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स्काईवॉक की उपयोगिता पर सवाल क्योंकि 22 फीट ऊंचा है और पैदल लोगों के लिए बड़ी सीढ़ियां चढ़ने वाले ही बहुत कम होंगे

रायपुर (एजेंसी) | दो साल से राजधानी के लोगों की परेशानी का कारण बने स्काईवॉक को पूरा होने में अभी एक साल और लगेगा और पूरा होने के बाद भी सड़क पार करने के लिए लोग 7 मीटर (22 फीट से ज्यादा) ऊंचाई पर सीढ़ियों से चढ़कर कितने लोग जाएंगे, विशेषज्ञों ने यह सवाल उठा दिया है। पीडब्ल्यूडी ने सर्वे के आधार पर दावा किया कि शास्त्री चौक और अंबेडकर अस्पताल चौक पर रोजाना सुबह से रात तक 44 हजार लोग पैदल होते हैं, जो इसका उपयोग करेंगे।

लेकिन जानकारों का मानना है कि ऊंची सीढ़ियों की वजह से केवल युवा ही इसका इस्तेमाल करेंगे इसलिए आमतौर पर यह खाली ही रहेगा। इस राय के बाद नगर निगम ने कुछ अरसा पहले विशेषज्ञों की बैठक की थी और उसमें भी यह बात सामने आई कि स्काईवॉक पैदल लोगों के लिए उपयोगी नहीं रहेगा।

प्रदेश के कुछ शहरों में सड़क क्रास करने के लिए फुटओवरब्रिज बनाए गए हैं, लेकिन यह सीढ़ियों की वजह से ही अनुपयोगी साबित हुए हैं। जहां तक स्काईवॉक का सवाल है, इसकी ऊंचाई भी 22 फीट है, जिसपर चढ़ना-उतरना हर किसी के लिए संभव नहीं होगा। ऐसे में केवल युवा वर्ग को ही इसके इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना होगा, लेकिन उन्हें ऐसी सुविधाएं देनी होंगी ताकि वे इसका उपयोग करें।

निगम में हुई बैठक में इंजीनियर साफ कर चुके हैं कि इसे फ्लाईओवर में भी तब्दील नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऊपरी संरचना संकरी है और पिलर ऐसे नहीं हैं कि फ्लाईओवर के ट्रैफिक का लोड ले सकें। उस बैठक में इंजीनियरों के अलावा ट्रैफिक विशेषज्ञ तथा आर्किटेक्ट मनीष पिल्लीवार, प्रबोध माथुर, देवयानी गर्ग, विशाल कुमार, अतुल देशपांडे, डीके कापडिया और नवीन शर्मा समेत सभी ने अपनी राय दी थी और यह स्काईवॉक की उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह ही थी।

बैठक के बाद मेयर प्रमोद दुबे का कहना था कि इसे उपयोगी बनाना होगा और ऊपर मार्केट वगैरह भी डेवलप किया जा सकता है। फ्लाईओवर का इरादा छोड़ने के बाद स्काईवॉक प्रोजेक्ट लाए जाने को भी सुनियोजित माना जाता रहा है। दरअसल, पीडब्ल्यूडी महकमे ने 2017 में मुंबई की कंपनी ईएनआर के सर्वे के आधार पर दावा किया कि रोजाना औसतन 44 हजार लोग शास्त्री चौक और अंबेडकर अस्पताल चौक पर पैदल चलते हैं, इसलिए स्काईवॉक बनाना चाहिए।

शास्त्री चौक मुश्किल से चौड़ा किया फिर होगा संकरा

शहर के सबसे भीड़भरे चौराहों में शामिल शास्त्रीचौक का आकार 2014 में बढ़ाया गया था। डीकेएस की बाउंड्रीवाल तोड़कर उसकी सड़क को चौराहे से जोड़ा गया। उसके बाद स्टेशन से आकर मोतीबाग चौक की ओर आने वाले ट्रैफिक के लिए सीधी सड़क मिल गई। इसी तरह से मोतीबाग से स्टेशन जाने वालों के लिए भी रास्ता खोल दिया गया। शास्त्री चौक के बीचोबीच की रोटेटरी हटाकर प्रतिमा को सड़क किनारे शिफ्ट किया गया। उसी समय कलेक्टोरेट की बाउंड्रीवाल को पीछे किया गया। इसी तरह डीकेएस की बाउंड्रीवाल को तोड़कर सड़क किनारे स्थित मंदिर से भी पीछे कर दिया गया। इसके बाद चौराहे की चाैड़ाई 140 फुट हो गई। चौराहे के सेंटर से डीकेएस की ओर इसकी चौड़ाई 60 फुट और सेंटर से अंबेडकर अस्पताल की ओर 80 फुट है।

रोजाना 4 लाख लोगों की परेशानी का कारण बना स्काईवॉक

स्काईवॉक से दो साल से सबसे व्यस्त सड़कों से रोजाना गुजरने वाले करीब 4 लाख लोग परेशान हो रहे हैं। स्काईवॉक की डेडलाइन फरवरी-2018 थी। फीचर जोड़-जोड़कर 4 बार डेडलाइन बढ़ाई गई। फिर भी नहीं बना तो पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में एक और ठेकेदार को इस काम से जोड़ दिया गया। इसके बावजूद, काम अब भी अधूरा है और स्काईवॉक की वजह से रोजाना रात में एक सड़क बंद की जा रही है। निर्माण से उड़ी धूल यहां से एक किमी दायरे के आधा दर्जन वार्डों में फैली हुई है। इसके बावजूद काम इतना धीमा है कि जानकारों का अनुमान है, इसे पूरा होने में अभी कम से कम एक साल और लग सकता है।

सीएम भूपेश ने बुलाई निर्णायक बैठक 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को राजधानी के स्काईवॉक की उपयोगिता और बिलासपुर में सीवरेज लाइन में गड़बड़ी को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक लेंगे। बैठक के बाद ही दोनों के संबंध में निर्णय मुख्यमंत्री कोई ठोस निर्णय ले सकते हैं। सूत्रों के अनुसार सीएम स्काई वॉक की उपयोगिता पर उठे सवालों से इत्तेफाक रखते हैं और सरकार भी मान रही है कि राजधानी में यह बड़ा नासूर बन चुका है। बैठक में तय होगा सकता है कि इसे तोड़ा जाए या फिर दूसरा उपयोग तय हो। बैठक में इसी पर कोई ठोस निर्णय हो सकता है। इसी तरह बिलासपुर में लोग सीवरेज की समस्या से जूझ रहे हैं। सदन में इस पर चर्चा के दौरान भी सीएम भूपेश बिलासपुर में फैली बदइंतजामी पर नाराजगी जता चुके हैं।

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