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भाजपा-कांग्रेस आमने सामने: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कसा तंज ‘अनुशासित पार्टी की कलई खुल गई है’, शिवरतन शर्मा की नसीहत, ‘अपना घर संभालें’

रायपुर (एजेंसी) | विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा और जोगी कांग्रेस में राजनीतिक उथल-पुथल मची है। भाजपा नेता- कार्यकर्ता तीखे बयानों के साथ संगठन पर हमला बोल रहे हैं तो शनिवार को प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य डॉ. शिव नारायण द्विवेदी ने भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बड़े नेताओं को कटघरे में खड़ा किया।

इसपर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपाइयों द्वारा अपनी पार्टी के नेताओं पर हमले करने पर तंज कसा कि अनुशासित पार्टी की कलई खुल गई है। जवाब में भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने भी बघेल को नसीहत दी कि वे अपना घर संभालें।




भाजपा की कलाई खुल गई है: भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व कृषिमंत्री चंद्रशेखर साहू के बयान के बाद भाजपा पर तंज कसा है। भूपेश ने मीडिया से कहा कि भाजपा बहुत अनुशासित पार्टी होने का दावा करती थी, लेकिन अब उसकी कलई खुल चुकी है। अब भाजपा की लड़ाई सामने आ चुकी है। पूर्व कृषिमंत्री साहू ने पार्टी की हार की वजह किसानों से वादाखिलाफी बताई है। उन्होंने कहा है कि अगर किसानों का पैसा मोबाइल में बांट दिया गया। उनके इस बयान के बाद भाजपा में बवंडर खड़ा हो गया था। इसे पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह के नेतृत्व पर सीधा हमला माना गया है। सिंह ने साहू के बयान पर कहा कि अब सभी के ज्ञानचक्षु खुलेंगे। भाजपा की इसी अंतर्कलह को लेकर मुख्यमंत्री ने हमला किया कि भाजपा ने किसानों के साथ छलावा किया है। उन्हें केवल ठगने का काम किया है। भूपेश ने कहा कि कांग्रेस के राज में पूरे प्रदेश में किसानों के चेहरों मुस्कान है, खुशी है।

भूपेश दूसरों के घरों पर पत्थर न उछालें: भाजपा

इधर, भाजपा ने भी ने मुख्यमंत्री पर पलटवार किया है। प्रवक्ता और विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि शीशे के घरों में रहने वाले दूसरों के घरों पर पत्थर न उछालें। भूपेश अपनी पार्टी की चिंता करें। अपने काम पर ध्यान दें। जिस कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र के नाम पर एक परिवार की चरण वंदना ही राजनीतिक चरित्र बन गई है, उस पार्टी के मुख्यमंत्री भाजपा को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाते शोभा नहीं देते। शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल पहले अपनी पार्टी में लोकतंत्र ढूंढें।

भाजपा कार्यकर्ताओं के मान-अपमान की चिंता का प्रपंच रचने के बजाय मुख्यमंत्री पहले खुद तो अपने कार्यकर्ताओं व विधायकों के मान-सम्मान की फिक्र कर लें जो पार्टी और उस पार्टी के मुख्यमंत्री अपने वरिष्ठ विधायकों सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ल और अरुण वोरा को हाशिए पर रखकर चल रहे हैं।

मुख्यमंत्री अपने वरिष्ठ व अनुभवी विधायकों को लोकसभा चुनाव लड़ाकर किनारे लगाने के फार्मूले की रणनीति बना रहे हैं। वे भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र को लेकर प्रलाप कर रहे हैं। एक आदिवासी विधायक अमरजीत भगत को लालीपॉप दिखाने वाले मुख्यमंत्री यह तो बताएं कि उनकी सरकार के मंत्री टीएस सिंहदेव के भगत को मंत्री बनाने के अनुमान को खारिज करके बघेल अपनी पार्टी के आदिवासी कार्यकर्ताओं का कैसा सम्मान कर रहे हैं?



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