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हार के बाद के बाद हुई प्रदेश पदाशिकारियो की बैठक, भाजपाई बोले, ‘कांग्रेसी घोषणा पत्र में दम हमें अपने कार्यकर्ताओं ने भी वोट नहीं दिए’

रायपुर (एजेंसी) | लोकसभा चुनाव 2019 मद्देनज़र एकात्म परिसर में बुधवार को भाजपा की तीन अहम बैठक हुईं। जिसमे कोर ग्रुप, प्रदेश पदाधिकारियों व भाजपा विधायक दल के सभी नेता शामिल हुए। इनमें नेताओं का दर्द छलका, उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस घोषणा पत्र भाजपा से बेहतर था। साथ ही भाजपा के कार्यकर्ता कांग्रेस की तुलना में दमखम से नहीं लड़े। यहां तक कि खुद भाजपाइयों के वोट भी पार्टी को नहीं मिले।

धरमलाल कौशिक, ‘कांग्रेस का घोषणा पत्र अधिक प्रभावी था’

भाजपा के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक बोले कि हमारे घोषणा पत्र से उनका घोषणा पत्र प्रभावी रहा। कर्जमाफी का वादा हम पर भारी पड़ा। विधानसभा चुनाव में हमारे कार्यकर्ता वो दम नहीं दिखा सके, जो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिखाया।




वही प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि हम अनुकूल माहौल नहीं बना सके। टिकट वितरण के वक्त ही यह संदेश गया कि सही नहीं बंटे। किसान मोर्चा अध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने कहा, ‘कई बूथ पर हमारे 15-20 कार्यकर्ता हैं। ऐसे बूथों पर हमें 2-3 वोट ही मिले। उनके परिवार के वोट भी कांग्रेस में गए।’ प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने- राजधानी में रहता हूं, पर मेरा कभी उपयोग नहीं हुआ। मैं महापौर चुनाव हारा। इसकी अब तक समीक्षा नहीं हुई। अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सलीम राज- मेरा दर्जा प्रदेश स्तरीय है। फिर भी मुझे कभी मंच पर नहीं बैठाया गया।

श्रीचंद सुंदरानी, ‘सरकार के शराब  जीएसटी से लोग नाराज’  

प्रदेश प्रवक्ता श्रीचंद सुंदरानी ने कहा कि भीतरघात का कोई असर नहीं, दरअसल हमें परंपरागत वोट नहीं मिले। हमेशा साथ रहने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों ने भी पार्टी का साथ छोड़ दिया। जीएसटी की नाराजगी वजह से छोटे व मध्यम व्यापारियों के परंपरागत वोट भी हमें नहीं मिले। पार्टी ने शराब नीति पर अच्छा काम किया, लेकिन उसे जनता तक पहुंचा नहीं सके। शराब के शौकीनों को यह लगा कि शराब तो सरकार बेच रही है और वह जबरदस्ती हमें एक ही ब्रांड की शराब पीने पर मजबूर कर रही है। कार्यकर्ताओं के मन भी नाराजगी थी, वे यह अहसास ही नहीं कर पाते थे कि राज्य में उनकी सरकार है। फाइनल वोटरलिस्ट से हर पन्ने से 10-15 नाम डिलीट मिले।




रमन सिंह, ‘मिलकर काम करे, हार से मायूस न होए।’

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह- कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव में काम करने के लिए धन्यवाद। नतीजे हमारे पक्ष में नहीं रहे। इसे भूलकर लोकसभा चुनाव जीतने की तैयारी में लग जाएं। मिलजुलकर काम करें। इससे सकारात्मक नतीजे आएंगे। हार को लेकर मायूस न हों। कार्यकर्ता थोड़े ढीले पड़ गए थे, पर अब उत्तरायण हो गया है मकर सक्रांति भी मन गई। अब कार्यकर्ता जोश से काम करेंगे। कल से नजारा बदलेगा।

…फिर भी बैठक में राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री सौदान सिंह बोले- जानता हूं कि आप मर्यादा से बंधे हैं।

हार के कारण सबके सामने कहना नहीं चाहेंगे। जो बताना चाहे अलग से भी बात कर सकता है। प्रभारियों से भी बात कर सकते हैं।

लोकसभा चुनाव के लिए बनाए 3 क्लस्टर

पार्टी ने प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में 11 लोकसभा सीटों के लिए 3 क्लस्टर बनाए हैं। बस्तर क्लस्टर (बस्तर-कांकेर) के केदार कश्यप, रायपुर क्लस्टर (रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, महासमुंद) के राजेश मूणत और बिलासपुर क्लस्टर (बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर चांपा, रायगढ़, सरगुजा) के अमर अग्रवाल लोकसभा क्लस्टर प्रभारी बनाए गए हैं।

-भूपेश बघेल, मुख्यमंत्री, ‘ठीकरा कार्यकर्ताओं पर फोड़ रहे हैं’

रमन अपनी गलती छुपा रहे हैं। 15 साल भ्रष्टाचार किया अब हार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर फो़ड़ रहे हैं। ये गलत है।

प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में लोकसभावार प्रभारी व संयोजक नियुक्त किए गए हैं जिसमें जांजगीर चांपा के प्रभारी गौरीशंकर अग्रवाल व संयोजक लीलाधर सुल्तानिया। रायगढ़ लोकसभा के प्रभारी भूपेन्द्र सवन्नी व संयोजक कृष्णकुमार राय और राजेश शर्मा। रायपुर लोकसभा प्रभारी अशोक शर्मा व संयोजक बृजमोहन अग्रवाल। राजनांदगांव लोकसभा प्रभारी राजेश मूणत व संयोजक मधुसुदन यादव। दुर्ग लोकसभा प्रभारी संतोष पांडेय व संयोजक प्रहलाद रजक। महासमुंद लोकसभा प्रभारी अशोक बजाज व संयोजक अजय चंद्राकर। कांकेर लोकसभा प्रभारी खूबचंद पारख, संयोजक व सांसद विक्रम उसेंडी। बस्तर लोकसभा प्रभारी सुनील सोनी व संयोजक केदार कश्यप। कोरबा लोकसभा प्रभारी शिवरतन शर्मा व संयोजक लखनलाल देवांगन। सरगुजा लोकसभा प्रभारी रामप्रताप सिंह व संयोजक भीमसेन अग्रवाल, सह-संयोजक अनुराग सिंहदेव। बिलासपुर लोकसभा प्रभारी नारायण चंदेल व संयोजक अमर अग्रवाल।



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