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नक्सल ऑपरेशन संभालने नायक 15 साल बाद पीएचक्यू लौटे, 16 साल बाद लौटे सिंह को ईओडब्लू-एसीबी चीफ की जिम्मेदारी

रायपुर (एजेंसी) | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुलिस मुख्यालय में बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य के सबसे सीनियर आईपीएस (1983 बैच) डीजी गिरधारी नायक की करीब पांच साल बाद न केवल पीएचक्यू वापसी हुई बल्कि उन्हें नक्सल आपरेशन और एसआईबी का डीजी बनाया गया है।

16 साल तक दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर रहने के बाद छत्तीसगढ़ लौटे आईपीएस वीके सिंह को ईओडबल्यू-एसीबी के डीजी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नक्सल ऑपरेशन के साथ-साथ ईओडब्लू-एसीबी का प्रभार डीजी डीएम अवस्थी संभाल रहे थे।

गिरधर नायक और वी.. के. सिंह

भाजपा सरकार के 15 साल के कार्यकाल के दौरान नायक एक तरह से लूप लाइन में रखे गए थे। उनसे 2 साल जूनियर होने के बावजूद पिछली सरकार ने एएन उपाध्याय को डीजी बनाया और वे पूरे साढ़े चार साल तक पद पर रहे। नई सरकार आने के बाद से नायक के पुलिस मुख्यालय लौटने की खबरें चल रही थी। इससे पहले नायक को साल 2014-15 में तत्कालीन डीजी रामनिवास के अवकाश पर जाने के दौरान कुछ दिनों के लिए डीजीपी पदस्थ किया था।

नायक प्रदेश के कड़क पुलिस अफसर माने जाते हैं। नायक को जेल के साथ-साथ एसआईबी और नक्सल आपरेशन का अतिरिक्त प्रभार देकर उनके कद को बढ़ाया गया है। हालांकि उन्हें नक्सल आपरेशन को लेकर डीजी अवस्थी को ही रिपोर्ट करनी होगी। इधर 16 साल बाद प्रदेश वापसी कर रहे वीके सिंह भी अहम पोस्टिंग पाने में सफल रहे।

उन्हें वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए एसीबी और ईओडब्लू का डीजी बनाया जाना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। दोनों एजेंसिंया अभी नान और ई-टेंडर जैसे चर्चित घोटालों की जांच कर रही है। 1987 बैच के सिंह 10 माह रिटायर भी हो रहे हैं। हालांकि उनकी वापसी के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। सरकार ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।

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