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कांग्रेस ने पूर्व भाजपा सरकार की एक और योजना बंद की, मीसाबंदियों को मिल रही पेंशन फ़रवरी से होगी बंद

रायपुर (एजेंसी) | मध्यप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी मीसाबंदियों की पेंशन फरवरी से बंद करने का फैसला किया है। राज्य में करीब सवा तीन सौ मीसाबंदी हैं। इन्हें हर महीने 25,15 और 10 हजार रुपए पेंशन मिल रहा था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि मीसाबंदी कोई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं है कि पेंशन दिया जाए।

जीएडी सचिव डॉ. रीता शांडिल्य की ओर से सभी कलेक्टरों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मीसाबंदियों का भौतिक सत्यापन कराया जाना आवश्यक है। इसके लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके बाद ही बतौर पेंशन सम्मान निधि की राशि दी जाएगी।




राज्य में करीब 325 मीसाबंदी हैं। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने सरकार के इस फैसले पर कहा कि वास्तव में सत्यापन की मंशा है तो पेंशन बंद किए बिना के भी सत्यापन किया जा सकता है। लेकिन बंद ही करने का इरादा है तो कुछ नहीं कहा जा सकता।

उपासने ने कहा कि पहले सरकार ने सत्यापन के बाद ही पेंशन शुरू किया था। उन्होंने कहा कि सभी बंदी और उनकी बूढ़ी विधवाओं का ख्याल रख सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।

कौन हैं मीसाबंदी 

साल 1977 में आपातकाल के विरोध करने वालों को जेल भेजा गया था। ऐसा कहा जाता है कि इनमें अधिकांश संघ और जनसंघ के कार्यकर्ता रहे हैं। 2008 से एमपी और सीजी की भाजपा सरकारों ने इन्हें तीन केटेगरी में बांटकर मीसा बंदी सम्मान निधि के रुप में हर माह 3- 6 हजार रुपए तक पेंशन देना शुरू किया। विधवाओं को आधी राशि दी जाती रही। अब यह राशि बढ़कर 25,15 और 10 हजार रुपए कर दी गई है।



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