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आखिरकार तीन तलाक बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास, अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बनेगा

नई दिल्ली (एजेंसी) | लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल मंगलवार को पास हो गया। राज्यसभा में बिल पर करीब 4 घंटे बहस हुई। इस बार यह बिल 25 जुलाई को लोकसभा से पास हुआ और 5 दिन बाद ही राज्यसभा में वोटिंग हुई। इसके पहले बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजने का प्रस्ताव भी 84 के मुकाबले 100 वोटों से गिर गया। इस बिल के बनने से अब तीन तलाक गैर-कानूनी होगा और दोषी को 3 साल की सजा होगी। साथ ही पीड़ित महिलाएं अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा-भत्ता मांग सकेंगी।

अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह बिल दो बार लोकसभा से पास हो चुका था, लेकिन राज्यसभा में अटक गया

अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक को असंवैधानिक और गैर-कानूनी करार दिया था। इसके बाद 2 साल में यह बिल 2 बार लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में अटक गया। आम चुनाव के बाद तीसरी बार यह विधेयक 25 जुलाई को लोकसभा से पारित हुआ। 5 दिन बाद ही यह राज्यसभा से भी पास हो गया। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। तीन तलाक देने के दोषी पुरुष को 3 साल की सजा सुनाई जाएगी। पीड़ित महिलाएं अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारे-भत्ते की मांग कर सकेंगी।

3 साल की सजा को कांग्रेस का विरोध 

बिल में 3 साल की सजा के प्रावधान का कांग्रेस ने विरोध किया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 3 साल की सजा का प्रावधान ठीक उसी तरह है, जैसे किसी को अपमानित करने या धमकाने के जुर्म में जेल भेज दिया जाए। इसलिए हम इस बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजना चाहते थे।

कानून मंत्री ने कहा- सजा के प्रावधान में कुछ गलत नहीं

विपक्ष की इस आपत्ति पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दहेज विरोधी कानून और बहुविवाह रोकने से जुड़े कानून में भी दोषी हिंदू पुरुष को जेल भेजने का प्रावधान है, लिहाजा तीन तलाक के दोषी पुरुष को सजा के प्रावधान में कुछ गलत नहीं है। उन्होंने कहा- यह (तीन तलाक बिल) लैंगिक समानता और महिलाओं के सम्मान का मामला है। तीन तलाक कहकर बेटियों को छोड़ दिया जाता है, इसे सही नहीं कहा जा सकता।’’

यह विधेयक 25 जुलाई को लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है। लोकसभा में बिल के पक्ष में 303 और विरोध में 82 मत पड़े थे। तब कांग्रेस, तृणमूल, सपा और डीएमके समेत अन्य पार्टियों ने बिल का विरोध करते हुए वोटिंग से पहले सदन से वॉकआउट किया था।

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