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स्काई मोबाइल योजना: भूपेश बघेल की नई सरकार करेगी स्काई योजना का पुनर्मूल्यांकन, फिर तय होगा, फोन बंटेंगे या बंद होगी योजना

रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने चौथी पारी के लिए स्मार्टफोन का जो ड्रीम प्रोजेक्ट लांच किया था, उसकी कांग्रेस के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नई सरकार पहले जांच कराएगी। सरकार एग्रीमेंट की शर्तों, मोबाइल की क्वालिटी और कीमत सबका रिव्यू यानि पुनर्मूल्यांकन करेगी। उसके बाद ही तय हो पाएगा  कि स्मार्टफोन बांटे जाएंगे या योजना ही बंद कर दी जाएगी।

मंत्रिमंडल के गठन के बाद योजना का रिव्यू किया जाएगा। यही नहीं, टिफिन योजना भी बंद की जा सकती है। गौरतलब है कि पहले चरण में 30 लाख फोन बांटे गए थे, जिसमे से पांच लाख अभी वेयर हाउस में रखा हुआ है। जबकि दूसरे चरण के लिए फिलहाल वर्कऑर्डर ही जारी नहीं किया गया है। अब नई सरकार इसका रिव्यु करने के बाद ही निर्णय करेगी।

50 लाख मोबाइल बांटने की योजना में खर्च होने थे लगभग 14 सौ करोड़

स्काई योजना के अंतर्गत महिलाओं और स्टूडेंट्स को 50 लाख मोबाइल बांटने थे। यह योजना पहले से ही कांग्रेस के निशाने पर थी। कांग्रेस ने मोबाइल चार्ज करते समय गर्म होने और बैटरी फटने की घटनाओं को लेकर क्वालिटी पर सवाल खड़े किए थे। इससे पहले टॉवर लगाने के लिए पंचायतों की राशि लेने का भी विरोध किया था।




इसके पहले कांग्रेस अब विपक्ष में थी तब भी उन्होंने स्काई योजना पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हालांकि तत्कालीन भाजपा सरकार का दावा था कि स्काई योजना के तहत 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। संचार क्रांति के क्षेत्र में यह क्रांति साबित होगी। चुनाव से पहले सरकार ने करीब तीस लाख मोबाइल बांट दिए। आचार संहिता लगने के बाद करीब पांच लाख मोबाइल बच गए थे, जिन्हें वेयर हाउस में रखा गया है। इस योजना के भविष्य को लेकर अब सवाल खड़े हाे रहे हैं।

हर 5 गांव में 2 युवाओं को रोजगार  का दावा था

स्काई योजना के तहत बनाए गए प्रोजेक्ट के तहत लगभग 10 हजार युवाओं को रोजगार देने का फॉर्मूला तैयार किया था। इसमें 5 गांव के बीच 2 युवा को रोजगार मिलने का दावा किया गया था। 20 हजार गांवों के बीच लगभग 4 हजार मोबाइल एसेसरीज की दुकान और लगभग 5 हजार रिपेयर शॉप खोलना था।

फैक्ट फाइल

50.15 लाख कुल मोबाइल बांटे जाने थे।
35 लाख पहले चरण में बांटे गए।
30 लाख आचार संहिता से पहले बंटे।

मोबाइल लागत

673.16 करोड़ रु. केटेगरी-1 के मोबाइल पर खर्च
166.25 करोड़ रु. केटेगरी-2 के मोबाइल पर खर्च
2509.92 रु. प्रति यूनिट केटेगरी-1 की कीमत
4142.88 रु. प्रति यूनिट केटेगरी-2 की कीमत

इस पर टीएस सिंहदेव, कैबिनेट मंत्री ने कहा, “पहले एग्रीमेंट की शर्तों का रिव्यू करेंगे। किन शर्तों पर योजना लाई गई थी। चार्ज करते समय मोबाइल गर्म होने और फटने की शिकायतें थीं। इसका रिव्यू करने के बाद ही बांटने या न बांटने का फैसला करेंगे।”

एलेक्स पॉल मेनन, सीईओ चिप्स ने कहा कि पहले चरण में 35 लाख मोबाइल बांटे जाने थे, चुनाव आचार संहिता लगने तक 30 लाख मोबाइल बांटे गए थे। आगे मोबाइल बांटा जाना है या नहीं, इस पर तो नई सरकार को ही निर्णय लेना है।



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