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मनरेगा घोटाला: फर्जीवाड़ा के मामले में निलंबित हुए अफसरों से लाखों की होगी रिकवरी

राजनाँदगाँव (एजेंसी) | महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत स्वीकृत हुए स्टॉपडैम, रपटा व डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण में फर्जीवाड़ा करने वाले आरईएस के निलंबित अफसरों से शासन की ओर फर्जी तरीके से किए गए भुगतान की राशि वसूल की जाएगी। निलंबन के बाद इन अफसरों को आरोप पत्र जारी किया जाएगा। इन्हें निर्धारित तिथि के भीतर जवाब देना होगा।

मामले में निलंबन के बाद मनरेगा लोकपाल की ओर से जांच प्रतिवेदन का इंतजार किया जा रहा है। प्रतिवेदन के आधार पर मनरेगा शाखा की ओर से भी कार्रवाई तय की जाएगी। फर्जीवाड़ा के मामले में निलंबित किए गए एसडीओ एम घोरमारे, सब इंजीनियर अनूपचंद्राकर, सब इंजीनियर निखिलेश गैरारे, सब इंजीनियर गरिमा चौहान सहित संभागीय लेखाधिकारी विजय कुमार कौशल, वरिष्ठ लेखा लिपिक राजेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव व सहायक ग्रेड दीपक लाल हरिहारनो की सीधे तौर पर मटेरियल सप्लायरों से सांठगांठ की पुष्टि जांच रिपोर्ट में की गई है।




इन अफसरों ने डोंगरगढ़, खैरागढ़ व छुईखदान क्षेत्र में बनाए गए रपटा, स्टॉपडैम से लेकर डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा दरों में संशोधन किया।

जवाब नहीं देने पर एकतरफा कार्रवाई 

निलंबित किए गए अफसरों को शासन की ओर से बहुत जल्द आरोप पत्र जारी किया जाएगा। इसके माध्यम से अफसरों को अपना पक्ष रखना होगा। जवाब नहीं देने वाले अफसरों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई भी हो सकती है। यानी की अफसर बर्खास्त भी किए जा सकते हैं।

जिले में मनरेगा के तहत फर्जीवाड़ा का यह पहले प्रकरण है, जिसमें एक साथ इतने सारे अफसर निलंबित हुए हैं। इसमें मनरेगा एक्ट में कार्रवाई होगी। विभागीय स्तर पर कराई गई जांच में 40 लाख रुपए का फर्जी बिल सामने आया है। इस आधार पर 40 लाख रुपए तक की रिकवरी निलंबित अफसरों से की जाएगी। मामले में सख्ती बरती जा रही है।

मामले में अफसरों ने जांच रिपोर्ट को दबाए रखा था 

प्रकरण की जांच छह माह पहले हुई थी। दुर्ग संभाग के एसई रामसागर ने जांच करने के बाद प्रतिवेदन सहित पूरी रिपोर्ट विभाग के प्रमुख अभियंता तक पहुंचा दी थी। सचिव स्तर पर भी प्रकरण पहुंच गया था पर अफसर फाइल दबाए बैठे थे। नई सरकार आने पर मामले की शिकायत मुख्य सचिव तक की गई। मुख्य सचिव ने तत्काल अफसरों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए तब निलंबन हुआ।



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