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चरणपादुका वितरण भ्रष्टाचार: तेंदूपत्ता संग्राहकों को अब चरणपादुका नहीं पैसे मिलेंगे

रायपुर (एजेंसी) | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई वाली नई सरकार ने योजनाओं के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए कार्यवाई शुरू कर दी। नान घोटाले और वन विभाग के वृक्षारोपण योजना में घोटाले सामने आने के बाद अब पूर्व रमन सरकार की चरणपादुका योजना का भूपेश सरकार ने रिव्यु किया है। प्रांरभिक जाँच में भ्रष्टाचार के मामले खुलासा हो रहा है।

जिसके बाद राज्य के साढ़े 12 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक अब चरणपादुका के बजाए पैसे दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्ववर्ती सरकार की चरणपादुका वितरण योजना को तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। वन विभाग की योजनाओं की रिव्यू बैठक में उन्होंने यह आदेश दिया।




बता दें कि भाजपा सरकार बीते 10-12 वर्षों से प्रदेश के 12 लाख से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को हर साल चरण पादुकाएं दी जा रही हैं। इनका वितरण संग्राहकों को दिए जाने वाले पत्ता बोनस के साथ किया जाता है।

जिस पर सालाना करीब 18-20 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। एक दशक से अधिक समय में करीब 175 से 200 करोड़ खर्च हुए हैं। इन चरणपादुकाओं की खरीदी, गुणवत्ता को लेकर भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि विभाग एक जोड़ी पादुका बाजार की कीमत से 50-60 रुपए अधिक में खरीदता था।



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