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रात एक बजे तक किया गया ऑडिट 12 हजार किसान ब्लैक लिस्ट से हटे

रायपुर (एजेंसी) | ऋण अदायगी के बाद भी जिले के हजारों किसानों को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया था। इसकी जब पड़ताल हुई तब ऑडिट के बाद इन्हें राहत देते हुए कर्ज माफी के दायरे में लाया गया। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में तीन दिन से ऑडिट के मिलान की प्रक्रिया चल रही थी। पहले दौर में 49 हजार किसानों को पात्र माना गया और दूसरे चरण में 12 हजार से ज्यादा किसान फिर से कर्ज माफी की सूची में शामिल हो गए हैं। इस तरह अब कुल 1 लाख 37 हजार 704 किसानों की कर्ज माफी हो पाई है। 49, 352 किसानों को सोमवार से कृषि ऋण वितरण भी शुरू हो जाएगा।

ब्लैक लिस्ट में नाम होने की वजह से किसानो को कृषि ऋण नहीं मिल रहा था 

पहले चरण में केवल 88 हजार 350 किसानों की ही कर्ज माफी की गई थी। वहीं हजारों किसानों को इसलिए खरीफ के लिए कृषि ऋण नहीं दिया जा रहा था कि इनका नाम ब्लैक लिस्ट में शामिल था। इस चक्कर में किसान रोज सोसाइटियों के चक्कर लगा रहे थे। जिला प्रशासन का बार-बार घेराव शुरू हो गया था। इस वजह से राज्य सरकार की भी किरकिरी होने लगी थी, क्योंकि शासन ने अल्पकालीन सहित ब्लैक लिस्ट में शामिल सभी किसानों की कर्ज माफी की बात कही थी। हालांकि कागजी तौर पर ऐसा नहीं हुआ था।

ऑडिट में हुआ खुलासा 

जिले में तो फसल बीमा का लाभ लेने वाले किसानों को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया। इस चक्कर में ऑडिट के दौरान यह बात सामने आई थी कि इनमें से कई किसानों ने ऋण की अदायगी कर दी थी। पहले चरण में 88 हजार किसानों की कर्ज माफी होने के बाद बचे हुए किसानों को लाभ देने के लिए ऑडिट का काम शुरू करा दिया गया था। उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं की ओर से की जा रही ऑडिट के दौरान बैंकों की रिपोर्ट की मिसिंग भी सामने आ रही थी।

इस वजह से ऑडिट में देरी होती गई। कलेक्टर जेपी मौर्य ने तो टीएल की बैठक में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सीईओ पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें बैठक से बाहर कर दिया था। कलेक्टर का कहना था कि कर्ज माफी की प्रक्रिया कैसे अटकी हुई है?

प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझा

कर्ज माफी की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के मुद्दे पर लगातार विवाद की स्थिति बनने और किसानों की ओर से शिकायत किए जाने पर जिले के प्रभारी मंत्री मोहम्मद अकबर ने हस्तक्षेप करते हुए सचिव स्तर पर इसकी जांच कराई तो पता चला कि ऑडिट के दौरान सूची इसलिए ब्रेक कर दी गई है, क्योंकि कुछ किसानों के ऋण खाते की बजाए बचत खाते में फसल बीमा की राशि डाल दी गई थी। मंत्री के निर्देश के बाद सहकारी बैंक में रात-रातभर ऑडिट की प्रक्रिया पूरी कराई गई। शनिवार रात को 1 बजे तक अफसर सूची तैयार करते बैठे रहे। मिलान होने के बाद लगभग 12 हजार किसान कर्ज माफी के दायरे में पाए गए।

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