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उइके के जाने के बाद कांग्रेस-गोंगपा गठबंधन का रास्ता साफ, बदल सकती है तानाखार सीट की रणनीति

बिलासपुर (एजेंसी) | 18 साल बाद ठीक उसी अंदाज में विधायक रामदयाल उइके का भाजपा प्रवेश हुआ, जैसे 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की मौजूदगी में कोटमी में वे कांग्रेस में आए थे। इस बार उइके की वापसी के लिए अमित शाह, डाॅ. रमन सिंह समेत 10 दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में बिलासपुर के होटल में देर रात तक मंथन चला। बृजमोहन अग्रवाल को रायपुर से बुलाया गया।




बता दें उइके ने 18 साल पहले जोगी के लिए मरवाही सीट छोड़ी थी। अब कहा जा रहा है कि उन्होंने पाली-तानाखार सीट बचाने के लिए भाजपा ज्वाइन की है। इधर उइके के जाने से कांग्रेस-गोंगपा के बीच गठबंधन की राह आसान हो गई है। गोंगपा से गठबंधन होने पर कांग्रेस को सोनहत, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, प्रेमनगर, प्रतापपुर, बिंद्रानवागढ़, कांकेर, सिहावा आदि सीटों पर फायदा हो सकता है। गोंगपा प्रमुख हीरासिंह मरकाम के मुताबिक 14 अक्टूबर को दिल्ली में आदिवासी समुदाय की बैठक के बाद ही कांग्रेस आलाकमान से चर्चा होगी।

ऐसे बदले समीकरण 

1. गोंगपा अध्यक्ष मरकाम पिछले तीन चुनावों से तानाखार सीट से दूसरे नंबर हैं। उइके की सहमति के अभाव में गोंगपा-कांग्रेस का गठबंधन असंभव था।

2. 17 मई 2018 को कोटमी में राहुल गांधी की मौजूदगी में गोंगपा व एकता परिषद के साथ गठबंधन की घोषणा हुई थी। तभी से उइके के सुर बदल गए थे। उइके को जोगी का सिपहसालार माना जाता है।

3. जोगी कांग्रेस बनी तो कांग्रेस ने उइके को जोड़े रखने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। जोगी ने उइके को तानाखार से उतारा था। लेकिन कांग्रेस इस बार उन्हें मरवाही से उतारने वाली थी, जो राजनीतिक दृष्टि से घाटे का सौदा होता।



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