chhattisgarh rojgar logo
telegram group   Chhattisgarh Rojgar Facebook Page  Chhattisgarh Rojgar twitter  Chhattisgarh Rojgar Youtube Channel

हरेली पर आज से अभियान, गांव-गांव जाकर बताएंगे-कोई महिला टोनही नहीं

जादू-टोने के संबंध में, टोनही प्रताड़ना के खिलाफ लोगों को जागरूक करने ग्राम सभा सरपंचों से टोनही प्रताड़ना के विरोध में शपथ दिलवाई जाएगी।

दुर्ग | गांवों में महिलाएं आज भी टोनही प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं। इस युग में ऐसे भ्रम चिंताजनक है। ग्रामीणों का यही भ्रम दूर करने का बीड़ा उठाया है अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने। यह समिति शनिवार को हरेली से पूरे एक हफ्ते गांवों में जाकर ग्रामीणों को जागरूक करेगी। इस मुहिम को नाम दिया है, कोई नारी टोनही नहीं…। गांववालों से कहा जाएगा कि जादू-टोने का कोई अस्तित्व नहीं है। भूत-प्रेत, टोनही का खौफ सिर्फ भ्रम है। बीमारियों से बचने के लिए गांव को तंत्र-मंत्र से बांधने के बजाय स्वास्थ्य सुरक्षा के नियमों का पालन करें। समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि इस मुहिम के तहत दुर्ग जिले के पाटन ब्लाॅक के ग्राम तेलीगुंडरा में ग्रामसभा होगी।




डाॅ. दिनेश मिश्र ने कहा अंचल में हरियाली अमावस्या (हरेली) के संबंध में काफी अलग अलग मान्यताएं हैं। अनेक स्थानों पर इसे जादू-टोने से जोड़कर भी देखा जाता है, कहीं-कहीं यह भी माना जाता है कि इस दिन, रात्रि में विशेष साधना से जादुई सिद्धियां प्राप्त की जाती हैं,जबकि वास्तव में यह सब परिकल्पनाएं ही हैं। जादू-टोने का कोई अस्तित्व नहीं है। तथा कोई महिला टोनही नहीं होती।

ग्राम सभा में ग्रामीणों से कहा जाएगा- जादू टोने का अस्तित्व नहीं 

अंधविश्वास, पाखंड व सामाजिक कुरीतियों के निर्मूलन के लिए कार्यरत संस्था अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति हरेली पर एक सप्ताह का विशेष जनजागरण अभियान चलाएगी। इसके तहत जादू-टोने के संबंध में, टोनही प्रताड़ना के खिलाफ लोगों को जागरूक करने ग्राम सभा सरपंचों से टोनही प्रताड़ना के विरोध में शपथ दिलवाई जाएगी। गांव के निर्जन स्थानों में रात्रि भ्रमण, स्कूल में व्याख्यान, अंधविश्वास पर पेंटिंग प्रतियोगिता, पंपलेट वितरण किया जाएगा। टोनही प्रताड़ना के संबंध में जानकारी एवं जागरूकता बढ़ाने के लिए पोस्टर वितरित किए जाएंगे तथा यह पोस्टर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों एवं सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा किए जाएंगे।

टहनी तोड़कर नीम के पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं 

डाॅ. मिश्र ने कहा पिछले कुछ वर्षों से यह देखा जा रहा है कि हरेली अमावस्या को दिन में भी बच्चे व कई लोग जादू-टोने व नजर लगने से बचने के लिए नीम की टहनी साइकिलों, रिक्शे व गाड़ियों में लगाकर घूमते दिखाई देते हैं। कुछ बच्चे तो नीम की पत्तियां लेकर स्कूल तक पहुंच जाते हैं। पालकों व शिक्षकों को बच्चों को ऐसे अंधविश्वास से बचने की सलाह देनी चाहिए। नीम की टहनी तोड़कर वृक्ष को नुकसान पहुंचाने के बजाय घर के आसपास नीम के पौधे लगाएं ताकि वातावरण शुद्ध हो।

तंत्र-मंत्र और झाड़ फूंक नहीं बेहतर उपचार है समाधान 

जब बीमारियों व प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में जानकारी नहीं थी तब यह विश्वास किया जाता था कि मानव व पशु को होने वाली बीमारियां जादू-टोने से होती हैं। बुरी नजर लगने से, देखने से लोग बीमार हो जाते हैं। इनसे बचाव के लिए गांव, घर को तंत्र-मंत्र से बांध दिया जाता था। कई बार विशेष महिलाओं पर जादू-टोना करने का आरोप लग जाता है। वास्तव में सावन माह में बरसात होने से वातावरण का तापमान अनियमित रहता है, उमस, नमी के कारण बीमारियों को फैलाने वाले कारकों बैक्टीरिया व कीटाणु अनुकूल वातावरण पाकर काफी बढ़ जाते है। ऐसी स्थिति में बेहतर उपचार ही समस्या का समाधान हो सकता है।



RO No - 11069/ 14
CM Bhupesh Bhagel Mandi ko Maar

Leave a Reply