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राजिम अर्ध कुंभ नहीं, अब लगेगा राजिम पुन्नी मेला, दूसरे राज्यों के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी नाम पर राजनीति

दुर्ग (एजेंसी) | राजिम महाकुंभ का नाम अब राजिम पुन्नी मेला होगा। साथ ही राज्योत्सव में स्थानीय कलाकारों को ही मौका मिलेगा। यह जानकारी गुरुवार को पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के आग्रह पर दी। उन्होंने कहा सीएम बघेल के निर्देश पर ये फैसला किया गया है।




सीएम बघेल व मंत्री साहू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती दुर्ग के आदर्श नगर में धार्मिक आयोजन में पहुंचे थे। उनसे मुलाकात के बाद शंकराचार्य के आग्रह पर मंच से पर्यटन मंत्री ने राजिम अर्ध कुंभ का नाम बदलने की घोषणा की। इस दौरान जगतगुरू शंकराचार्य ने हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा पर बरसे। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे पर कोई पार्टी जानता का विश्वास जीतती है। उसे हर हाल में पूरा करना चाहिए।

इस दौरान मंत्री साहू ने कहा कि राजिम में जबसे मंदिर बना है, तबसे मेला लग रहा है और उसका नाम पुन्नी मेला है। लेकिन पहले की सरकार ने इसे कुंभ का नाम दिया। जबकि हमारे शास्त्रों में केवल महाकुंभ का जिक्र है। उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के संस्कृति के हिसाब से सारे कार्यक्रम और धार्मिकता के आयोजन होगा। साथ ही छत्तीसगढ़ के तीर्थ और पर्यटन स्थल का विकास किया जाएगा। सब जगह मेला महोत्सव किया जाएगा, ताकि लोगों को हमारी सांस्कृतिक पूंजी एवं छत्तीसगढ़ की तीर्थ स्थल के बारे में जानकारी होगी।

विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर राजिम कुंभ का नाम रखा गया, बदलने के लिए प्रस्ताव लाना होगा। पुन्नी मेला तो प्रदेश में कई जगह लगता है। राजिम को मिली एक नई पहचान को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। -शिवरतन शर्मा, भाजपा प्रवक्ता



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