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गंगा की सफाई के लिए 111 दिन से अनशन पर बैठे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल का निधन

आखिरी तस्वीर: बुधवार को अस्पताल जाते हुए। हरिद्वार पुलिस ने बुधवार दोपहर को प्रो. जीडी अग्रवाल को मातृ सदन से जबरन उठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती करवाया था। फोटो तभी की है।

हरिद्वार (एजेंसी) | गंगा की सफाई के मुद्दे पर 22 जून से अनशन पर बैठे पर्यावरणविद प्रो. जीडी अग्रवाल का गुरुवार दोपहर निधन हो गया। 86 साल के प्रो. अग्रवाल 111 दिन से अनशन पर थे। पुलिस ने बुधवार दोपहर उन्हें जबरदस्ती एम्स ऋषिकेश में भर्ती करवा दिया था। प्रो. अग्रवाल ने गुरुवार सुबह 6.45 बजे हाथ से प्रेस नोट लिखकर बताया कि उनकी इजाजत से डॉक्टरों ने उन्हें मुंह और आईवी के जरिये पोटाशियम की खुराक दी है। हालांकि, दोपहर करीब 2.00 बजे हरिद्वार से दिल्ली लेकर जाते समय उनका निधन हो गया।




इस बीच मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद सरस्वती ने प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत को सरकार के इशारे पर की गई हत्या बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरिद्वार प्रशासन, एम्स और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हत्या के जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि मां गंगा ने उन्हें क्या इसीलिए बुलाया था कि वे गंगा भक्तों का बलिदान लेते रहें। गंगा के मुद्दे पर 2011 में 115 दिन के अनशन के बाद स्वामी निगमानंद भी दम तोड़ चुके थे।

अविरल प्रवाह की अधिसूचना के अगले ही दिन हुआ निधन


आखिरी चिट्‌ठी: गुरुवार सुबह हाथ से प्रेस रिलीज लिखा -प्रो. जीडी अग्रवाल (आखिरी चिट्‌ठी में)

प्रो. अग्रवाल की मांग थी कि गंगा में अवैध खनन और बांधों जैसे बड़े निर्माण रोके जाएं। साथ ही नदी की धारा अविरल रखी जाए। फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गंगा के लिए अलग से कानून बनाने की मांग की। जवाब नहीं मिलने पर 22 जून को अनशन पर बैठ गए। दो केंद्रीय मंत्रियों उमा भारती और नितिन गडकरी उनसे अनशन तोड़ने की अपील करते रहे। गंगा की धारा अविरल रखने के लिए सरकार ने बुधवार को अधिसूचना जारी भी कर दी, लेकिन गुरुवार को उनका निधन हो गया।

अमेरिका में पीएचडी की, 2011 में संन्यास ले लिया

20 जुलाई 1932 को यूपी के मुजफ्फरनगर के कंधाला गांव में किसान परिवार में जन्मे प्रो. अग्रवाल सिविल यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की (अब आईआईटी रुड़की) में इंजीनियरिंग की। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग में पीएचडी की। आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर रहे। 2011 में संन्यास ले लिया।

करीब महीनेभर पहले ही कह दिया था- नवरात्र में पानी भी छोड़ दूंगा, उसके बाद प्राण भी त्याग दूंगा

प्रो. जीडी अग्रवाल ने पिछले माह ही मृत्यु का समय बता दिया था। कहा था नवरात्र में प्राण त्याग दूंगा। जहां वे अनशन पर बैठे थे, वह जगह 2011 में गंगाजी के लिए प्राण त्यागने वाले स्वामी निगमानंद की समाधि से महज 50 मीटर दूरी पर थी। जीडी अग्रवाल ने नवरात्र (10 अक्टूबर) से जल छोड़ने की घोषणा की थी। बुधवार से पानी नहीं ले रहे थे। अनशन में भी वे रोज सुबह साढ़े 5 बजे उठ जाते। साढ़े 7 बजे 2 गिलास पानी, नींबू, शहद और नमक मिलाकर पीते। 9 बजे से अखबार पढ़ना शुरू करते। दोपहर 1 बजे के अासपास दो गिलास पानी पीते। शाम साढ़े 6 बजे गंगा आरती में शामिल होते थे। रात साढ़े 8 बजे नींबू पानी लेते और साढ़े 9 बजे सोने चले जाते थे।



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