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डेंगू के साथ अब मलेरिया का खतरा मंडराने लगा, सितम्बर के अंत में पनपते है वायरस

रायपुर (एजेंसी) | राजधानी रायपुर में डेंगू से मरने वालो का आकड़ा 37 के पार हो चूका है, वही मरीजों की संख्या बढ़कर 150 तक पहुंच गई है। जिनका इलाज आंबेडकर अस्पताल में चल रहा है। यह आंकड़ा पिछले दो महीने का है। विशेषज्ञों के अनुसार 15 सितंबर के बाद बारिश खत्म होने लगेगी। उस वक्त डेंगू के मच्छर भी कम होने लगेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद मलेरिया के मच्छर पनपेंगे और सितम्बर के अंत से प्रदेश में मलेरिया का खतरा बढ़ने लगेगा।

इसलिए अब स्वास्थ्य विभाग की बेचैनी बढ़ने लगी है। सूत्रों के अनुसार डेंगू को जल्दी खत्म करने के लिए ब अब स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय एजेंसियां मिलकर मुहिम शुरू करने वाली हैं, ताकि इसके बाद मलेरिया से मुकाबले में ज्यादा दिक्कत न आए। जुलाई महीने से दुर्ग-भिलाई समेत राजधानी में डेंगू फैला हुआ है। दुर्ग में तो इस बीमारी को महामारी घोषित किया जा चुका है। वर्तमान में अंबेडकर व निजी अस्पतालों में 90 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है।




राजधानी में डेंगू के मच्छरों पर लगाम लगाने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग व निगम प्रभावित इलाकों में लगातार फागिंग करेगा। सीएमएचओ डॉ. केएस शांडिल्य ने बताया कि डेंगू के मच्छर 200 मीटर तक उड़ सकते हैं। इससे आगे वे नहीं जा सकते। राजधानी के जो प्रभावित इलाके हैं, वहां लगातार फागिंग की जाएगी। खाली प्लॉट व मैदान में भरे साफ पानी में केरोसिन व जले हुए आइल डाला जाएगा। इससे डेंगू के मच्छर खत्म हो जाते हैं। राजधानी में सबसे ज्यादा डेंगू के मरीज भनपुरी व कबीरनगर में मिले हैं। जिला मलेरिया कार्यालय के अनुसार इन इलाकों में 35 से 40 मरीज मिले हैं। सभी इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर चले गए हैं। डॉक्टरों ने बताया कि डेंगू सामान्य वायरल बुखार की तरह है। इलाज व आराम से यह ठीक हो जाता है।

मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. अरविंद नेरल का कहना है कि मरीजों को तत्काल इलाज मिलने से मौत की संभावना खत्म हो जाती है। मलेरिया के संबंध में उन्होंने कहा कि बारिश के बाद इसके मच्छर बढ़ सकते हैं। श्री नारायणा अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुनील खेमका व श्री बालाजी अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. देवेंद्र नायक ने कहा कि रोज मच्छरदानी लगाकर साेने से डेंगू व मलेरिया से बचा जा सकता है। दाेनों बीमारियों में इलाज से ज्यादा बचाव जरूरी है। जरूरी है कि सोने से पहले मच्छरदानी लगाने की आदत डालें। ऐसा करने से एडीस व मादा एनाफिलिस मच्छर के डंक से बच जाएंगे।

डेंगू का मच्छर जहां साफ पानी में पैदा होता है, वहीं मलेरिया का मादा एनाफिलीज मच्छर गंदे पानी में पैदा होता है। बदहाल गंदगी के कारण मलेरिया की बीमारी होती है। राजधानी में मलेरिया से मरने वाले लोगों की संख्या गिनती के हैं। दूसरी ओर बस्तर में आम लोगों के अलावा नक्सलियों से निपटने के लिए तैनात अर्धसैनिक बल मलेरिया की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। बस्तर में मच्छर ज्यादा ही खतरनाक है। हाई रिस्क एरिया में बस्तर संभाग के अलावा कवर्धा जिला, बालोद, राजनांदगांव व दूसरे जिले शामिल हैं।



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