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बसपा के बाद गोंगपा ने भी छोड़ा कांग्रेस के हाथ का साथ

रायपुर (एजेंसी)। गठबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पहले बसपा ने हाथ छोड़ा उसके बाद अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया है। उईके के कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस हाइकमान ने गोंगपा अध्यक्ष मरकाम को दिल्ली बुलाया था। मरकाम रविवार को दिल्ली पहुंच गए थे। उन्हें कांग्रेस का ऑफर मिला कि गठबंधन के लिए पांच सीट ही मिल सकती है। जबकि गोंगपा सुप्रीमो हीरासिंह मरकाम की मानें तो वे छत्तीसगढ़ में 11 सीटें मांग रहे थे।




उस पर मंथन करने के बाद राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। गोंगपा के महासचिव लाल बहादुर कोर्राम ने बताया कि मरकाम ने दिल्ली में ही दूसरे आदिवासी संगठनों से चर्चा की। उसके बाद यह तय किया कि कांग्रेस सम्मानजनक सीटें नहीं दे रही है। इस कारण राहुल से मिलने का औचित्य ही नहीं समझा। गोंगपा सुप्रीमो हीरासिंह मरकाम की मानें तो वे छत्तीसगढ़ में 11 सीटें मांग रहे थे, जबकि कांग्रेस उन्हें मात्र 5 सीटें देने को तैयार थी। इसमें भी 3 सीटें अघोषित तौर पर। इसलिए उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात करना भी उचित नहीं समझा।

ज्ञात है कि कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पाली-तानाखार के विधायक रामदयाल उईके ने कांग्रेस छोड़ा तो कांग्रेस और गोंगपा के बीच गठबंधन की चर्चा तेज हो गई। इसका एकमात्र कारण यह था कि उईके दोनों राजनीतिक दलों के गठबंधन में रोड़ा बने हुए थे। उईके पाली-तानाखार सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे और गोंगपा सुप्रीमो हीरासिंह मरकाम की पहली प्राथमिकता में पाली-तानाखार सीट ही थी।

इन 14 सीटों पर अच्छा था प्रदर्शन

2013 के विधानसभा चुनाव में गोंगपा 14 सीट भरतपुर सोनहत, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, भटगांव, प्रतापपुर, रामानुजगंज, अंबिकापुर, पाली-तानाखार, मरवाही, कोटा, सक्ती, लैलुंगा, पंडरिया और डोंगरगढ़ में तीसरे नम्बर पर थी। इसमें से सात सीटें ही ऐसी हैं, जहां मतदान प्रतिशत ठीक-ठाक था। पाली-तानाखार में 26.69, भरतपुर सोनहत में 15.82, बैकुंठपुर 15.52, भटगांव 5.18, कोटा 5.41 और सक्ती में 9.68 फीसद मतदान प्राप्त हुआ था।



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