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विक्रम उसेंडी को बनाया गया भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को साधने की कवायद

रायपुर (एजेंसी) | भाजपा ने छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश भाजपा में बड़ा बदलाव किया है। अब बस्तर इलाके के आदिवासी नेता विक्रम उसेंडी को प्रदेश की कमान सौंपी गई है। उसेंडी के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से ये साफ़ है कि भाजपा आदिवासी मतदाताओं को लुभाने की कोशिश में है।

विक्रमउसेंडी अब नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे

फिलहाल उसेंडी कांकेर लोकसभा सीट से सांसद हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने शुक्रवार को ये अहम फैसला किया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धरम लाल कौशिक के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से पार्टी में अध्यक्ष के नए चेहरे की खोज चल रही थी। उसेंडी रमन सरकार में वन मंत्री रह चुके हैं। इन्होंने वर्ष 2018 में अंतागढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे हार गए थे। उससे पहले 2013 के विधानसभा चुनाव में उनकी टिकट काट दी गई थी।

विक्रम उसेंडी राजनीति में आने से पहले शिक्षण का काम करते थे। 1987 से 93 तक छह साल शिक्षक रहे उसेंडी अंतागढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। पहली बार वे 1993 में विधानसभा का चुनाव जीते थे। वे रमन सरकार में दो बार मंत्री रहे हैं। उसेंडी सरल स्वभाव के नेता माने जाते हैं। उसेंडी अब तक चार बार विधानसभा और एक बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं।

चौथे आदिवासी नेता प्रदेशाध्यक्ष बने

उसेंडी राज्य के चौथे आदिवासी नेता हैं जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इनसे पहले शिव प्रताप सिंह, विष्णुदेव साय और रामसेवक पैकरा को बनाया जा चुका है। उसेंडी बस्तर से पहले प्रदेश अध्यक्ष हैं।

दिल्ली में देर रात बैठक के बाद शाह ने लिया फैसला

विधानसभा में हार ठीकरा आदिवासी नेता रमन और कौशिक की जोड़ी पर फोड़ते हैं। पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने तो दिल्ली जाकर रामलाल और अन्य नेताओं से मिलकर इस मुद्दे को उठाया भी था। पर हाईकमान हार के तुरंत बाद बदलाव से बचना चाह रहा था। कौशिक भी राज्य में दूसरी बड़ी आबादी कुर्मी समाज से आते हैं। इसी समाज से भूपेश बघेल पहले पीसीसी चीफ और फिर सीएम बनाए गए ।

इसी रणनीति के तहत भारी विरोध के बावजूद कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनाकर प्रदेशाध्यक्ष की दोहरी जिम्मेदारी भी दी गई थी । इससे संगठन में नाराजगी और बढ़ गई। सूत्रों के अनुसार देर रात दिल्ली लौटने के बाद रामलाल और शाह ने राज्य की स्थिति की समीक्षा के बाद प्रदेशाध्यक्ष बदलने का फैसला किया।

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