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सीएम भूपेश बघेल के पिता ने की दशानन की पूजा, 124 गांवों में रावण दहन नहीं करने का संकल्प

राजनांदगांव (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल ने दशहरे के दिन रावण की पूजा की। सर्व आदिवासी समाज के कार्यक्रम में उन्होंने महिषासुर और मेघनाद का शहादत दिवस मनाया। आदिवासी नेता सुरजू टेकाम ने रावण दहन न करने का प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम में तय किया गया कि क्षेत्र के 124 गांवों में रावण दहन में कोई भी आदिवासी शामिल नहीं होगा, न ही कोई सहयोग देगा, क्योंकि आदिवासी रावण को अपना पुरखा मानते हैं।

वोट हमारा राज तुम्हारा, यह नहीं चलेगा: नंद कुमार

वोट हमारा-राज तुम्हारा, यह नहीं चलेगा। प्रदेश में आए तमाम उच्च वर्ग के लोगों गिन-गिन के दफ्तरों से निकाला जाए और हमारे बच्चों को नौकरी दी जाए। यह हमारी अंतिम लड़ाई है। अब चाहे इसे नक्सलवाद कहिए या कोई भी वाद कहिए। हम हक और अधिकार की लड़ाई लडेंगे। जब भी आप पर कोई संकट आए मैं यहां आने के लिए तैयार हूं। आप लोगों (आदिवासियों) को नक्सली कहना सरकार बंद करे। बस्तर में पढ़े लिखे आदिवासी बच्चों को नौकरी मिले।

नंदकुमार बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि 40 साल तक आपने संघर्ष किया। अब हम नक्सलवादियों से अनुसूची 5 के अनुसार समझौता करेंगे। इसी आधार पर जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों का ही हक होगा, किसी बाहरी का नहीं। आपके रहते भूपेश बघेल आजीवन मुख्यमंत्री बना रहेगा, उसकी चाबी मेरे हाथ में रहेगी। कार्यक्रम में आसपास के गांवों से 5 हजार आदिवासियों के पहुंचने का दावा किया गया। पिछले दिनों आदिवासियों ने प्रशासन से दुर्गा मां के साथ महिषासुर की प्रतिमा न रखने व रावण दहन न करने की अपील की थी।

RO No - 11069/ 14
CM Bhupesh Bhagel Mandi ko Maar

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