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सारंगढ़ में ‌24 लाख का टाॅयलेट घोटाला, जांच टीम 10 दिनों के भीतर देगी रिपोर्ट

रायगढ़ (एजेंसी) | स्वच्छ भारत अभियान के तहत घर-घर हुए शौचालय निर्माण में धीरे-धीरे गड़बड़ी सामने आ रही है। सबसे पहले रायगढ़ के गेरवानी में लाखों रुपए की गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद पुसौर के तड़ोला में अब सारंगढ़ के हिर्री पंचायत में 24 लाख के शौचालय घोटाले का मामला सामने आया है। जिला पंचायत सीईओ सारंगढ़ ने जांच के आदेश दिए है। जांच टीम को 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है।




400 की जगह 150 टायलेट ही बने

ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ शिकायत करते हुए बताया कि गांव में 400 की जगह 150 टायलेट ही बने थे, लेकिन सरपंच ने ओडीएफ घोषित करा दिया। जिन ग्रामीणों ने स्वयं के व्यय से शौचालय बनवाए उन्हें एक साल बाद भी प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। सरपंच सचिव पर ग्रामीणों ने कमीशनखोरी करते हुए 24 लाख रुपए की गड़बड़ी को अंजाम देने का आरोप लगाकर शिकायत की है। इसके बाद सीईओ ने जांच के आदेश दे दिए हैं। चार दिन पहले ही पुसौर ब्लॉक के तड़ोला में भी ऐसी ही कुछ भ्रष्टाचार सामने आया है।

दरअसल मनरेगा के तहत टाॅयलेट निर्माण को स्वीकृति मिली थी। गांव में कुल 397 शौचालय बनाए जाने थे। इसमें हितग्राहियों को स्वयं के व्यय से निर्माण करने के बाद भुगतान करना था, लेकिन यहां पर एक एजेंसी के जरिए टाॅयलेट का निर्माण कराया गया। गांव में सभी हितग्राहियों के नाम पर पेमेंट हो गया, लेकिन 131 टायलेट बन ही नहीं सके।

गेरवानी में अब तक भुगतान नहीं ​​​​​​​

लैलूंगा विधायक व संसदीय सचिव सुनीति सत्यानंद राठिया के गोद ग्राम गेरवानी में ओडीएफ घोटाला सामने आया था। जब ग्रामीणों को स्काई योजना के तहत मोबाइल बांटने पूर्व मंत्री पहुंचे तो ग्रामीणों ने लेने से ही इनकार कर दिया और जमकर बवाल मचाया था। इसके बाद जपं सीईओ रायगढ़ आशीष देवांगन ने 12 सदस्यीय अफसरों की जांच टीम बनाई थी। जांच में टाॅयलेट निर्माण में जमकर गड़बड़ी सामने आई। मगर अब तक न तो कार्रवाई हुई न ही स्वयं से टाॅयलेट निर्माण करने वाले ग्रामीणों को भुगतान हुआ।



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