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भाजपा पूर्व विधायक विजय अग्रवाल ने दिया इस्तीफा, रायगढ़ से निर्दलीय चुनाव लड़ने का किया ऐलान

रायगढ़ (एजेंसी) | एकता, अनुशासन और संगठन का पाठ पढ़ाने वाली पार्टी भाजपा को उस समय गहरा झटका लगा जब भाजपा के 4 दशक पुराने नेता पूर्व विधायक विजय अग्रवाल ने पार्टी से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। इससे पूरे पार्टी में खलबली मच गई है। आज विजय अग्रवाल ने अपने घर में पत्रकारवार्ता आयोजित करके निर्दलीय चुनाव लडऩे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से कल ही इस्तीफा दे दिया था और अब एक ही लक्ष्य लेकर चुनाव मैदान में उतर रहे हैं वह भी जीत का।




उनका कहना है कि अर्जुन की तरह चुनाव लड़ते हुए मैदान में उतर रहे हैं। साथ ही साथ उनके समर्थक पूरा साथ देंगे और भरोसा है कि उनकी जीत तय है। बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात को माना कि पार्टी हाईकमान ने उनकी उपेक्षा की है जिससे उनके साथ-साथ कार्यकर्ता भी बडी संख्या में आहत हुए है और अब उनके पास कोई रास्ता नही बचा है। इसलिए वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में रोशनलाल अग्रवाल के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर रहे हैं और किसी भी स्थिति में वे अपना फैसला नहीं बदलेंगे। विजय अग्रवाल ने बातचीत के दौरान पत्रकारों को बताया कि पहले की भाजपा और अब की भाजपा में काफी अंतर है, जिले में पार्टी को बचाने के लिए उन्होंने व उनके समर्थकों ने पूरी जिंदगी निकाल दी और अब उनके पास खोने के लिए कुछ नही है चूंकि जिस प्रकार पार्टी ने मनमाने ढंग से टिकट वितरण किया है उससे साफ लग गया है कि उनकी जरूरत पार्टी को नही है इसलिए वे अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

साथ ही साथ पहले ही उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया है। पूर्व विधायक विजय अग्रवाल का यह भी कहना है कि आज उनके साथ रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र के वे भाजपा कार्यकर्ता साथ देने के लिए तैयार है जो अपने प्रत्याशी की हार जीत तय करते हैं और इसलिए वे उनकी भावनाओं की कद्र करते हुए यह निर्णय ले रहे हैं। इस दौरान यहां सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक भी मौजूद थे।

यहां बताना जरूरी होगा कि विजय अग्रवाल ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ कर अपना राजनीतिक करियर की शुरुआत की है। अविभाजित मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ में वे भाजपा युवा मोर्चा को उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं जिस समय शिवराज सिंह चौहान प्रदेश अध्यक्ष थे। वहीं 1993 में उन्होंने कांग्रेस के के. के. गुप्ता खिलाफ पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था जिसे वे हार गये। उसके बाद पार्टी ने 1998 में रोशन को प्रत्याशी बनाया था जिसमें रोशनलाल अग्रवाल भी के.के. गुप्ता से लगभग ढ़ाई से तीन हजार मतों से पराजित हो गये थे। वहीं 2003 में विजय अग्रवाल को पार्टी ने पुनः प्रत्याशी बनाया जिसमें वे के.के. गुप्ता को पराजित कर रायगढ़ में पहली बार भाजापा का परचम लहराया। जिसके बाद 2008 में रायगढ़ विधानसभा औऱ सरिया का संविलियन हो गया था 2008 में विजय अग्रवाल तीसरी बार चुनाव लड़े जिसमें शक्राजीत नायक से पराजित हो गये। जिसके बाद 2013 में पार्टी ने रोशनलाल अग्रवाल को एक बार फिर से प्रत्याशी बनाया जिसमें वे लगभग 20000 से अधिक मतों से शक्राजीत नायक को पराजित कर दिया। अब 2018 में विजय अग्रवाल सहित अनेक दिग्गज टिकट के दौर में थे लेकिन पार्टी ने रोशन को फिर से मौका दे दिया है जिसको लेकर विजय अग्रवाल सहित उनके समर्थक काफी नाराज चल रहे थे। जिस दिन से टिकट की घोषणा हुई उसी दिन से बगावत के सुर चालू हो गय़ा था। लेकिन अब कि बार बगावत लगी मोह्ल्लों से हट चुनावी मैदान तक पहुंच गई है आज पूर्व विधायक विजय अग्रवाल ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है।

वहीं यहां यह बताना भी जरूरी होगा की 1993 तक विजय अग्रवाल और रोशन लाल अग्रवाल को लोग जय वीरू के नाम से जानते थे। उनकी दोस्ती की मिसाल देते थे। दोनों ने मिल कल छात्र जीवन से ही लोगों के हित में कार्य करना शुरू कर दिये थे। वहीं भाजपा को रायगढ़ में काफी आगे लेकर आये। 1993 के चुनाव के बाद दोनों के दोस्ती में में दरार पड़ने शुरू हो गये।

फिलहाल अब आगे कांग्रेस के टिकट घोषणा पर ही सारा खेल दामोदर है उसके बाद ही कयास लगाये जा सकते हैं किसे सिर पर होगा राज तिलक होगा।



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