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सीएम बघेल ने वीर सावरकर को बताया देश की विभाजन का सूत्रधार, रमन का पलटवार, ‘हार के बाद भूपेश सदमे में’

रायपुर (एजेंसी) | लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा में वाक्युद्ध छिड़ गया है। इस बार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर बड़ा हमला बोलते हुए संघ विचारक विनायक सावरकर को भारत विभाजन का सूत्रधार बताया है। बघेल ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश के विभाजन से जोड़कर विवाद पैदा करने की कोशिश की जाती है, लेकिन हकीकत ये है कि देश का विभाजन मोहम्मद अली जिन्ना ने कराया, जबकि विभाजन के सूत्रधार सावरकर थे।

वे पं. जवाहरलाल नेहरु की पुण्यतिथि पर सोमवार को राजीव भवन में आयोजित व्याख्यान माला में बोल रहे थे। बघेल ने कहा कि दो राष्ट्र का सिद्धांत पं. नेहरु या मोहम्मद जिन्ना का नहीं बल्कि सावरकर ने रखा था। उन्होंने कहा कि हिंदू महासभा में सावरकर ने प्रस्ताव रखा था कि देश दो राष्ट्र के रूप में आजाद हो। धार्मिक आधार पर उन्होंने दो राष्ट्र की मांग रखी और जिन्ना ने इसे लागू किया।

वीर सावरकर पर दिया बड़ा बयान 

ये वो ऐतिहासिक तथ्य है, जिसे कोई झुठला नहीं सकता। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई सावरकर लड़े ही नहीं। जब उन्हें अंडमान के जेल में रखा गया था तब उन्होंने एक नहीं, दस बार अंग्रेजों से माफी मांगी। उन्होंने जेल से छूटने के बाद कभी भी स्वतंत्रता आंदोलन में भाग नहीं लिया। बघेल ने कहा कि पंडित नेहरू की सोच, दूरदर्शिता, दर्शन काफी ज्यादा प्रभावशील थी। उनकी किताब भारत एक खोज काफी जानकारी उपलब्ध है।

बड़ी पराजय के बाद आदमी सदमे में रहता है – रमन सिंह

भाजपा की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मोर्चा संभाला। रमन ने कहा कि बघेल को इतिहास फिर से पढ़ने की जरूरत है। कम ज्ञान में ज्यादा बोलना ठीक बात नहीं है। बड़ी पराजय के बाद आदमी सदमे में रहता है और इसी तरह कुछ भी बोलते रहता है। सावरकर ने देश को नहीं बांटा। हर भारतीय को पता है कि देश का बंटवारा किसकी देन है। भारत विभाजन सहित कश्मीर जैसी जितनी भी समस्याएं आज देश में हैं, उन सबका जिम्मेदार कौन है।

भाजपा ने कभी भी किसी पर उंगली नहीं उठाई लेकिन जब हमारी विचारधारा के महापुरुषों पर राजनीतिक कारणों से निकृष्ट आरोप लगाए जाएंगे तो हम इतिहास याद दिला देने के लिए विवश हैं। रमन ने कहा कि कांग्रेस के लोग आजादी का श्रेय खुद के खाते में डालते हैं और यह बताते रहे हैं कि देश को कांग्रेस ने आजाद कराया। जबकि वास्तविकता यह नहीं है। 1857 में कौन सी कांग्रेस थी। अनगिनत राष्ट्र भक्तों ने बलिदान दिया। तब जा कर यह आजादी मिली।

अंग्रेज जब यह समझ गए कि भारत में उनके दिन पूरे हो गए हैं और अब उनका यहां टिक पाना संभव नहीं है इसलिए भारत छोड़ते-छोड़ते उन्होंने नेहरू की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का लाभ उठाया और भारत के दो टुकड़े करवा दिए। कांग्रेस को भारत विभाजन की जिम्मेदारी लेनी चाहिये, आजादी का श्रेय नहीं।

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