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क्षेत्र और जातीय फार्मूले से बनी बघेल की टीम इलेवन, देखे कौन-कौन है टीम में; विभागों का बंटवारा आज-कल में

रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की नई सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आैर उनकी टीम के 11 मंत्रियों शपथ दिलाई जा चुकी हैं। हालांकि विभागों का बंटवारा अभी नहीं हुआ है, लेकिन मंत्री सक्रिय हो गए हैं। मंत्रिमंडल में नौ मंत्रियों की नियुक्ति के बाद से ही कांग्रेस के जाे वरिष्ठ विधायक नाराज चल रहे हैं, उनसे सीनियर नेता बात कर रहे हैं।

कांग्रेस सरकार ने जातिगत समीकरण को साधते हुए 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल में तीन आेबीसी, तीन सामान्य, तीन अनुसूचित जनजाति, दो अनुसूचित जाति और एक अल्पसंख्यक को जगह दी है। क्षेत्रीय समीकरण पर नजर डालें तो दुर्ग संभाग से सबसे ज्यादा छह लोगों को मंत्री बनाया गया है।




बिलासपुर संभाग से 2, सरगुजा से 2, बस्तर और रायपुर संभाग से सिर्फ 1-1 विधायक को मंत्री पद दिया गया। वहीं लोकसभा की दृष्टि से देखें तो बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और महासमुंद लोकसभा क्षेत्रों को पूरी तरह खाली छोड़ दिया गया है।

मंत्री बनाने के पीछे ये रहा मैकेनिज्म

1. रविन्द्र चौबे

 

  • स्नातक तक पढ़े हैं।
  • 1979-80 में एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष रहे।
  • दुर्ग जिला पंचायत के पहले अध्यक्ष रहे।
  • मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मंत्री रहे।

2. प्रेमसाय सिंह टेकाम

 

  • अविभाजित मध्यप्रदेश में मंत्री रह चुके हैं।
  • इन्हें सिंहदेव के नजदीकी होने का लाभ मिला।
  • भाजपा सरकार में गृहमंत्री रहे पैकरा को हराया।

3. मोहम्मद अकबर

 

  • जोगी सरकार में मंत्री रहे।
  • सबसे ज्यादा वाेटों से जीते।
  • राजनांदगांव लोकसभा का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  • तीसरी बार विधायक बने।

4. कवासी लखमा

 

  • अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन लगातार चार बार के विधायक।
  • विधानसभा में सवाल पूछने और उसके संबंध में अपनी बात रखने में महारत।

5. शिव डहरिया

 

  • तीसरी बार विधायक चुने गए।
  • अनुसूचित जाति वर्ग का बड़ा चेहरा।
  • भाजपा की उपेक्षा को कांग्रेस द्वारा भुनाने की कोशिश।

6. अनिला भेड़िया

 

  • आदिवासी वर्ग की महिला विधायक।
  • तीसरी बार विधायक बनीं।
  • इनके जरिए कांकेर लोकसभा काे मिलेगा प्रतिनिधित्व।

7. जयसिंह अग्रवाल

  • कोरबा में कांग्रेस का मजबूत आधार बने।
  • महंत के करीबी होने का फायदा मिला।
  • लोकसभा में लाभ मिलने की उम्मीद से मंत्रीपद दिया गया।

8. गुरु रुद्र कुमार

 

  • सतनामी समाज के गुरु।
  • समाज को साधने के लिए कांग्रेस का दांव।
  • भाजपा की तरह कांग्रेस ने सतनामी समाज के दो नेताओं को मंत्री बनाया गया।

9. उमेश पटेल

  • झीरम के शहीद नंदकुमार पटेल के बेटे।
  • युकां के अध्यक्ष रहे।
  • लगातार दूसरी बार विधायक बने।
  • हाईप्रोफाइल प्रत्याशी ओ.पी. चौधरी को हराया।

वरिष्ठ विधायक इसलिए छूट गए

वरिष्ठ विधायकों में सत्यनारायण शर्मा, धनेंद्र साहू, अमितेष शुक्ल, अरुण वोरा, मनोज मंडावी, लखेश्वर बघेल जैसे नेताओ को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। दरअसल, मंत्रिमंडल के गठन में जातिगत समीकरण का ख्याल रखने के कारण इन नेताओ को जगह नहीं मिल पाई। लेकिन अभी भी एक पद खाली छोड़ गया है। इसमें सामान्य, ओबीसी या एसटी समुदाय में से किसी भी वर्ग को मौका दिया जा सकता है। सरकार से जुड़े लोगों का कहना है कि जातिगत समीकरण के कारण ही इन नेताओ को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। इनमें दो ब्राह्मण, एक साहू और दो आदिवासी शामिल हैं।




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