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विभागों के बंटवारे पर मख्यमंत्री भूपेश बघेल और सिंह देव के बीच मंथन, अभी भी संस्पेंस बरकरार, करना पड़ सकता है और इंतजार

रायपुर (एजेंसी) | भूपेश सरकार के मंत्रियों को विभागों के लिए अभी एक-दो दिन का इंतजार और करना पड़ सकता है। विभागों के बंटवारे को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव की लंबी चर्चा की। दोनों नेताओं का कहना है कि विभागों के लिए मंत्रियों को एक-दो दिन का और इंतजार करना पड़ेगा। रूठे विधायकों को मानाने के सवाल पर बघेल बोले, मंत्रिमंडल का फैसला वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद लिया गया, रूठों को मना लेंगे।

काफी चर्चा के बाद भी सस्पेंस बरकरार, लग सकता है एक-दो दिन और

दोनों के बीच मंत्रियों को दिए जाने वाले विभागों के बारे में काफी देर तक बात हुई, लेकिन किसे कौन सा विभाग दिया जाएगा, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। दोनों नेताओं ने कहा है कि विभागों के लिए मंत्रियों को एक-दो दिन का और इंतजार करना पड़ सकता है। 




मंगलवार को 9 नए मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने के बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि शाम को ही मंत्रियों को विभागों का बंटवारा कर दिया जाएगा, लेकिन शपथ ग्रहण के दो दिन बाद भी मंत्री बिना विभाग के चल रहे हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रियों को विभागों के बंटवारे के लिए एक-दो दिन का इंतजार करना पड़ सकता है। सिंहदेव ने भी यही बात कही।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा- नाराज विधायकों को मना लेंगे

मीडिया से चर्चा में  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि नाराज विधायकों को जल्द ही मना लेंगे। मंत्रिमंडल गठन का फैसला सभी बड़े नेताओं की सहमति से लिया गया है। इस पर यदि कोई नाराज है तो उनकी नाराजगी जल्द दूर कर ली जाएगी। नाराज विधायकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की बात भी कही गई है। इनके लिए बड़े बजट के निगम मंडलों की सूची बनाई जा रही है।

मंडल-आयोग में सेट करने पर भी विचार

इस बीच नाराज विधायकों को संतुष्ट करने के लिए कुछ विधायकों के निगम, मंडल और आयोग में सेट करने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन इस तरह की सुगबुगाहट से वे कार्यकर्ता और पदाधिकारी नाराज बताए जा रहे हैं जिन्हें टिकट नहीं मिली थी और जिन्हें सरकार बनने के बाद निगम, मंडल और आयोगों में पद देने की बात कही गई थी। नेताओं का कहना है कि विधायक भी वही रहेंगे और लाभ के दूसरे पदों पर भी वही बैठेंगे तो फिर कार्यकर्ता क्या करेंगे। इसे लेकर पार्टी के भीतर एक नई बहस भी छिड़ गई है।



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