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जाति विवाद: जांच समिति की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट का स्टे, अजीत जोगी विधायक रहेंगे

ajit jogi

बिलासपुर (एजेंसी) | हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति के मामले में उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति की रिपोर्ट पर यथास्थिति बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। जोगी की विधायकी फिलहाल बरकरार रहेगी। एफआईआर की प्रक्रिया पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। जोगी ने 23 अगस्त को उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति की रिपोर्ट और इस आधार पर उनके खिलाफ 29 अगस्त को बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। साथ ही दो आवेदन प्रस्तुत कर समिति की रिपोर्ट और एफआईआर पर अंतरिम रूप से रोक लगाने की मांग की है।

बिलासपुर के संतकुमार ने की थी शिकायत

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति को लेकर विवाद का सिलसिला 27 जनवरी 2001 में बिलासपुर में रहने वाले संतकुमार नेताम की राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग से शिकायत के साथ शुरू हुआ था। आयोग ने 16 अक्टूबर 2001 में जोगी को आदिवासी नहीं मानते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, जोगी ने 22 अक्टूबर 2001 को आयोग के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने आयोग के आदेश पर इसी दिन रोक लगा दी थी।

जांच के लिए बनाई गई थी समिति

मामले में हाईकोर्ट ने 15 नवंबर 2006 को दिए गए फैसले में यह कहते हुए आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया था कि आयोग को जाति निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। नेताम ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में छत्तीसगढ़ सरकार को उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति गठित कर जाति की जांच करने के लिए कहा था।आईएएस मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में समिति बनाई गई। समिति ने विजिलेंस की जांच के बाद रिपोर्ट सौंपी, लेकिन बाद में तत्कालीन भाजपा सरकार ने विजिलेंस की रिपोर्ट को यह कहते हुए वापस ले लिया था कि नए सिरे से समिति बनाकर जांच की जाएगी। इसके बाद आईएएस रीना बाबा कंगाले की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय छानबीन समिति का गठन किया था।

रिपोर्ट के आधार पर जोगी का जाति प्रमाणपत्र निरस्त

समिति की रिपोर्ट के आधार पर बिलासपुर के कलेक्टर ने 2017 में जोगी का आदिवासी जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ जोगी ने हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर जांच को लेकर राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित नहीं होने, अध्यक्ष द्वारा ही समिति के कई सदस्यों की जिम्मेदारी का निर्वहन करने को गलत बताया था। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 30 जनवरी 2018 को दिए गए फैसले में रीना बाबा कंगाले कमेटी द्वारा 17 मार्च 2017 के बाद की गई कार्रवाई को निरस्त कर दिया था और राज्य सरकार को नई उच्च स्तरीय छानबीन समिति बनाने के निर्देश दिए थे।

नई समिति ने जोगी काे नहीं माना आदिवासी

इसके बाद आदिवासी विकास विभाग के सचिव डीडी सिंह की अध्यक्षता में समिति बनाई गई। समिति ने 23 अगस्त आदेश जारी किया है, इसमें जोगी को आदिवासी नहीं माना गया है। जोगी ने इसके खिलाफ फिर से याचिका प्रस्तुत की है। साथ ही दो आवेदन प्रस्तुत कर समिति की रिपोर्ट और एफआईआर पर रोक लगाने की मांग की गई है। बुधवार को जस्टिस पी सैम कोशी की बेंच में इस पर सुनवाई हुई। इस दौरान उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद, राज्य शासन की तरफ से महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा और जोगी की तरफ से एडवोकेट सुदीप त्यागी नेे पैरवी की।

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