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रायपुर : अब एनिमेशन के जरिए भी बच्चे करेंगे पढ़ाई, डिजिटल शिक्षण प्रणाली लागु करने की योजना

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रायपुर। राज्य के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शालाओं के बच्चों के एनिमेशन के प्रति रूचि को देखते हुए अब उन्हें इसी पैटर्न पर पढ़ने नई तकनीक का इस्तमाल किया जा रहा है। जटिल टॉपिक को रूचिकर बनाने के लिए जिज्ञासा परियोजना अंतर्गत कम्प्यूटर और मोबाइल के माध्यम से एनिमेशन द्वारा कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को शिक्षा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। जिज्ञासा परियोजना के तहत चिन्हांकित स्कूलों में मनोरंजन के साथ-साथ पढ़ाई के लिए पाठ्यक्रम पर केन्द्रित अलग-अलग गेम बनाए गए हैं, जो एनिमेशन आधारित हैं।

जिज्ञासा परियोजना में राज्य के 200 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों का चिन्हांकन किया गया है। इस परियोजना के तहत चयनित किए गए स्कूलों के बच्चों को एनिमेशन के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। खेल-खेल में बच्चों को गतिविधियां सिखाई जाएगी। डिजिटल पैटर्न पर तैयार किए गए खेल ग्रामीण परिवेश में हैं, बच्चे टाईपिंग करना और माउस चलाना सिखेंगे। उद्देश्य है कि बच्चे कम्प्यूटर फ्रैैण्डली बने। जिज्ञासा परियोजना अंतर्गत रायपुर जिले के 90 स्कूलों के 140 प्रधानपाठक और संकुल समन्वयकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में डिजिटल माध्यम से शिक्षण के विधिओं को बताया और समझाया गया।

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि जिज्ञासा परियोजना के तहत जिला रायपुर में 90, दुर्ग में 100 और राजनांदगांव में 10 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक चयनित की गई है। कक्षा पहली से आठवीं तक प्रारंभिक स्कूली शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए यह परियोजना संचालित की जा रही है। परियोजना के माध्यम से डिजिटल शिक्षण विधियां बतायी जाएगी। वोडाफोन-आडिया के कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत संस्था आईपीई ग्लाबल सेंटर फॉर नॉलेज एडं डेव्हलपमेंट द्वारा यह कार्यक्रम तैयार किया गया है। शिक्षकों की शिक्षण विधि और कौशल में डिजिटल माध्यम में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर गुणात्मक सुधार लाना इसका मुख्य उद्देश्य है।

परियोजना के तहत शिक्षकों और विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता विकास के माध्यम से स्कूलों में शिक्षण प्रक्रिया में सुधार लाना, एक मेंटरशिप मॉडल के माध्यम से मजबूत राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रम विकसित करना है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों की क्षमताओं को समृद्ध करना उनका मुख्य उद्देश्य है।

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