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छत्तीसगढ़ की गंगा ‘महानदी’ सुखने के कगार पर, वनों की कटाई से तेजी से घट रहा जल स्तर

धमतरी (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ की गंगा कही जाने वाली सबसे बड़ी महानदी की यह हालिया तस्वीर है। जिसे सूरजगढ़ पुल से लिया गया है। एक समय ऐसा भी था जिसका जिक्र करते हुए एक अंग्रेज इतिहासकार व शोधकर्ता गिब्सन ने लिखा कि 17वीं सदी में यही नदी कोलकाता तक परिवहन का मुख्य जरिया थी। इसके जलमार्ग से वस्तुओं का आयात-निर्यात होता था।

यह बात रिकार्ड में दर्ज है कि जुलाई से फरवरी के बीच नदी में मालवाहक जहाज चलते थे, लेकिन 2019 की फरवरी में अब इसमें नाव-डोंगी चलने लायक पानी भी नहीं है। इस नदी का 86 फसदी कैचमेंट एरिया छत्तीसगढ़ में है, लेकिन नदी किनारे पौधारोपण नहीं होने, पेड़ नहीं होने और वनों की कटाई और अवध खनन के चलते महानदी और इसकी सहायक नदियों में पानी का स्तर घट गया है।

अवैध रेत खनन भी है बड़ी वजह

एक ओर जहां नदी में रेत की उपलब्धता कम है वहीं पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव बना रेत माफिया अवैध तरीके से उठाव कर रहे हैं। हाल ही में ग्राम पंचायत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए गांव में रेत खदान स्वीकृत कराया गया था लेकिन जब काम करने की बारी आई तो रेत माफिया सक्रिय हो गए। रेत माफिया इस कदर हावी हो रहे हैं कि अफसर भी उनके आगे बोने साबित हो रहे हैं। खनिज विभाग भी चुप बैठा है।

धमतरी जिले के सिहावा पर्वत से निकलती है महानदी

महानदी धमतरी जिले के सिहावा पर्वत से 42 मीटर की ऊंचाई से निकलकर दक्षिण-पूर्व की ओर से उड़ीसा के पास से बहते हुये बंगाल की खाड़ी में समा जाती है। छत्तीसगढ़ राज्य में इसकी लम्बाई 286 किलोमीटर है। महानदी की कुल लंबाई 858 किलोमीटर है। महानदी की सहायक नदी पैरी, सोंढूर, सूखा, जोंक,लात, बोरई, मांड, हसदेव, केलो, ईब आदि है ।

राजिम में महानदी से पैरी और सोंढूर आकर मिलते हैं। शिवरीनारायण में महानदी से शिवनाथ और जोंक नदी आकर मिलती है। चंद्रपुर के पास महानदी में मांड और लात नदी आकर मिलती है। राजिम और सिरपुर महानदी के तट पर स्थित धार्मिक पर्यटन स्थल है। महानदी की सबसे लंबी सहायक नदी शिवनाथ नदी है। उड़ीसा पर विशाल हीराकुंड बांध भी इसी नदी पर बना है।

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