे लिए गर्व की बात है। यही कारण है कि मैं आज प्राचार्य बन पाई हूं। इतना सरल स्वभाव मैंने किसी का देखा ही नहीं। अनुशासन तो कोई मैडम से सीखे। बच्चों से बहुत प्यार करती थी। समय की प्रतिबद्धता और अनुशासन मैंने उन्हीं से सीखा।

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