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छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध जनकवि श्री लक्ष्मण मस्तुरिया नहीं रहे, दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक गीतकार व कवि लक्ष्मण मस्तूरिया का आज 3 नवंबर को निधन हो गया। शनिवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल करने ले जाया जा रहा था। जहाँ रास्ते में ही उनका निधन हो गया। आपको बता दे श्री मस्तूरिया कुछ दिनों से वायरल फीवर से पीडि़त थे। उनके निधन से पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है।

लक्ष्मण मस्तूरिया का जन्न 7 जून 1949 को बिलासपुर के मस्तूरी में हुआ था। उनका अंतिम संस्कार रविवार यानि कल सुबह 11 बजे महादेव घाट में किया जाएगा। आज सुबह उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया।



स्कूल के दिनों से उन्हें लिखने पढ़ने का शौक था। आगे चलकर इस शौक ने उन्हें शीर्ष पर पहुंचा दिया। सत्तर के दशक में उनकी जाने-माने कवि एवं गीतकार के रूप में पहचान बन चुकी थी। जब टेलीविजन लोगों की पहुंच से दूर था, लक्ष्मण मस्तुरिया का लिखा और गाया गीत मोर संग चलव रे, मोर संग चलव गा… हर किसी की जुबान पर चढ़ चुका था। मस्तुरिया जब किसी कवि सम्मेलन के मंच पर कवि के रूप में आसीन रहते तो श्रोताओं की तरफ से यही फरमाइश होती थी, मोर संग चलव रे सुनाएं। सन् 2000 में जिस मोर छंइहा भुंइया से छत्तीसगढ़ी फिल्मों का दौर लौटा उसमें मस्तुरिया के लिखे गीतों ने धूम मचा दी थी।

उसके बाद एक और छत्तीसगढ़ी पिल्म मोर संग चलव रे में मस्तुरिया के वही लोकप्रिय गीत मोर संग चलव रे, मोर संग चलव गा… को शामिल किया गया। मोर संग चलव रे में यह गीत हिन्दी सिनेमा के जाने-माने गायक सुरेश वाडेकर की आवाज में था।

इसी वर्ष लक्ष्मण मस्तुरिया ने छत्तीसगढ़ी फिल्म मया मंजरी का लेखन कर उसका डायरेक्शन भी किया। यह फिल्म बनकर तैयार है। इसे विधि का विधान कहें अपनी पहली निर्देशित फिल्म को देखने मस्तुरिया इस संसार में नहीं हैं।

छत्तीसगढ़ के जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया की कालजयी रचनाएँ मोर संग चलव रे, हमू बेटा भुइंया के, गंवई-गंगा, धुनही बंसुरिया, माटी कहे कुम्हार से हमेशा लोगों के दिलों में और जुबां पर छाई रहेंगी। मोर संग चलव रे तो छत्तीसगढ़ के जन-जन के होठों पर बसा हुआ है लोक गीत है। आईए पुण्यात्मा जनकवि श्री लक्ष्मण मस्तुरिया जी को भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित करें।




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