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जोगी कांग्रेस के पांच नेताओं की होगी कांग्रेस में घर वापसी

रायपुर (एजेंसी) | जोगी कांग्रेस के पांच से ज्यादा नेता कांग्रेस में वापसी की तैयारी में लगे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि राहुल गांधी के 28 जनवरी को होने वाले छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान उनकी घर वापसी हो सकती है। इस संबंध में पार्टी के प्रदेश प्रभारी से उन नेताओं की बातचीत हो चुकी है। जो नेता घर वापसी के प्रयास में लगे हैं उनमें सियाराम कौशिक, चंद्रभान बारमते, चैतराम साहू , बृजेश साहू और संतोष कौशिक के नाम शामिल हैं।

भूतपूर्व विधायक सियाराम कौशिक समेत पांच नेताओं ने भी फिर कांग्रेस का दरवाजा खटखटाया है। शनिवार को सबसे पहले डॉ. द्विवेदी के त्यागपत्र की खबर आई। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष कौशिक ने कहा कि वे शिवनारायण से बात करेंगे। द्विवेदी पहले कांग्रेस में ही थे।




उधर, कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि पूर्व कांग्रेस नेता जो पार्टी छोड़कर भाजपा में चले गए थे उन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। त्यागपत्र में द्विवेदी ने कहा है कि रायपुर पश्चिम में रहता हूं, पर मूणत ने चुनाव में फोन तक नहीं किया। कार्यसमिति का सदस्य हूं, पर कार्यसमिति की बैठक में बुलाया तक नहीं जाता था। ना सरकार ही पूछती थी और ना ही संगठन में कोई सुनवाई होती थी।

मंत्री सोचते थे वे भगवान हो गए हैं: द्विवेदी

द्विवेदी ने कहा कि भाजपा में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और कार्यकर्ताओं पर हार ठीकरा फोड़ने वाले बयान से आहत होकर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ने इस्तीफा दिया है। सरकार का घमंड पार्टी को चुनाव में ले डूबा। भाजपा घमंड से चूर थी और मंत्री लगता था भगवान हो गये हैं, कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। मैं भाजपा बड़ी उम्मीद के साथ शामिल हुआ था। घमंड तो इतना था कि पूछिए मत। इन्हें लगता था कोई हरा नहीं सकता। 13 मंत्रियों ने मिलकर 15 सालों की सरकार को ध्वस्त किया। हार के लिए जिम्मेदार कार्यकर्ता नहीं ये पूरी सरकार है। कमाल की बात ये है कि लोकसभा में भी हारे हुए लोगों को प्रभारी बना दिया गया।

जोगी के साथ जाना राजनीतिक भूल: कौशिक 

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कट्टर समर्थक व बिल्हा से उनकी पार्टी के विधानसभा उम्मीदवार रहे सियाराम कौशिक ने कहा कि जोगी के साथ तीसरे मोर्चे में जाना उनकी राजनीतिक भूल थी। मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जब पार्टी एक नए विकल्प के रूप में सामने आई तो लगा कि छत्तीसगढ़वासियों की पार्टी है, लेकिन जोगी की गतिविधियों से यह सामने आ गया था कि वे भाजपा से मिले हैं। वे हाथी (बसपा) के लिए भी काम करते हैं। पार्टी के प्रत्याशी इसी वजह से हारे हैं।



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