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पुनीत गुप्ता के खिलाफ अब एक और शिकायत, डीकेएस में मशीन ही नहीं, आउटसोर्सिंग में भी गड़बड़ी, नियम बदलकर दिए ठेके

रायपुर (एजेंसी) | पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता की डिग्री को फर्जी बताते हुए कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने रायपुर एसएसपी से शिकायत कर दी है। वही दूसरीओर दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल चालू होने के पांच महीने बाद मशीन खरीदी में गड़बड़ी के साथ-साथ आउटसोर्स का फर्जीवाड़ा भी फूट रहा है। जिसमे अब पूर्व अधीक्षक डा. पुनीत गुप्ता के साथ-साथ अब विभाग के जिम्मेदार पदों पर पदस्थ आला अफसरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इसमें चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर भी हैं।

डॉ. पुनीत की डिग्री पर किया सवाल

डा. राकेश ने शिकायत में आरोप लगाया कि डा. पुनीत ने कार्यकाल पूरा किए बिना समय से पहले परीक्षा दे दी थी और उसी आधार पर डिग्री भी हासिल कर ली। उनके सर्विस रिकॉर्ड में भी अनियमितता है और उन्होंने लगातार विशेषज्ञता बदली है, जिस आधार पर उन्हें सरकारी नौकरी मिली हुई है। वहीं विदेश भागने की आशंका से उनके पासपोर्ट जब्त करने की भी मांग की गई है। रायपुर एसएसपी शेख आरिफ हुसैन ने शिकायत मिलने की पुष्टि की और कहा कि जांच की जा रही है।

मशीनों की खरीदी में भी गड़बड़

मशीनों की खरीदी के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। परीक्षण किया जा रहा है कि खरीदी और आउटसोर्सिंग के दस्तावेजों में पूर्व अधीक्षक के साथ-साथ और किन अफसरों के हस्ताक्षर हैं। अफसरों का कहना है कि परीक्षण और जांच के बाद अन्य जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और विभागीय स्तर पर की जा रही जांच के दाैरान दस्तावेजों में कई खामियां हैं।

संकेत मिल रहे हैं बाहरी और किसी खास कंपनी को ठेका देने के लिए नियम और शर्तों में भी छेड़खानी की गई। इतना ही नहीं जिन कंपनियों को ठेका दिया गया, उसके जिम्मेदारों ने शर्त के अनुसार काम नहीं किया तब भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। एमआरआई मशीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

पुलिस ने 7 घंटे डीकेएस में दस्तावेज खंगाले, तीन डाॅक्टराें के बयान दर्ज

मशीन खरीदी व भर्ती में अनियमितता की शिकायत की जांच कर रही गोल बाजार पुलिस ने शनिवार को डीकेएस पहुंचकर सात घंटे दस्तावेज खंगाले। तीन डॉक्टरों के बयान दर्ज किया। पुलिस ने कंप्यूटर के हार्ड डिस्क व दस्तावेज भी जब्त किए। जिन डॉक्टरों का बयान हुआ, वे परचेस कमेटी के हैं। विभागीय जांच कमेटी पहले ही इन डॉक्टरों का बयान ले चुकी है। डॉक्टरों ने कमेटी को बताया था कि वे फाइल में केवल हस्ताक्षर करते थे।

सारा निर्णय अधीक्षक व दूसरे अधिकारी लिया करते थे। विभागीय जांच कमेटी ने रिपोर्ट में 50 करोड़ की गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ। उसके बाद अस्पताल ही अधीक्षक डॉ. केके सहारे ने गोलबाजार में एफआईआर दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस अब तक 18 लोगों के बयान ले चुकी है। इसमें डॉक्टर, वेंडर व खरीदी व भर्ती प्रक्रिया में शामिल लोग शामिल हैं। जांच कमेटी को कई जरूरी फाइल नहीं मिली है। कुछ फाइल ओरिजनल के बजाय जीराक्स कॉपी मिलीं। पुलिस सोमवार को अधीक्षक डॉ. सहारे का बयान लेगी। पुलिस रविवार को बयान लेना चाह रही थी, लेकिन अस्पताल की छुट्‌टी होने के कारण सोमवार को बयान होगा।

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