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बसपा-जाेगी कांग्रेस में अब सीपीअाई भी आई साथ, 2 सीटों का होगा फायदा

रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 का पहला चरण के मतदान अगले महीने के 12 तारीख को होनी है। राजनैतिक पार्टियों में अभी भी जोड़ घटाव चल ही रहा है। कल नेता रामदयाल उइके कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। वही, छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जे) और बसपा के गठबंधन के बाद अब इसमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) भी शामिल हो गई। गठबंधन के बाद विधानसभा की दो सीटें सीपीआई को दी गई हैं। अब बस्तर की दंतेवाड़ा और कोंटा विधानसभा सीट से लेफ्ट गठबंधन से अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारेगी। दोनों ही सीटों पर सीपीअाई का दबदबा रहा है।

बस्तर, सरगुजा और भिलाई में होगा फायदा

बसपा और सीपीअाई के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से रविवार को जनता कांग्रेस सुप्रीमो अजीत जोगी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बसपा और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (छजकां) गठबंधन की लोकप्रियता को देखते हुए सीपीआई भी हमारे साथ शामिल हो रही है। उन्होंने कहा कि सीपीआई के शामिल होने से गठबंधन को मजबूती मिलेगी और बस्तर, सरगुजा व भिलाई में फायदा होगा।




संयुक्त रूप से लिए गए पार्टियों के इस निर्णय के बाद बसपा के खाते में 33 सीटें रह गई हैं। अजीत जोगी ने कहा कि गठबंधन का यह फैसला मायावती से चर्चा के बाद लिया गया है। इससे मजूदर और किसान वर्ग के बीच हमारी ताकत और बढ़ेगी। बता दें कि दोनों ही सीटों पर सीपीअाई का प्रभाव रहा है और छत्तीसगढ़ गठन से पहले और उसके कुछ समय बाद भी यह सीटें सीपीआई के खाते में थीं।

दंतेवाड़ा और कोंटा में सीपीआई की पकड़

बस्तर संभाग की दंतेवाड़ा और कोंटा सीटों पर सीपीआई की शुरू से ही बहुत मजबूत पकड़ रही है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय 1990 और 1993 के चुनावों में इन दोनों सीटों पर सीपीआई ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1998 के विधानसभा चुनावों में इन दोनों सीटों पर सीपीआई के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे।

छत्तीसगढ़ का निर्माण होने के बाद 2003 में हुए पहले विधानसभा चुनावों में भी इन दोनों सीटों पर सीपीआई दूसरे स्थान पर रही। 2008 के विधानसभा चुनावों में दंतेवाड़ा में सीपीआई के प्रत्याशी दूसरे और कोंटा में बहुत ही नजदीकी मुकाबले में 879 वोटों से कांग्रेस उम्मीदवार से हार मिली थी। 2013 के चुनावों में दोनों सीटों पर सीपीआई के प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे थे।

भाजपा सरकार की नीति और नियत दोनों जनविरोधी

गठबंधन के नेताओं ने राज्य की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उसकी नीति  और नियत दोनों ही जनविरोधी है। रमन सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जो मुख्यमंत्री पिछले 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने मजबूर अौर 50 फीसदी लोगों को गरीबी के दलदल से बाहर नहीं निकाल पाया उसे मुख्यमंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा होंगे अजीत जोगी

इस गठबंधन के बाद संयुक्त रूप से तीनों दलों ने कहा कि सीपीआई के शामिल होने से बस्तर सहित कई अन्य विधानसभाओं में मजबूत स्थिति होगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां मजदूर वर्ग की संख्या ज्यादा है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत जोगी बसपा-जेसीसीजे-सीपीआई महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री के प्रत्याशी होंगे।



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