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नान घोटाला: नान के दफ्तर में फिर छापेमारी 2015 से पूर्व की फाइलें जब्त

रायपुर (एजेंसी) | नागरिक आपूर्ति निगम (नान) दफ्तर में शुक्रवार को ईओडब्लू-एसीबी की टीम ने छापे मारकर कई दस्तावेज और फाइलें जब्त कीं। इनमें ज्यादातर फाइलें 2011 से 2014 के बीच हुए हिसाब-किताब और ब्योरे से संबंधित हैं। यानी अब नान घोटाले की जांच 2011 से 2015 को छापा पड़ने वाले दिन तक की जाएगी। अभी तक घोटाले की जांच केवल एक वर्ष 2015 की फाइलों और दस्तावेजों तक सीमित थी।

नान के पूर्व जीएम अनिल टुटेजा ने एक अभ्यावेदन देकर मांग की थी कि निगम में 2011 से ही चावल और नमक के परिवहन में घोटाला चल रहा है। उस अवधि के दस्तावेज प्राप्त करने के लिए शुक्रवार को छापा मारा गया। शाम करीब 4 बजे ईओडब्लू की टीम नान दफ्तर पहुंची। अफसरों ने जिम्मेदार अधिकारियों से 2011 से 2014 तक उन सभी फाइलों और दस्तावेजों को जब्त किया जो नान के पहले छापे के समय छोड़ दिए गए थे, या उन्हें जब्त नहीं किया गया था।

अफसरों ने संकेत दिए हैं कि नान में चावल और नमक के परिवहन में गोलमाल केवल 2015 में ही नहीं हुआ है। उसके पहले से वहां एक संगठित सिस्टम के तहत लेन-देन चल रहा था। इसके बावजूद पहली बार छापे के दौरान केवल एक साल का ही हिसाब-किताब जब्त कर उसी आधार पर कार्रवाई की गई थी। ईओडब्लू के अफसरों ने 2011 से 2015 के दौरान पदस्थ अफसरों की सूची बनाकर उनसे भी पूछताछ कर ली है।

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