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मंत्री बनने के लिए लॉबिंग शुरू, डिप्टी सीएम आदिवासी समाज के विधायक को बनाने की मांग

रायपुर (एजेंसी) | प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और दो अन्य मंत्रियों के शपथ के बाद अब बाकी मंत्री पदों के लिए लॉबिंग तेज हो गई। आदिवासी समाज ने अपने विधायकों को उप मुख्यमंत्री बनाने समेत चार मंत्री पदों के लिए मांग कर दी है। समाज ने राहुल गांधी को पत्र लिख अपनी मांगे रखी हैं।

आदिवासी समाज का कहना है कि इस बार विधानसभा में 29 आदिवासी सीटों से विधायक चुने गए हैं। ऐसे में आदिवासी समाज अपने विधायक को डिप्टी सीएम और कम से कम चार विधायकों को मंत्री पदों पर देखना चाहता है। इधर, मुख्यमंत्री के सामने क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन मंत्रिमंडल में बनाए रखना चुनौती है।

तीन फार्मूले की कसौटी पर कसे जाएंगे विधायक

मंत्री पदों के लिए प्रमुख रूप से तीन फार्मूलों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें जातिगत, क्षेत्रगत, वरिष्ठता के आधार पर दौड़ में शामिल 15 चेहरों में 10 के चुने जाने की संभावना है।




मंत्री की रेस में ये विधायक:

चरणदास महंत (ओबीसी)

पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रशासनिक अनुभव। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष रहे। एमपी में गृहमंत्री का अनुभव। इन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने के भी संकेत हैं।

अमितेष शुक्ल (सामान्य)

अनुभवी नेता। जोगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। शुक्ल परिवार के सदस्य। इस बार 58 हजार से ज्यादा वोट से चुनाव जीते। पार्टी आलाकमान से बेहतर संबंध।

अरुण वोरा (जनरल)

दुर्ग शहर से चुनाव जीतकर आए अरुण वोरा भी तजुर्बेकार विधायक हैं। हाईकमान के सबसे करीबी राष्ट्रीय महामंत्री प्रशासन मोतीलाल वोरा के बेटे हैं। सौम्य छवि है।

सत्यनारायण शर्मा (सामान्य)

अनुभवी विधायक, दिग्विजय सिंह और अजीत जोगी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। मिलनसार व्यक्तित्व के चलते शर्मा का स्पीकर के तौर पर भी लिया जा रहा है।

रविंद्र चौबे (सामान्य)

जनसंपर्क, पीडब्लूडी विभागों के कामकाज का अच्छा अनुभव रहा है। उनके संसदीय ज्ञान और तजुर्बे के चलते विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर भी नाम चर्चा में है।

धनेन्द्र साहू (ओबीसी)

पार्टी के वरिष्ठ नेता। अजीत जोगी की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पीसीसी अध्यक्ष भी रहे। प्रदेश में सियासी तौर पर शक्तिशाली माने जाने वाले साहू समाज से जनप्रतिनिधि हैं।

शिव डहरिया (एससी)

सतनामी समाज से अनुभवी विधायक। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, इसलिए दावेदारी।

अमरजीत भगत (एसटी)

तेजतर्रार आदिवासी नेता। सरगुजा संभाग में 14 में से सभी 14 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया है।

खेलसाय सिंह (एसटी)

अनुभवी विधायक खेलसाय सिंह भी सरगुजा संभाग से हैं। मंत्रिमंडल के लिए मजबूत दावेदारी।

लखेश्वर बघेल (एसटी)

दूसरी बार विधायक। आदिवासी समाज में अच्छी पकड़। साफ-स्वच्छ छवि, मिलनसार व्यक्तित्व।

उमेश पटेल (ओबीसी)

युवा चेहरा। स्व. नंदकुमार पटेल के बेटे हैं। हाईप्रोफाइल प्रत्याशी ओपी चौधरी को पराजित किया।

प्रेमसाय टेकाम (एसटी)

जोगी सरकार में कृषि मंत्री। 6 बार के विधायक। सरगुजा में सक्रिय विधायक। आदिवासी समाज में पकड़।

मोहम्मद अकबर (अल्पसंख्यक)

पार्टी का अल्पसंख्यक चेहरा। अनुभवी विधायक। मुख्यमंत्री के गृहनगर यानी कवर्धा से सर्वाधिक वोटों के अंतर से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया। इनकी दावेदारी भी मजबूत है।

कवासी लखमा (एसटी)

लखमा लगातार चौथी बार विधायक बनकर आए हैं। घोर नक्सल प्रभावित इलाके से आते हैं। सदन में आक्रामक नेता की छवि। वर्तमान में उपनेता प्रतिपक्ष।

अनिला भेड़िया (महिला कोटा और एसटी)

लगातार दूसरी बार जीतीं। आदिवासी समाज से आती हैं। मंत्री पद के लिए दावेदारी।



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