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अडानी ग्रुप की 74 फीसदी हिस्सेदारी के साथ राजस्थान सरकार ने सरगुजा का कोल ब्लॉक सौंपा

रायपुर/बिलासपुर (एजेंसी) | सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2014 में 214 कोल ब्लॉक का आवंटन निरस्त कर दिया था, इसमें सरगुजा के उदयपुर विकासखंड के परसा ईस्ट केतेबसान क्षेत्र का कोल ब्लॉक भी शामिल था। इधर, सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर आरोप लगाया गया है कि 2015 में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित कोल ब्लॉक से ज्वाइंट वेंचर के जरिए अडानी इंटरप्राइजेस लि. को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

इस संबंध में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और परसा ईस्ट एंड केतेबसान कॉलरीज लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी। याचिका छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निवासी सुदीप श्रीवास्तव ने एडवोकेट प्रणव सचदेवा के जरिये सुप्रीम कोर्ट में पेश की।

दूसरी ओर, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के कार्यवाहक सीएमडी ने तो सुप्रीम कोर्ट के नोटिस की जानकारी होने से इनकार किया, लेकिन डायरेक्टर ने यह तो माना कि ज्वाइंट वेंचर किया गया है, लेकिन साथ में यह भी कहा कि माइन्स या माइनिंग को सबलेट नहीं किया गया है।

आरोप है…कोल माइंस स्पेशल प्रोवीजंस एक्ट लागू होने के बाद किया एग्रीमेंट, अडानी ग्रुप की 74 फीसदी हिस्सेदारी

बिलासपुर में निवासी सुदीप श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की है। मंगलवार को याचिका में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने पक्ष रखते हुए बताया है कि सरगुजा के उदयपुर ब्लॉक स्थित परसा ईस्ट एंड केतेबसान क्षेत्र में 2007 में कोल ब्लॉक का आवंटन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2014 में देशभर के 214 कोल ब्लॉक का आवंटन निरस्त कर दिया था, इसमें यह ब्लॉक भी शामिल था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा था कि माइनिंग राइट्स किसी प्राइवेट कंपनी को ट्रांसफर करने के लिए बनाई गई ज्वाइंट वेंचर कंपनी कोल माइनिंग नेशनलाइजेशन ऐक्ट 1973 के तहत गैरकानूनी होगी। केंद्र ने 31 मार्च 2015 को कोल माइंस स्पेशल प्रोवीजंस एक्ट लागू किया।




नया एक्ट लागू होने के बाद इसके बाद इस ब्लॉक का आवंटन फिर से सरकारी क्षेत्र की कंपनी राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को किया गया। आवंटन के बाद राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने खुद को आवंटित कोल ब्लॉक से कोयला खरीदने के लिए ज्वाइंट वेंचर कंपनी परसा ईस्ट केतेबसान कॉलरीज लिमिटेड से एग्रीमेंट किया। इस ज्वाइंट वेंचर कंपनी में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की 26 फीसदी और अडानी इंटरप्राइजेस लिमिटेड की 74 फीसदी भागीदारी है। राजस्थान सरकार ज्वाइंट वेंचर कंपनी से कोल इंडिया द्वारा अधिसूचित दर से अधिक कीमत पर कोयला खरीद रही है।

यह भी आरोप लगाया गया है कि रिजेक्ट प्रोडक्शन के नाम पर 29 फीसदी से अधिक कोयला पीकेसीएल को दिया जा रहा है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस एके सीकरी की बेंच ने केंद्र सरकार, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और परसा ईस्ट एंड केतेबसान कॉलरीज लिमिटेड को नोटिस जारी किया है।

इस कोल ब्लाक में अडानी की 74 फीसदी और राजस्थान विद्युत कंपनी की 26 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके चलते ऐसी स्थिति आ गई है कि राजस्थान विद्युत कंपनी अपने ही कोल ब्लाक से कोयला अडानी से खरीद रही है। याचिका पर जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस एके सीकरी की बेंच ने सुनवाई की और नोटिस जारी किया।

2007 में राजस्थान राज्य बिजली उत्पादन निगम को आवंटित हुआ ब्लॉक

याचिका छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निवासी सुदीप श्रीवास्तव ने एडवोकेट प्रणव सचदेवा के जरिये सुप्रीम कोर्ट में पेश की। मंगलवार को याचिका में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने पक्ष रखते हुए बताया कि सरगुजा के उदयपुर ब्लॉक स्थित परसा ईस्ट एंड केतेबसान क्षेत्र में 2007 में कोल ब्लॉक का आवंटन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में इस ब्लॉक सहित देशभर में 214 ब्लॉक निरस्त किए

सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2014 को देशभर के 214 कोल ब्लॉक का आवंटन निरस्त कर दिया था, इसमें राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित ब्लॉक भी था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा था कि कोल माइनिंग नेशनलाइजेशन एक्ट 1973 के तहत माइनिंग राइट्स किसी प्राइवेट कंपनी को ट्रांसफर करने के लिए बनाई गई ज्वाइंट वेंचर कंपनी गैरकानूनी होगी।




फिर बिजली निगम को मिला ब्लॉक, रोक के बाद भी ज्वाइंट वेंचर किया

केंद्र ने 31 मार्च 2015 को कोल माइंस स्पेशल प्रोविजंस एक्ट लागू किया। नया एक्ट लागू होने के बाद इस ब्लॉक का आवंटन फिर से सरकारी क्षेत्र की कंपनी राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को हुआ। इसके बाद निगम ने खुद को आवंटित कोल ब्लॉक से कोयला खरीदने के लिए ज्वाइंट वेंचर कंपनी परसा ईस्ट केतेबसान कॉलरीज लिमिटेड से एग्रीमेंट किया।

खुद का ब्लॉक, फिर भी अडानी से कोयला खरीद

ज्वाइंट वेंचर कंपनी में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की 26% और अडानी इंटरप्राइजेस लिमिटेड की 74% भागीदारी है। राजस्थान सरकार ज्वाइंट वेंचर कंपनी से कोल इंडिया द्वारा अधिसूचित दर से अधिक कीमत पर कोयला खरीद रही है। रिजेक्ट प्रोडक्शन के नाम पर 29% से अधिक कोयला पीकेसीएल को दिया जा रहा है।

इस मामले में कमर्शियल टर्म्स पर गड़बडिय़ां की गई हैं। जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले और नए विद्युत एक्ट के नियमों का उल्लंघन है। इस कोल ब्लाक में 74 फीसदी अडाणी और 26 फीसदी राजस्थान विद्युत कंपनी की हिस्सेदारी है। इसके चलते ऐसी स्थिति आ गई हैं कि राजस्थान विद्युत कंपनी अपने ही कोल ब्लाक से कोयला अडानी से खरीद रहा है।

हर साल 9 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

याचिकाकर्ता एडवोकेट सुदीप श्रीवास्तव ने भास्कर से चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि ज्वाइंट वेंचर के रास्ते अडानी इंटरप्राइजेस लिमिटेड को फायदा पहुंचाया जा रहा है। सरकार को हर साल 9 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। राजस्थान के लोगों को महंगे दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। हसेदव क्षेत्र का जलग्रहण प्रभावित हो रहा है। वनवासियों से जमीन लेने के बाद उनका उचित तरीके से पुनर्वास नहीं किया गया है। इस क्षेत्र में हाथियों का प्राकृतिक आवास है। कोल ब्लॉक की वजह से इस क्षेत्र में लगातार हाथियों का आतंक बढ़ रहा है।

राजस्थान विद्युत उत्पादन कंपनी की दलील : माइन्स या माइनिंग को सबलेट नहीं किया

राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के कार्यवाहक सीएमडी पी. रमेश का कहना है कि मैंने आज ही चार्ज संभाला है। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बारे में जानकारी नहीं है। वहीं डायरेक्टर (प्रोजेक्ट) पी. एस. आर्य का कहना है कि माइन्स राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम की है। लेकिन माइनिंग का काम उत्पादन निगम व अडानी इंटरप्राइजेस लि. के जॉइंट वेंचर में किया जा रहा है। माइन्स या माइनिंग को सबलेट नहीं किया है और कर भी नहीं सकते हैं।



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