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सीएम बघेल ने शुरू करवाई नान घोटाले की जाँच, डीजीपी अवस्थी ने कहा, जाँच में गड़बड़ी करने पर होगी कार्यवाही

रायपुर (एजेंसी) | नागरिक आपूर्ति निगम (नान) समेत कुछ खास मामलों की जांच के लिए ईओडब्लू-एंटी करप्शन ब्यूरो में बनाई कई 26 अफसर-जवानों की विशेष टीम भंग कर दी गई है। यह टीम महावीर नगर के जिस फ्लैट को सेफ हाउस के रूप में इस्तेमाल कर रही थी, वहां ईओडब्ल्यू की ही दूसरी टीम ने बुधवार की रात छापा मारा तथा कंप्यूटर कक्ष सील कर दिया है। इसका रिकार्ड एंटी करप्शन ब्यूरो के एसपी मनीष शर्मा के पास रखवाया गया है।




इससे पहले, डीजीपी डीएम अवस्थी ने दोनों एजेंसियों के अफसर-कर्मचारियों की बैठक लेकर साफ कर दिया है कि नान समेत सभी मामलों में अगर जांच में कुछ भी गलत करने की बातें सामने आईं तो ऐसा करने वाले अफसर-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

नान घोटाले की जाँच कर रहे एजेंसी की होगी जाँच, इसी की भूमिका संदिग्ध

डीजीपी ने इन एजेंसियों में अलग से बनाई गई टीम को शुक्रवार को तलब कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक उनसे पूछा जाएगा कि अब तक क्या और किस तरह से काम कर रहे थे। इस टीम के अलग फ्लैट से ऑपरेट करने के मामले को भी गंभीरता से लिया गया है। अफसरों का कहना है वहां से जब्त कंप्यूटर और हार्ड डिस्क की भी जांच की जाएगी। देखा जाएगा कि वहां क्या काम होता था और उस कंप्यूटर में क्या रिकार्ड है। बताया जा रहा है कि नान घोटाले में ईओडब्ल्यू-एसीबी की कार्रवाई में लगे एसपी से जवान तक के कर्मचारियों का विशेष दस्ता इसलिए जांच के दायरे में आ गया है, क्योंकि सबसे ज्यादा सवाल इसी टीम की भूमिका को लेकर उठे थे।

शुरू की गई घोटालों की फाइलों की छानबीन

मुख्यमंत्री बघेल ने कांग्रेस के सत्ता में आने के पहले ही नान घाेटाले की जांच एसआईटी के माध्यम से कराने की घोषणा कर दी थी। नई सरकार ने सत्ता संभालते ही ईओब्लू एंटी करप्शन ब्यूरो के डीजी मुकेश गुप्ता को हटाया। मुकेश गुप्ता के निर्देश पर ही नागरिक आपूर्ति निगम के मुख्यालय सहित 22 अलग-अलग ठिकानों पर छापा मारा था, लेकिन बाद में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने जांच के कुछ बिंदुओं को छिपा दिया है। डायरी के छूटे हुए नामों को लेकर कई बार हल्ला मचा।




चर्चा है कि इसी वजह से डीजी गुप्ता को हटाकर पूर्व में ईओडब्लू की कमान संभाल चुके अवस्थी को डीजीपी के अलावा यहां का अतिरिक्त प्रभार दिया है। अवस्थी ने नान समेत सभी मामलों की फाइलों की छानबीन शुरू करवा दी है।

छापा एसीबी का, इसके बाद, एक-एक कर बदले अफसर

नान के मुख्यालय सहित अलग-अलग ठिकानों पर सीरियल छापे 22 टीमों ने मारे थे। एंटी करप्शन ब्यूरो के एसपी रजनेश सिंह खुद मुख्यालय में छापा मारने पहुंचे थे। बाद में जांच के दौरान कई तरह के बदलाव किए गए। छापा मारने के बाद एफआईआर डीएसपी आरके दुबे ने की। जांच डीएसपी आरके जोशी ने की लेकिन कोर्ट पेश करते समय फिर अफसर बदल गए और टीआई संजय देवस्थले ने कोर्ट में केस पेश किया। अभी पूरक चालान भी उन्होंने ही पेश किया है। खबर है कि इस मामले में कुछ अफसरों का नाम कई कारणों से उछला।

खास टीम की भूमिका अब जांच का मुद्दा

ईओडब्लू और एंटी करप्शन ब्यूरो की एक खास टीम चर्चा में रही, जिसने पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस टीम की कार्यप्रणाली पर जबर्दस्त सवालिया निशान थे, लेकिन सारा सिस्टम इन्हीं के फेवर में था इसलिए सब खामोश रहे। एसपी से सिपाही तक की रैंक के कर्मचारियों की इस टीम की भूमिका पूर्वाग्रह से ग्रसित मानी गई थी। अब पूरी टीम को डीजीपी अवस्थी ने तलब किया है।



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