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पिछली सरकार ने जिन्हें जबरदस्ती नौकरी से निकाला, उन केस का रिव्यू करेगी सरकार

रायपुर (एजेंसी) | पिछली सरकार ने जिन लोगों को जबरदस्ती नौकरी से निकाल दिया था, उन मामलों का सरकार रिव्यू करेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्य सचिव को इन मामलों का रिव्यू करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस विधायकों ने अनिवार्य सेवानिवृत किए गए अफसरों और कर्मचारियों की बहाली के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था।

वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा और अमरजीत भगत ने मुख्यमंत्री से अनिवार्य सेवानिवृत्त किए गए अफसर-कर्मचारियों को बहाल करने की मांग की थी। अब सरकार सभी मामलों का रिव्यू करने जा रही है। बता दें कि भाजपा सरकार के समय में 50 साल की आयु या फिर 20 साल की सेवा पूरी करने वाले करीब 100 अफसरों व कर्मचारियों को सरकार ने जबरदस्ती नौकरी से निकाल दिया था।

इसमें से एक मामले में तो चतुर्थ श्रेणी में अनुकंपा नियुक्ति पर पदस्थ महिला को भी रिटायर कर दिया गया था। इस सदमे के कारण भृत्य के पद पर पदस्थ स्नेहलता यादव की मौत हो गई थी। अब उसकी बेटी अनुकंपा नियुक्ति के लिए दर-दर भटक रही है। इसके अलावा कई अन्य कर्मचारियों की भी सदमे के कारण मौत होने की बात सामने आ रही है।

इन अफसर-कर्मचारियों की चली नौकरी गई 

50-20 के नियम में जिन कर्मचारियों को सरकार ने रिटायर किया था, उनमें कैलाश चंद्र लाड़वा वाणिज्य कर, नवीन श्रीवास्तव व थान सिंह हुद्दे पाठ्य पुस्तक निगम, एनयू खान व आरके विश्वकर्मा वित्त, अमरनाथ कटियार मुख्य निर्वाचन, नागेंद्र बहादुर सिंह फूड एंड ड्रग, लक्ष्मण सिंह व गोकरण ठाकुर वन, सुशील कुमार बंछोर, लियोरा तिग्गा, सीएल उइके, बीपी बाकला, सविता दास वैष्णव, वी प्रभाव राव, बहादुर प्रसाद बाकला, राजेंद्र श्रीवास्तव, राजकुमार शर्मा, गजानन राम कश्यप पुलिस विभाग, सिद्धनाथ सिंह एनएमएच शामिल हैं।

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