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व्यक्ति विशेष: छत्तीसगढ़ की बेटी ने देश का किया नाम रोशन, वर्ल्ड योग फ़ेस्टिवल में जीते मेडल

व्यक्ति विशेष: छत्तीसगढ़ की बेटी ने देश का किया नाम रोशन, वर्ल्ड योग फ़ेस्टिवल में जीते मेडल

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कहते है ना कि पूत के पांव पालने में ही दिखने लगते है। एक मजदुर पिता ने अपनी बेटी की प्रतिभा को न सिर्फ पहचाना बल्कि उसे आगे उड़ने के लिए पंख भी दिए। छत्तीसगढ़ प्रदेश के योग की ब्रांड एम्बेसडर दामनी साहू ने बुल्गारिया में आयोजित वर्ल्ड योग फ़ेस्टिवल में दो सिल्वर मेडल जीतकर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। 16 देशो के खिलाड़ियों ने लिया था भाग  हाल ही में 28 से 30 जून के बीच बुल्गारिया में संपन्न हुए विश्व योग समारोह में योग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। जिसमे हिस्सा लेने दामिनी यहां पहुंची थी। 7 कैटेगिरी में हुई इस प्रतियोगिता में चीन, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड सहित 16 देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।भारत से 19 खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। जिसमे छत्तीसगढ़ से तीन खिलाड़ी शामिल हुए थे। कोच संतोष आनंद राजपूत के मार्गदर्शन में इन सभी खिलाड़ियों ने विदेशों में नाम रोशन
व्यक्ति विशेष: हीरारतन थवाईत, जिन्होंने अकेले ही नदी तट पर 7 एकड़ बंजर जमीन को 5 सौ पौधे रोप कर बना दिया हराभरा

व्यक्ति विशेष: हीरारतन थवाईत, जिन्होंने अकेले ही नदी तट पर 7 एकड़ बंजर जमीन को 5 सौ पौधे रोप कर बना दिया हराभरा

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कसडोल (एजेंसी) | मैं दुनिया बदल सकता हूं मुहावरे को ग्राम कटगी में एक गरीब किसान ने चरितार्थ कर दिया है। उन्होंने गांव में हरियाली ही हरियाली ला दी है। उन्होंने नदी तक के डुबान क्षेत्र में बंजर पड़ी 7 एकड़ जमीन पर लगाए हैं 5 सौ पौधे, जिसमें 20 दिन से 20 साल उम्र के पेड़ शामिल हैं। पर्यावरण तो शुद्ध हुआ ही है। इस एरिया को देखने में मन बाग-बाग हो जाता है। उस व्यक्ति की जितनी प्रंशसा की जाए कम है। कसडोल से गिधौरी मुख्य मार्ग में 12 किमी दूरी पर जोक नदीं के तट पर बसा ग्राम कटगी है, जिसकी आबादी लगभग 4 हजार है। इसी गांव गरीब किसान 64 साल के हीरारतन थवाईत 20-25 सालों से लगातार पौधरोपण कर रहे हैं। उन्होंने जोक नदी एवं कटगी बस्ती के बीच बाढ़ आने पर डुबान क्षेत्र नदी किनारे पौधरोपण कर हरियाली ला दी है, जिसे देखकर मन आनंदित हो उठता है। 25 सालों में 500 पौधे रोपे शुरुआत में कुछ बबूल के बीज छिड़क
व्यक्ति विशेष: जेल में रह रही 6 साल की मासूम का स्कूल में दाखिला कराकर, कलेक्टर ने पेश की इंसानियत की मिसाल

व्यक्ति विशेष: जेल में रह रही 6 साल की मासूम का स्कूल में दाखिला कराकर, कलेक्टर ने पेश की इंसानियत की मिसाल

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बिलासपुर (एजेंसी) | बिलासपुर के जिला कलेक्टर डॉ. संजय कुमार अलंग ने 6 वर्षीय ख़ुशी (बदला हुआ नाम) का स्कूल में दाखिला कराकर उसे नई जिंदगी दी और इंसानियत की एक मिसाल पेश की। बीते दिनों, जब बिलासपुर के कलेक्टर डॉ. संजय अलंग ने जेल का दौरा किया, तो उनकी मुलाक़ात इस बच्ची से हुई। ख़ुशी ने उन्हें बताया कि वह जेल की चारदीवारी से बाहर निकलकर पढ़ना चाहती है। बाकी बच्चों की तरह बाहर के स्कूल में जाना चाहती है। शिक्षा के प्रति इस बच्ची का लगाव देखकर, आईएएस अफ़सर डॉ. संजय अलंग ने इस बारे में कुछ करने की ठानी। उन्होंने जेल के अधिकारियों से बात करके शहर के किसी अच्छे स्कूल में ख़ुशी का दाखिला करवाने का फ़ैसला किया। महज छह साल की ख़ुशी जेल की सलाखों के पीछे रहने के लिए इसलिए मजबूर है क्यूँकि उसके पिता यहाँ पर सजा काट रहे हैं। ख़ुशी की माँ का देहांत उसके जन्म के कुछ समय बाद ही हो गया था। घर में कोई और नहीं
225 साल बाद भी चार मंजिला इस बावली के दो मंजिल पानी में डूबे हुए हैं, राजस्थान की तर्ज पर किया निर्माण

225 साल बाद भी चार मंजिला इस बावली के दो मंजिल पानी में डूबे हुए हैं, राजस्थान की तर्ज पर किया निर्माण

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कवर्धा (एजेंसी)| रियासत काल में यहां राजस्थान की तर्ज पर बावली बना है। 225 साल बाद भी चार मंजिला इस बावली का दो मंजिला पानी में डूबा हुआ है। इसके बावजूद पानी का प्रभाव इनके कमरों पर नहीं पड़ता। बहुकोणीय आकृति में बने इस बावली में 8 कमरे हैं, जहां रियासती दौर में राजा- रानी विश्राम किया करते थे। स्थानीय लोगों ने इस बावली को कभी सूखते हुए नहीं देखा निर्माण के समय जलस्रोतों का अध्ययन करने के बाद यहां खोदाई कर बावली बनवाया गया था। इसमें आज भी पानी मौजूद है। पुराने समय में बावली के पानी का उपयोग सिंचाई, पेयजल और फव्वारों में किया जाता था। आज भी इसके पानी का उपयोग सिंचाई में होता है। राजमहल के पास मौजूद बावली खंडहर में तब्दील राजमहल के पास एक अन्य बावली मौजूद है, जिसे रानी बावली के नाम से जानते हैं। देखरेख के अभाव में यह बावली उजाड़ हो चुका है। राजघराने के खड्गराज सिंह इस बावली को संरक्षित
लैलूंगा का दशहरी आम बना खास, महाराष्ट्र से आ रही डिमांड, कमाई से महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

लैलूंगा का दशहरी आम बना खास, महाराष्ट्र से आ रही डिमांड, कमाई से महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

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रायगढ़ (एजेंसी) | कोड़ासिया और गमेकेला की महिलाओं ने जिले में अलग पहचान बना ली है। पारंपरिक खेती और मजदूरी छोड़कर महिलाओं ने आम का बगीचा लगाया था। 'आम' ने इन महिलाओं को खास बना दिया। इनकी मेहनत का परिणाम अब दूसरों को भी प्रोत्साहित कर रहा है। लैलूंगा ब्लॉक की महिलाएं काजू के साथ ही अब दशहरी आम का उत्पादन कर रही हैं। खास बात कि इन आमों की मांग पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी आने लगी है। इसके चलते महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनने लगी हैं। 30 पौधे लगाए, अब एक पेड़ से 30 से 50 किलो आम की पैदावार महिलाओं ने 10 साल पहले छह एकड़ में 30 दशहरी आम और 25 काजू के पौधे लगाए थे। अब इनसे उत्पादन शुरू हो गया है। एक पेड़ में 30 से 50 किलो तक आम का उत्पादन हो रहा है। इससे अब हर साल एक महिला की 35 से 40 हजार तक की कमाई हो जाती है। महिलाएं आम पत्थलगांव के बाजार में बेचती हैं लेकिन महाराष्ट्र से भी डिमांड आती है। इस साल
पढ़ाई के लिए अखबार बांटा, दुकान में काम कर मजदूर का बेटा 10वीं में ले आया 90.33 % अंक

पढ़ाई के लिए अखबार बांटा, दुकान में काम कर मजदूर का बेटा 10वीं में ले आया 90.33 % अंक

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बिलासपुर (एजेंसी) | ये दो तस्वीरें हैं, उन दो बच्चों के पढ़ने का हौंसले की। दोनों बच्चो के घरों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। माता-पिता मजदूर हैं। दोनों बच्चो ने कक्षा चौथी से किराना दुकान में काम करना शुरू कर दिया। कभी दूसरों के घरेलू काम, न्यूज पेपर बांटा और इसी तरह के कामों से खुद की पढ़ाई का खर्च उठाया। ये हौसले की कहने है शंकर और शिवम् की। शंकर ने कक्षा 10वीं में 90.33 फीसदी और शिवम सिंगरौले ने 85 फीसदी अंक हासिल कर माता-पिता और स्कूल का नाम रोशन कर दिया। जब सब सो जाते थे, तब पढ़ पाता था यहां तक की पढ़ाई तो किसी तरह हो गई। आगे और कठिनाइयां हैं। बस मन में आगे बढ़ने की ललक है। देखता हूं कितना कर पाऊंगा। किसी भी बड़े आदमी के बारे में पढ़ता हूं, या देखता हूं तो मुझे हौसला मिलता है। एक कमरे के घर में पढ़ पाना मुश्किल था। माता-पिता जब काम पर चले जाते थे तब मैं पढ़ाई करता था। स्कूल से 12 बजे आने
हनुमान जयंती आज, ऐसे करें व्रत और ये है पूरी पूजा विधि, हनुमान चालीसा का पाठ करते समय इन बातों का रखे ध्यान, मिल सकते है बड़े फायदे

हनुमान जयंती आज, ऐसे करें व्रत और ये है पूरी पूजा विधि, हनुमान चालीसा का पाठ करते समय इन बातों का रखे ध्यान, मिल सकते है बड़े फायदे

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19 अप्रैल, शुक्रवार को हनुमान जयंती है। ग्रंथों के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा यानी आज हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को हनुमान जयंती या हनुमान प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। हनुमान जयंती पर बजरंगबली की विशेष पूजा की जाती है। हनुमान जयंती पर व्रत करने और बजरंग बली की पूजा करने से दुश्मनों पर जीत मिलती है इसके साथ ही हर मनोकामना भी पूरी होती है। हनुमान जी की पूरी पूजा विधि हनुमान जयंती का व्रत रखने वालों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान श्रीराम, माता सीता व हनुमानजी का स्मरण करें। इसके बाद नहाकर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें और विधिपूर्वक पूजा करें। हनुमान जी को शुद्ध जल से स्नान करवाएं। फिर सिंदूर और चांदी का वर्क चढ़ाएं। हनुमान जी को अबीर, गुलाल, चंदन और चावल चढ़ाएं। इसके बाद सुगंधित फूल और फूलों की माला चढ़ाए
महाशिवरात्रि 2019: जानिए क्यों मनाया जाता है यह महापर्व, पढ़िए व्रत कथा एवं व्रत की पूरी विधि

महाशिवरात्रि 2019: जानिए क्यों मनाया जाता है यह महापर्व, पढ़िए व्रत कथा एवं व्रत की पूरी विधि

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महाशिवरात्रि का त्यौहार फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व आज यानि 4 मार्च को है। यह साल की आने वाली 12 शिवरात्रियों में से सबसे खास होती है। मान्यता है कि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि सबसे बड़ी शिवरात्रि होती है। इसी वजह से इसे महाशिवरात्रि कहा गया है। दरअसल, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी वाले दिन शिवरात्रि होती है. लेकिन महाशिवरात्रि के दिन ही मंदिरों में शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। व्रत रखते हैं, बेलपत्र चढ़ाते हैं और भगवान शिव की विधिवत पूजा करते हैं। हिंदू पुराणों में इस महाशिवरात्रि से जुड़ी एक नहीं बल्कि कई वजहें बताई गई हैं: पहली बार प्रकट हुए थे शिवजी पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसी दिन पहली बार शिवलिंग की भगवान विष्णु और ब्रह्माजी ने पूजा था। म
व्यक्ति विशेष: पांडवानी गायिका तीजन बाई को पद्म विभूषण, यह सम्मान पाने वाली प्रदेश की पहली छत्तीसगढ़ियां कलाकार

व्यक्ति विशेष: पांडवानी गायिका तीजन बाई को पद्म विभूषण, यह सम्मान पाने वाली प्रदेश की पहली छत्तीसगढ़ियां कलाकार

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भिलाई (एजेंसी) | अंतरराष्ट्रीय पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को देश का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्म विभूषण मिलने जा रहा है। इसका ऐलान केंद्र सरकार ने किया है। यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली प्रदेश से पहली छत्तीसगढ़ियां कलाकार है। अब तक प्रदेश में किसी को भी पद्म विभूषण नहीं मिला है। जब तीजन बाई को इसकी खबर मिली तो वो अपने गनियारी स्थित घर में थी। तब उनके निज सचिव मनहरण सार्वा ने घर पर फोनकर तीजन बाई इसकी खबर दी। तब तीजन बाई की जुबान से सिर्फ एक ही शब्द था, ऐ का होथे रे... (ये क्या होता है?) तीजन बाई के इस सवाल का जवाब मनहरण सार्वा ने दिया कहा, यह देश का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार है। तीजन बाई हंसते हुए बोली। चलो बढ़िया है। जाबो सम्मान लेबर (सम्मान लेने जाउंगी)। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); पीए मनहरण सार्वा ने तीजन बाई को खबर दी...  मनहरण सार्वा तीजन से : अम्मा, आप मन
जन्मदिन विशेष: आखिर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कैसे पहचाना एडोल्फ हिटलर को?

जन्मदिन विशेष: आखिर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कैसे पहचाना एडोल्फ हिटलर को?

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भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। आज उनकी 122वीं जयंती है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। इसके लिए वे तानाशाह कहे जाने वाले एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) से भी मिले थे। एडोल्फ हिटलर और बोस की पहली मुलाकात का किस्सा भी बहुत दिलचस्प है। आज हम आपको उसी के बारे में बता रहे हैं। नेताजी ने कैसे पहचाना एडोल्फ हिटलर (Adolf hitler) को? नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जब पहली बार एडोल्फ हिटलर से मिलने गए तो उन्हें एक कमरे में बैठाया गया। हिटलर ने अपनी सुरक्षा के लिए कई अंगरक्षक रखे थे, उनमें से कुछ बिल्कुल हिटलर की तरह ही दिखते थे। ताकि लोगों को धोखा हो जाए। जब नेताजी कमरे में बैठकर हिटलर का इंतजार कर रहे थे त